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Poster War : माघ मेला विवाद पर लखनऊ में ब्राह्मण मुद्दे को लेकर सियासी संग्राम तेज

Poster War Lucknow: राजधानी लखनऊ में ब्राह्मण समाज को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। प्रयागराज माघ मेले की घटना के बाद हजरतगंज में पोस्टर वार शुरू हो गया। संगम स्नान विवाद और बटुकों के साथ कथित अभद्रता पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Feb 21, 2026

पोस्टर वार से बढ़ी हलचल, माघ मेले की घटना ने यूपी की राजनीति में मचाई हलचल (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

पोस्टर वार से बढ़ी हलचल, माघ मेले की घटना ने यूपी की राजनीति में मचाई हलचल (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Brahmin Row Intensifies in Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ब्राह्मण समाज को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य के संगम स्नान से जुड़े विवाद और ब्राह्मण बटुकों की चोटी खींचे जाने की कथित घटना के बाद प्रदेशभर में आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है और राजधानी में पोस्टर वार के जरिए विरोध दर्ज कराया जा रहा है।

माघ मेले की घटना से बढ़ा विवाद

जानकारी के अनुसार, प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के संगम स्नान को लेकर विवाद खड़ा हुआ। इसी दौरान ब्राह्मण बटुकों की चोटी खींचे जाने की घटना सामने आई, जिसे लेकर ब्राह्मण समाज में रोष व्याप्त है। धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने इसे परंपरा और सम्मान से जुड़ा विषय बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इस घटना के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा तेज हो गई। विभिन्न संगठनों ने इसे ब्राह्मण समाज के सम्मान से जोड़ते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

हजरतगंज में पोस्टर वार

विवाद के बीच राजधानी के हजरतगंज और भाजपा प्रदेश मुख्यालय के बाहर विरोध स्वरूप पोस्टर लगाए गए। इन पोस्टरों में ब्राह्मण समाज के सम्मान की रक्षा की मांग की गई है और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील की गई है। रामतीर्थ वार्ड के भाजपा लखनऊ महानगर के वार्ड अध्यक्ष देवांश पाण्डे ने पोस्टर लगाकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज की धार्मिक आस्थाओं के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। विभिन्न दलों के नेताओं ने बयान जारी कर घटना की निंदा की है। जहां सत्ता पक्ष के नेता कानून के तहत कार्रवाई का भरोसा दिला रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे सरकार की विफलता बताते हुए सवाल उठा रहा है। मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यह मुद्दा आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

मुख्यमंत्री से सख्त कार्रवाई की मांग

ब्राह्मण संगठनों और स्थानीय नेताओं ने मुख्यमंत्री से दोषियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि मामले की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर विस्तृत बयान अभी सामने नहीं आया है।

सवर्ण मोर्चा का प्रदर्शन का ऐलान

इसी क्रम में सवर्ण मोर्चा के तत्वाधान में यूजीसी के खिलाफ 21 फरवरी को लखनऊ में प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है। संयोजक संदीप सिंह ने बताया कि दोपहर 12 बजे परिवर्तन चौराहे से हजरतगंज चौराहे स्थित गांधी प्रतिमा तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। उन्होंने कहा, “हम लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार के सामने रखेंगे। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होने दी जाएगी।” आयोजकों का दावा है कि बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग इसमें भाग लेंगे।

प्रशासन की तैयारी

संभावित प्रदर्शन और बढ़ती राजनीतिक हलचल को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल की तैनाती की जा रही है। सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है, ताकि अफवाहों को फैलने से रोका जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।