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संस्कृत को तकनीक से जोड़ेगी सरकार: सीएम योगी

बे के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदेश सरकार संस्कृत को आधुनिकरण से जोड़ेगी।
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लखनऊ

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Prashant Srivastava

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Updated: 2 Aug 2018, 6:24 PM IST

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संस्कृत को आधुनीकरण से जोड़ेगी सरकार: सीएम योगी

लखनऊ. सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदेश सरकार संस्कृत को आधुनिकरण से जोड़ेगी। उन्होंने राजधानी लखनऊ स्थित विश्वेश्वरैया प्रेक्षागृह में राजकीय संस्कृत परिषद के मेधावी छात्रों को सम्मानित करते हुए ये बात कही। सीएम योगी ने कहा कि पिछली सरकारों के दौरान शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर बात करते हुए और शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की अपनी प्रतिबध्यता के बारे में बताया.सीएम योगी ने कहा कि पहले परीक्षा में दो महीने व रिजल्ट में एक महीने लगते थे। जिससे रिजल्ट में देरी से तमाम बच्चे प्रवेश से वंचित हो जाते थे। हमने नकलविहीन परीक्षा तो कराई और शिक्षकों की कमी भी नहीं होने दी।

पहले होते थे नकल के ठेके


इस दौरान प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाले 10 विद्यार्थियों को सम्मान स्वरूप एक-एक लाख रुपये, टैबलेट, मेडल व प्रशस्ति पत्र और शेष मेधावी विद्यार्थियों को 21-21 हजार रुपये, टैबलेट, मेडल व प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। सीएम ने सभागार को संभोधित करते हुए कहा कि पहले नकल के ठेके होते थे। प्रतिभा के साथ खिलवाड़ होता था।शिक्षा विभाग नकल उद्योग बन गया था। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों में नकल माफिया हावी था.पहले प्रतिभा के साथ खिलवाड़ होता था.प्रदेश में जब शिक्षा विभाग ने ठाना कि मेधावियों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए तो नकलविहीन परीक्षा कराके दिखा दिया गया। हमने नकलविहीन परीक्षा कराकर ये दिखा दिया।

संस्कृत का हो आधुनीकरण

संस्कृत के आधुनीकरण को लेकर सीएम योगी ने कहा कि भारत दुनियां का एक प्राचीन राष्ट्र है। यह हमारे पुराणों में है। भारत का स्वाभिमान जाग्रत ना हो सके इसीलिए संस्कृत विषय की उपेक्षा होती रही है। हम अपनी परंपरा को लेकर चलें अच्छी बात है।।भारत की परंपरा कभी जड़वादी नहीं रही है। जहां कहीं भी प्रगति के स्वर दिखे हमने उनको अंगीकार किया है। संस्कृत को आधुनिकता से जोड़िए।।दुनियां इस बात को मानती है कि कम्प्यूटर की सबसे सरल भाषा संस्कृत है। हम संस्कृत को विज्ञान, गणित समेत दुनियां से जोड़ेंगे। यह भाषा नहीं है यह देववाणी है। संस्कृत के साथ अन्यों को जोड़ कर उन्नत प्रयास करना चाहिए। संस्कृत के माध्यम से आधुनिकता और पुरातन का एक बेहतर समन्वय जरूरी है। विगत एक वर्ष के दौरान आपने हर क्षेत्र में परिवर्तन देखा होगा।

कक्षा तीन से संस्कृत अनिवार्य


सरकार ने प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में कक्षा तीन से संस्कृत पढ़ाएं जाने की तैयारी की है। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग को प्रस्ताव तैयार करने के लिए कह दिया गया है।प्राइमरी स्कूलों में संस्कृत की शिक्षा दिए जाने पर सरकार का तर्क है की शुरू से संस्कृत पढ़ाने से बच्चों का इस परंपरागत भाषा के प्रति रुझान बेहतर होगा। वहीं इससे हिंदी व अन्य भाषाओ की समझ और विकसित होगी। सरकार बनने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ का जोर योग, संस्कृति और संस्कृत पर अधिक है। इन प्राथमिकताओं का असर शिक्षा के साथ ही योग को माध्यमिक स्कूलों में शामिल कर लिया गया है। इसके लिए पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। सरकार जहाँ पहली क्लास से ही अंग्रेजी पढ़ाएगी, वहीं तीसरी क्लास से ही संस्कृत को भी पढाई का हिस्सा बनाया जाएगा।