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Brij Bhushan: यौन उत्पीड़न के किन मामलों में होती है फौरन गिरफ्तारी ? ब्रजभूषण क्यों नहीं हो सकते गिरफ्तार ?

महिला पहलवानों की मांग है कि सांसद बृजभूषण को तत्काल गिरफ्तार किया जाए। लेकिन मामला जांच के अधीन है और उनकी गिरफ्तारी नहीं हो रही है। आखिर सांसद बृजभूषण गिरफ्तार नहीं हो रहे हैं। जाने क्या है कारण

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महिला पहलवान

Brij Bhushan: महिला पहलवानों ने धरना-प्रदर्शन करके हंगामा खड़ा किया है कि सांसद बृजभूषण शरण सिंह को तत्काल गिरफ्तार कर लिया जाए। दूसरी तरफ सांसद बृजभूषण दमदारी से कह रहे हैं कि यदि मै गलत हुआ तो खुद ही फांसी पर चढऩे को तैयार हूं।

हांलाकि मामला अभी जांच के अधीन है। यह भी कहा जा रहा है कि सांसद के खिलाफ दिल्ली पुलिस को कोई भी ठोस सबूत नहीं मिला है, जिसमें पहलवानों के आरोप सत्य पाए जा रहे हों। भारतीय न्याय प्रणाली सिर्फ आरोप लगा देने मात्र से किसी को दोषी नहीं मानती जबतक पर्याप्त सबूत और गवाह न मौजूद हों।

क्या सासंद का विशेषाधिकार है बृजभूषण को
यह ठीक है कि बृजभूषण शरण सिंह सत्ताधारी भाजपा के सांसद हैं और सांसद रहते उनको संसदीय विशेषाधिकार भी प्राप्त है। किंतु यह विशेषाधिकार आपराधिक मामलों में लागू नहीं होता।

हांलाकि सदन की कार्यवाही के दौरान यदि किसी सांसद पर आपराधिक मामले बनते हों तो उसे गिरफ्तार करने या पूछताछ अथवा जांच में शामिल करने से पहले लोकसभा अध्यक्ष की अनुमति लेना जरुर होता है। किंतु सदन की कार्यवाही न चल रही हो तो इसके लिए पुलिस बाध्य नहीं होती है।

क्या कहते हैं कानून के जानकार
प्रयागराज हाईकोर्ट के अधिवक्ता आशुतोष श्रीवास्तव कहते हैं कि सीआरपीसी के नियमों के अनुसार और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के अनुसार चार मामलों में गिरफ्तारी हो सकती है। पहला मामला गंभीर हो, दूसरा अभियुक्त भाग सकता हो, तीसरा जांच में सहयोग नहीं कर रहा हो, चौथा मामला गैर जमानती हो।

इन सभी मामलों को देखें तो बृज भूषण शरण सिंह जांच में सहयोग भी कर रहे हैं और भागने का कोई सवाल ही नहीं है। मामला कितना गंभीर है यह जांच के बाद ही पता चलेगा। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रमोद सिंह कहते हैं कि मामला जांच के अधीन है और यदि सांसद के विशेषाधिकार की बात छोड़ भी दे तो आरोप कब लगे, किसने-किस पर लगाए आदि भी देखा जाता है।

वह बताते हैं कि दुष्कर्म या यौन उत्पीडऩ के मामलो में यह भी देखा जाता है कि घटना कब हुई है और आरोप कब लगाएं जा रहे हैं। बृजभूषण के मामले में घटना को घटित हुए लंबा वक्त गुजर चुका है, इसलिए बिना जांच के गिरफ्तारी नहीं हो सकती।

क्यों होंगे बृजभूषण गिरफ्तार ?
बृजभूषण मामले में हाईकोर्ट इलाहाबाद के अधिवक्ता दिनेश कुमार सिंह बताते हैं कि ‘सीआरपीसी का एक प्रक्रिया है, यदि एलिगेशन बिलेटेड है अर्थात आरोप देर से लगाए गए हैं तो नियम है जांच के बाद ही गिरफ्तारी होगी। बहुत सारी बातें हमारे कानून में परंपरा के आधार पर चलती हैं।

आरोप तत्काल लगाए गए हों तो गिरफ्तारी संभव होती है।’ जबकि हाईकोर्ट इलाहाबाद के वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक मिश्र सवाल करते हैं कि ‘क्यों होगी गिरफ्तारी क्या बृजभूषण भाग कर कहीं जा रहे हैं या उनके पास कोई सबूत है जो गिरफ्तार करके पुलिस हासिल करेगी या किसी सबूत को वह मिटा रहे हैं अथवा मामले को प्रभावित कर रहे हैं।’

वह सवाल करते हैं कि ‘जब घटना के घटित होने के लंबे समय बाद आरोप लगाए गए हैं तो जांच होने दीजिए।’

पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट बन गया है मुसीबत
हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता चिंता प्रगट करते हैं वह बताते हैं कि एक समय था कि दहेज उत्पीडऩ के मामले में सिर्फ आरोप लगा देने से पूरा परिवार जेल में चला जाता था। उस कानून का जमकर दुरुपयोग किया गया था। अब वही हाल पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी का हो गया है।

आरोप लगाना आसान है, दुर्भावना पूर्ण आरोप के आधार पर किसी को फौरन क्यों गिरफ्तार किया जाएगा। जबतक आरोप की सत्यता प्रमाणित न हो। बृजभूषण शरण सिंह जब खुद कह रहे हैं कि आरोप साबित हुआ तो वह सजा भुगतने को तैयार हैं, तो सिर्फ कुछ लोगों के कहने पर गिरफ्तार कर लिया जाए।

जांच बाद में होती रहेगी पहले गिरफ्तार ही कर ले, क्योंकि घटना के घटित होने के बाद अपनी सुविधा से कुछ लोगों ने आरोप का समय तय किया है। कानून के अनुसार ही कार्यवाही हो रही है, यह प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।