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बड़ी खबरः उम्र 50+, ऊपर से कामचोर तो घर बैठा देगी योगी सरकार

स्क्रीनिंग शुरूः मुख्य सचिव ने सभी विभागों से 31 जुलाई तक मांगी दक्ष कर्मचारियों की सूची, बाकी सबको किया जाएगा सेवामुक्त

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sanjiv mishra

Jul 06, 2017

government employee

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लखनऊ. केंद्र की मोदी सरकार ने तोंदू पुलिसकर्मियों को प्रोन्नत न करने की घोषणा कर उनका तनाव बढ़ा दिया है, तो राज्य की योगी सरकार कहां पीछे रहने वाली थी। प्रदेश सरकार ने सभी कामचोर कर्मचारियों को बर्खास्त करने का फैसला किया है। इसके लिए स्क्रीनिंग शुरू कर 31 जुलाई तक दक्ष कर्मचारियों को चिह्नित करने का लक्ष्य दिया गया है। इसके बाद ऐसे सभी कर्मचारी अनिवार्य रूप से सेवामुक्त कर दिये जाएंगे, जो कामकाज के प्रति ढीले होंगे या फिर कामचोरी कर रहे होंगे।

हाल ही में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने कामकाज को लेकर चुस्ती बरतने पर जोर दिया है। भारी संख्या में तोंदू व अनफिट पुलिस कर्मियों पर गाज गिराते हुए उन्हें प्रोन्नति न देने व महत्वपूर्ण दायित्वों से दूर रखने का फैसला हुआ है। अभी यह फैसला अमल में आता, इससे पहले ही उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भी सक्रिय हो गयी है। योगी सरकार ने सभी कामचोर कर्मचारियों को निशाने पर लिया है। इसके लिए फिटनेस के साथ कामकाज के प्रति उनकी गंभीरता व रुझान पर भी फोकस किया गया है। पहले चरण में 50 साल से अधिक आयु के सभी कर्मचारियों की स्क्रीनिंग का फैसला हुआ है। इनमें से दक्ष कर्मचारी चिह्नित कर लिये जाएंगे। जो कर्मचारियों दक्षता के पैमाने पर खरे नहीं उतरेंगे, उन सभी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति के दायरे में लाकर नौकरी से निकाल दिया जाएगा।

मुख्य सचिव ने मांगी सूची

मुख्य सचिव राजीव कुमार ने इस संबंध में गुरुवार को सभी अपर मुख्य सचिवों व प्रमुख सचिवों से ऐसे कर्मचारियों की सूची मांग ली है। उन्होंने कहा है कि ऐसी सभी कर्मचारियों की स्क्रीनिंग हर हाल में 31 जुलाई 2017 तक कर ली जाए, जो कामकाज में दक्ष नहीं हैं। इस स्क्रीनिंग के दायरे में वे सभी कर्मचारी आएंगे, जिनकी उम्र 31 मार्च 2017 को 50 साल पूरी हो चुकी है। इसके साथ ही हर विभाग से इससे पहले अनिवार्य सेवानिवृत्ति के दायरे में आए कर्मचारियों का पूरा विवरण भी देने को कहा गया है।

तीन महीने का नोटिस

इस स्क्रीनिंग में चिह्नित कर्मचारियों को तीन महीने का नोटिस देकर नौकरी से निकाल दिया जाएगा। दरअसल राज्य कर्मचारियों की सेवानियमावली में भी इस तरह का स्पष्ट प्रावधान है। इसके मुताबिक 50 वर्ष की आयु पूरी कर चुके कर्मचारियों को उनका नियुक्ति अधिकारी किसी भी समय सेवानिवृत्त हो जाने के आदेश जारी कर सकता है। ये कर्मचारी स्थायी हों या अस्थायी, इसका भी असर नहीं पड़ता है। इसके लिए नियुक्ति अधिकारी उन्हें नोटिस जारी करता है और उक्त नोटिस की अवधि तीन माह होती है।

कर्मचारी पहले से आंदोलित

उत्तर प्रदेश में राज्य कर्मचारी पहले से ही आंदोलित चल रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें सुबह नौ बजे दफ्तर पहुंचने का आदेश जारी किया है। इससे प्रदेश के 25 लाख से अधिक कर्मचारी गुस्से में हैं और प्रदर्शन की शुरूआत भी हो गयी है। अब अनिवार्य सेवानिवृत्ति के इस फैसले से यह गुस्सा और बढ़ने की उम्मीद है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि अधिकारियों के स्तर पर स्क्रीनिंग से प्रशासनिक अराजकता की स्थिति भी हो सकती है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार सख्त रुख अख्तियार कर रही है।