
UP Biogas And Diesel Production Plant: उत्तर प्रदेश में बायो गैस की 10 और बायो डीजल प्लांट की 2 परियोजनाओं के प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई है। यूपीनेडा यानी उत्तर प्रदेश न्यू एंड रिन्यूवेबेल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी की बैठक में इसकी सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद प्रस्ताव पास किए गए हैं। यह बैठक लखनऊ स्थित यूपीनेडा मुख्यालय में गुरुवार को ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्त्रोत के सचिव महेश कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में हुई थी। इस दौरान बैठक में प्रस्ताव समिति के सामने 20 प्रस्ताव रखे गए थे। इसमें से 12 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसके तहत बायो गैस और बायो डीजल उत्पादन संयंत्र स्थापित कर 93 टन सीबीजी और 44 किलोलीटर बायो डीजल का उत्पादन रोजाना हो सकेगा।
यूपीनेडा के निदेशक अनुपम शुक्ला ने मीडिया को बताया कि इन 12 परियोजनाओं से यूपी में 93 टन सीबीजी यानी कंप्रेस्ड बायो गैस और 44 किलोलीटर बायो डीजल का उत्पादन रोजाना होगा। प्रदेश सरकार ने इससे पहले भी 13 परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। इनका निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है। वहीं अभी तक उत्तर प्रदेश में कुल 25 प्रस्तावों को सरकार की मंजूरी मिली है। इनमें 1271 करोड़ रुपये का निवेश होना तय हुआ है। इसके लिए औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि गुरुवार को जिन 12 परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। उसमें कंप्रेस्ड बायो गैस के लिए बरेली में कार्बन सर्कल प्राइवेट लिमिटेड, मेरठ में आनंद मंगल इन्फ्रा डेवलपर्स की स्थापना की जाएगी।
इसके अलावा सीतापुर में ईकोतारस सस्टेनेबल सोल्यूशन, मुजफ्फरनगर में बायोस्पार्क एनर्जी, रायबरेली में पंचवटी फूड, मथुरा में अडानी टोटल एनर्जी बायोमास लिमिटेड, मुजफ्फरनगर में मेसर्स रिजूलेशन इण्डिया, मुरादाबाद में जैविक विकल्प ऊजा लिमिटेड, सहारनपुर में बीके इन्वेस्टमेंट सर्विस, शामली में शताक्छी बायोटेक की स्थापना होगी। जबकि बायो डीजल के लिए लखनऊ में सिसोदिया रिसर्च लेबोरेटरीज एवं मैटफ्यूजन वेल्ड की स्थापना कराई जाएगी।
आम आदमी को मिलेगी सहूलियत, सस्ता होगा ईंधन
दरअसल, बायोगैस, जैविक फीडस्टॉक से अवायवीय पाचन प्रक्रिया का उपयोग करके उत्पादित एक अक्षय ईंधन, मुख्य रूप से मीथेन (50-65%), कार्बन डाइऑक्साइड (30-40%), हाइड्रोजन सल्फाइड (1-2.5%) और नमी के एक छोटे अंश से बनती है। कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) उन्नत या उच्च शुद्धता वाली बायोगैस (कार्बन डाइ ऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड और नमी को हटाने के बाद) 250 बार के दबाव पर बायोगैस (सीबीजी) ईंधन बनती है। इसमें संपीडित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) के समान गुण होते हैं और इसे सीधे सीएनजी इंजनों को बिजली देने के लिये इस्तेमाल किया जा सकता है।
बायोगैस संयंत्र से प्राप्त गैस का उपयोग भोजन पकाने व रोशनी करने के लिए किया जाता है। बायोगैस से द्विईंधनीय इंजन चलाकर 100 प्रतिशत पेट्रोल एवं 80 प्रतिशत तक डीजल की बचत भी की जा सकती है। इसे रसोई, वाहन और पंपसेट में इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी यूपी में इसका उत्पादन होने से ईंधन सस्ता हो सकता है। आम लोगों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
Updated on:
20 Oct 2023 02:03 pm
Published on:
20 Oct 2023 02:02 pm
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