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जनता की जिंदगी बदले, तभी सफल माना जाएगा प्रशासन; सुशासन पर सीएम योगी का बड़ा संदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव ही प्रशासन की सार्थकता है। साधना शृंखला-2026 के जरिए सुशासन और कर्मयोगी कार्य संस्कृति पर जोर दिया।
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लखनऊ

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Ritesh Singh

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Updated: 23 Oct 2026, 12:18 PM IST

लखनऊ में आयोजित होने वाली क्षेत्रीय साधना शृंखला-2026 में आठ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों की सहभागिता प्रस्तावित है (फोटो सोर्स :file photo, Ritesh Singh )

लखनऊ में आयोजित होने वाली क्षेत्रीय साधना शृंखला-2026 में आठ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों की सहभागिता प्रस्तावित है (फोटो सोर्स :file photo, Ritesh Singh )

Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रशासन की वास्तविक सार्थकता जनमानस के जीवन में आने वाले सकारात्मक परिवर्तन से सिद्ध होती है। शासन की योजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा माना जा सकता है, जब उनका लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे और लोगों के जीवन में वास्तविक सुधार दिखाई दे। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर पोस्ट कर साधना शृंखला-2026 के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लोक सेवकों को प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण संवाहक बताते हुए दक्ष, संवेदनशील और उत्तरदायी कार्य संस्कृति पर जोर दिया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, सुशासन का संकल्प तभी साकार होता है, जब सरकारी तंत्र जनकल्याण को प्राथमिकता देते हुए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करता है।

जनकल्याण से जुड़कर सार्थक होता है सुशासन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में कहा कि जनमानस के जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलाव के सबसे महत्वपूर्ण संवाहक लोक सेवक हैं। प्रशासनिक व्यवस्था का प्रभाव केवल सरकारी कार्यालयों के कामकाज या योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा संबंध आम नागरिक की सुविधाओं, अवसरों और जीवन की गुणवत्ता से होता है। जब प्रशासनिक तंत्र दक्षता के साथ काम करता है और जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहता है, तब सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचता है। इससे शासन के प्रति नागरिकों का विश्वास मजबूत होता है और जनकल्याण की अवधारणा को वास्तविक रूप मिलता है। मुख्यमंत्री ने इसी सोच को सुशासन का आधार बताते हुए लोक सेवकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

लोक सेवकों की कार्यशैली से आता है बदलाव

मुख्यमंत्री के संदेश में प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी पर विशेष जोर दिखाई दिया। सरकारी योजनाओं की सफलता के लिए केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारना भी जरूरी है। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों में कर्तव्यनिष्ठा, जवाबदेही, संवेदनशीलता और समयबद्ध तरीके से कार्य करने की क्षमता आवश्यक है। आम नागरिक जब अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों तक पहुंचता है, तो उसे मिलने वाली सहायता और व्यवहार से ही प्रशासन की कार्यशैली का वास्तविक अनुभव होता है। ऐसे में लोक सेवकों की भूमिका केवल आदेशों का पालन करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे सरकार की नीतियों और जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। मुख्यमंत्री ने इसी संदर्भ में प्रशासनिक व्यवस्था को जनहित के प्रति अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

2017 से पहले की व्यवस्था पर मुख्यमंत्री ने उठाए सवाल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक कार्य संस्कृति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय की सरकारों में परिवारवाद, तुष्टीकरण और भ्रष्टाचार को प्राथमिकता मिलने से प्रदेश की प्रशासनिक दक्षता, कार्यकुशलता और कार्य संस्कृति प्रभावित हुई थी। मुख्यमंत्री के अनुसार, अपराध, माफिया राज, नीतिगत उदासीनता और प्रदेश की पहचान से जुड़े संकट ने उत्तर प्रदेश की व्यापक संभावनाओं को प्रभावित किया था। उन्होंने अपने संदेश में प्रदेश की पिछली छवि और वर्तमान विकास यात्रा के बीच आए बदलाव का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार, बेहतर कार्य संस्कृति और विकास को प्राथमिकता देने से राज्य की क्षमताओं को आगे बढ़ाने का अवसर मिला है। ये टिप्पणियां मुख्यमंत्री द्वारा व्यक्त राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण का हिस्सा हैं।

मिशन कर्मयोगी से प्रशासनिक कार्य संस्कृति को नई दिशा

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में संचालित मिशन कर्मयोगी जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके माध्यम से देश की प्रशासनिक कार्य संस्कृति को नई दिशा मिल रही है। मिशन कर्मयोगी का व्यापक उद्देश्य लोक सेवकों की क्षमताओं को विकसित करना और उन्हें अधिक दक्ष, परिणामोन्मुखी तथा नागरिक-केंद्रित प्रशासन के लिए तैयार करना है। बदलते समय में प्रशासन के सामने नई चुनौतियां और जनता की बढ़ती अपेक्षाएं हैं। ऐसे में अधिकारियों और कर्मचारियों के कौशल, कार्यक्षमता तथा निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करना महत्वपूर्ण माना जाता है। मुख्यमंत्री ने इसी संदर्भ में प्रशासनिक तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना है कि बेहतर कार्य संस्कृति के माध्यम से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार लाया जा सकता है और आम नागरिकों को सेवाओं का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराया जा सकता है।

बीमारू छवि से आगे बढ़ने का दावा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने अपनी बीमारू छवि से बाहर निकलते हुए विकास की नई दिशा में यात्रा की है। उन्होंने प्रदेश के इस बदलाव को ‘बॉटलनेक से ब्रेकथ्रू स्टेट’ बनने की ऐतिहासिक यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, उत्तर प्रदेश अपने प्रशासनिक, आर्थिक और संस्थागत ढांचे को नए सिरे से मजबूत करते हुए विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस प्रक्रिया में प्रशासनिक सुधारों, संस्थागत क्षमता और विकास संबंधी प्राथमिकताओं को महत्वपूर्ण माना गया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की संभावनाओं को साकार करने के लिए कार्यकुशल प्रशासन को आवश्यक बताया। उनके संदेश का प्रमुख उद्देश्य यह रेखांकित करना रहा कि राज्य के विकास में सरकारी तंत्र की दक्षता और लोक सेवकों की प्रतिबद्धता की अहम भूमिका है।

लखनऊ में दो दिवसीय साधना शृंखला-2026 का शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में जानकारी दी कि इसी परिवर्तनकारी यात्रा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शुक्रवार को राजधानी लखनऊ में दो दिवसीय क्षेत्रीय साधना शृंखला-2026 का शुभारंभ होगा। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री(स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह की गरिमामयी उपस्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि इसमें आठ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों की सहभागिता रहेगी। यह आयोजन प्रशासनिक कार्य संस्कृति, लोक सेवकों की क्षमता और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी से प्रशासनिक अनुभवों, कार्यप्रणालियों और बेहतर शासन से जुड़े विचारों के आदान-प्रदान की संभावनाएं भी बनती हैं। मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम को प्रदेश की प्रशासनिक परिवर्तन यात्रा को आगे बढ़ाने से जोड़कर देखा है।

‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्मयोगी उत्तर प्रदेश अंत्योदय के संकल्प को साकार करने और विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवधारणा का जोर ऐसी शासन व्यवस्था पर है, जिसमें प्रशासनिक प्रक्रियाएं प्रभावी हों, नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिलें और सरकारी तंत्र परिणाम देने पर केंद्रित रहे। अंत्योदय की भावना के अनुरूप समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना भी शासन की महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने साधना शृंखला-2026 की सफलता के लिए सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि लोक सेवकों की सक्रिय भागीदारी और बेहतर प्रशासनिक कार्य संस्कृति से जनकल्याण के प्रयासों को नई गति मिलेगी।

जनता के जीवन में बदलाव ही प्रशासन की कसौटी

मुख्यमंत्री के संदेश का मूल भाव यही है कि किसी भी सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था की सफलता का आकलन जनता के जीवन में आए बदलाव से किया जाना चाहिए। योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, जरूरतमंदों तक सुविधाओं की पहुंच, जवाबदेह कार्यप्रणाली और नागरिकों के प्रति संवेदनशील व्यवहार सुशासन के महत्वपूर्ण आधार हैं। साधना शृंखला-2026 के माध्यम से प्रशासनिक कार्य संस्कृति को बेहतर बनाने और लोकसेवकों की भूमिका को अधिक प्रभावी करने पर चर्चा की उम्मीद है। अब इस तरह के प्रयासों की वास्तविक सफलता इस बात से भी आंकी जाएगी कि प्रशासनिक सुधारों का लाभ आम नागरिकों तक किस हद तक पहुंचता है और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में कितना सुधार दिखाई देता है।

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