
Lucknow News: लखनऊ में शहर की कालोनियों का कचरा बाउंड्री के भीतर ही निस्तारित हो जाएगा। सूखे ठोस कचरे जैसे पुराने सामान, लोहा आदि कबाड़ी को दे दिए जाएंगे।` गीले कचरे से खाद बना कर पार्क और फुटपाथ पर हरियाली बढ़ाई जाएगी। पायलट परियोजना के तौर पर एक आरडब्ल्यूए यानी रेजीडेंट वेलफेयर सोसाइटी से शुरुआत हो रही है। आने वाले समय में सभी कालोनियों में यही मॉडल अपनाया जाएगा। स्मार्ट सिटी परियोजना के अन्तर्गत पुणे में सफल रहे इस मॉडल को लखनऊ में लागू करने का प्रयास हो रहा है।
कमिश्नर डॉ. रोशन जैकब के सामने इसका प्रजेंटेशन किया गया। कमिश्नर ने पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। पुणे में कई सोसाइटियों में कार्य कर रही प्रोअर्थ ने बताया कि किस तरह से शहर की कालोनियों को शून्य कचरा उत्सर्जन के लिए तैयार किया जा सकता है।
कमिश्नर के अनुसार पायलट प्रोजेक्ट सफल होने के बाद शहर की अन्य कालोनियों में भी इसे लागू किया जाएगा। पुराने शहर में मोहल्ला समितियों की मदद ली जाएगी। इस तरह तेजी से बढ़ रही कचरा निस्तारण की समस्या का आसान और स्थायी समाधान मिल सकेगा।
पार्श्वनाथ प्लैनेट से शुरुआत, 550 कालोनियों तक का लक्ष्य
गोमती नगर विभूतिखंड स्थित पार्श्वनाथ प्लैनेट सोसाइटी की आरडब्ल्यूए को चुना गया है। नगर आयुक्त इन्द्रजीत सिंह ने बताया कि यहां रोजाना 450 किलो कचरा निकलता है। अधिसंख्य कालोनियों का कचरा यदि बाउंड्री के भीतर ही निस्तारित हो जाए तो कूड़े के पहाड़ नहीं बनेंगे। फिलवक्त शहर से नगर निगम रोजाना 1650 मीट्रिक टन कचरा इकट्ठा कर रहा है।
शहर में 428 बहुमंजिला अपार्टमेंटों की आरडब्ल्यूए हैं। इनके अलावा आवास विकास परिषद की कालोनियों की आरडब्ल्यूए और मोहल्ला समितियों को जोड़ लें तो संख्या 550 के आसपास है। यदि सभी आरडब्ल्यूए इस मॉडल पर कार्य करने लगें तो 250 से 300 मीट्रिक टन कचरा कम हो जाएगा। ऐसे में शिवरी स्थित कचरा निस्तारण प्लांट ओवरलोड नहीं होगा।
Published on:
12 May 2023 02:52 pm
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