
Blue Whale Challenge
लखनऊ. ब्लू ब्हेल गेम (Blue Whale Game Challenge) का चस्का लगातार लोगों की जान का दुश्मन साबित हो रहा है। विश्व में ब्लू ब्हेल गेम सबसे ज्यादा भारत में सर्च किया जा रहा है। इसमें उत्तर प्रदेश इस गेम को सर्च करने के मामले में 26 वें पायदान पर होने का दावा किया जा रहा है। इस गेम की लत सबसे ज्यादा स्कूली बच्चों और युवाओं को पड़ रही है। हाल में उन्नाव एक छात्र ने गेम का चैलेंज पूरा करने के लिए आत्महत्या का प्रयास किया। वहीं गुरुवार को लखनऊ में ब्लू ब्हेल गेम की वज़ह एक स्कूली छात्र ने आत्महत्या कर ली।
दो दिन में दूसरा मामला, सैकड़ों ने गवाई जान
रूपेश कुमार सिंह अपने परिवार के साथ इंदिरानगर बी ब्लाॅक में रहने वाले रहते हैं। गुरुवार को उनके 13 साल के बेटे आदित्य वर्धन सिंह ने फांसी लगा ली। बताया जा रहा है कि वह अपनी मां के मोबाईल पर घंटों गेम खेलता रहता था। कई दिनों से वह परेशान भी लग रहा था। गुरुवार को अचानक उसने अपने कमरे में फांसी लगा ली। वहीं उन्नाव में एक स्कूली छात्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया था। इस मामले में भी छात्र पिछले कई दिनों से स्मार्ट फोन पर लगातार गेम के पीछे सब कुछ भूल गया था। हालांकि जब उसने फांसी लगाने का प्रयास किया तो परिवार के लोगों ने देख लिया। किसी तरह उसके गले से फंदा निकालकर जान बचाई। इन दोनों ही मामलों में बच्चों पर ब्लू ब्हेल गेम चैलेंज पूरा करने के दबाव की आशंका जताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक इस गेम के जाल में फंसकर भारत सहित विश्व भर में 130 से ज्यादा लोग अपनी जान गवा चुके हैं।
नशे की लत जैसा है ब्लू ब्हेल गेम
ब्लू ब्हेल गेम को खेलने वालो को 50 दिन में क्यूरेटर (एडमिन) द्वारा 50 खतरनाक टास्क दिए जाते हैं। इन्हें एक-एक कर पूरा करना होता है। इसे खेलने वाले धीरे-धीरे अवसाद की तरफ बढ़ने लगते है। मनोचिकित्सकों का मानना है कि यह किसी नशे की लत से कम नहीं है। केजीएमयू में मनोचिकित्सक डॉ. श्रीकांत श्रीवास्तव ने बताया है यह गेम बड़ों के मुकाबले बच्चों को ज्यादा प्रभावित कर रहा है। बच्चों में सोचने-समझने की ताकत कम होती है। बच्चे हो या युवा हर किसी में थोड़ा और पाने की लालच होती है। इस गेम में हर स्टेज को पार करने की जिज्ञासा पैदा की जाती है। इससे लोगों गेम में उलझते जा रहे हैं। साथ ही टास्क पूरा न होने पर धमकी मिलने से अवसाद पैदा होता है। बच्चों के बदलते बरताव पर घर वालों को उनसे बात करनी चाहिए। साथ ही ऐसे मामलों में मनोचिकित्सक के पास न जाने की धारण को खत्म करना होगा।
पुलिस और सरकार का गेम पर बैन नाकाम
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस गेम से हो रही मौंत के सिलसिले को देखते हुए चिंता व्यक्त की गई थी। इसके बाद डीजीपी सुलखान सिंह ने 22 अगस्त प्रदेश में ब्लू व्हेल गेम को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने व इसे फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं केंद्र सरकार की तरफ से भी 11 अगस्त को इसे बैन करने का आदेश जारी हुआ। लेकिन देश में लगातार लोग सोशल साइट, गूगल पर इसे तलाश रहे हैं। गूगल सर्च में यह गेम ट्रेंडिंग सर्च में शामिल है।
ब्लू व्हेल सर्च करने में भारत टॉप पर
हाल में जारी हुई गूगर सर्च के ट्रेंड डाटा के मुताबिक भारत में ब्लू ब्हेल गेम सबसे ज्यादा सर्च किया जा रहा है। इस खेल तलाशने में विश्व के शीर्ष दस शहरों में भारत के सात शहरों के नाम शामिल हैं। इसमें कोच्चि, तिरुवनंतपुरम, कोलकाता, मुबंई, दिल्ली सहित अन्य नाम हैं। वहीं यूपी भी इस लिस्ट में ज्यादा पीछे नहीं है। इस गेम को सर्च करने वाले देशों की रैंकिंग में भारत फिलहाल चौथे नबंर पर है।
क्या है ब्लू ब्हेल गेम
ब्लू ब्हेल गेम ( (Blue Whale Game Online) खेलने वाले को 50 दिन तक अलग-अलग खतरनाक टास्क दिए जाते हैं। इसका 50वां टास्क आत्महत्या होता है। यह गेम किसी एप के जरिये डाउनलोड नहीं किया जा सकता। क्योंकि यह एपीके फाइल पर है। जो एडिमन द्वारा सिर्फ चुनिंदा लोगों तक इंटरनेट के जरिये पहुंचती है। इसके बाद इस लिंक को खोलने पर अपनी सारी जानकारी देनी होती है। फिर ऑनलाइन यह खेल शुरू होता है। हर रोज टास्क पूरा करने के बाद फोटो और विडियो अपलोड करना होता है। तब अगला स्टेज खेलने को मिलता है। इस गेम की वजह से अब तक 130 से ज्यादा लोग अपनी जान गवा चुके हैं। इस बनाने वाला रूस में रहने वाला छात्र फिलिप बुडेईकिन है। इस गेम की वज़ह से हुई मौत के आरोप में उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। लेकिन यह गेम अन्य एडमिन के माध्यम से फैल रहा है। किसी ऐप या इंटरनेट साइट पर न होने की वज़ह से पूरा विश्व इसे बैन करने में अब तक नाकाम है।
वर्जन
ब्लू ब्हेल गेम का प्रसार करने वाले सोशल मीडिया ग्रुप और उनके सदस्यों पर नज़र रखने का प्रयास जारी है। स्कूल और अभिभावक के जरिये पुलिस बच्चों को गेम नुकसान बताकर आगाह कर रही है। (दीपक कुमार, एसएसपी लखनऊ)
हमने पैरंट्स को मैसेज भेज दिया है कि ऐसे इस तरह के गेम से बच्चों को दूर रखें। हमने अपनी वेबसाइट पर भी इसको लेकर सावधानियों से जुड़ा मैसेज अपलोड किया है। मेरी सलाह की पैरंट्स बच्चों को फोन, लैपटॉप पर नजर रखें। (रीता खन्ना, प्रिंसिपल, स्प्रिंगडेल स्कूल)
Updated on:
08 Sept 2017 04:07 pm
Published on:
08 Sept 2017 04:03 pm
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