
इटावा. उत्तर प्रदेश के हॉस्पिटल्स में बच्चों की मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा। सरकार के तमाम वादों और दावों के उलट हॉस्पिटल्स में बच्चों की मौत की घटनाएं थम नहीं रही है। ताजा मामला इटावा का सैफई पीजीआई का है। यहाँ के ग्रामीण आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान में एक माह में 95 बच्चों की मौत हो गई है। बेहतरीन और उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं का दावा करते वाले पीजीआई में बच्चों की मौत की यह संख्या एक बार स्वास्थ्य महकमे और सरकार की लापरवाही की पोल खोल रही है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के गांव स्थित सैफ़ई पीजीआई में अगस्त महीने में 95 बच्चों की मौत हुई है। बच्चों की मौत इलाज के दौरान हुई है। हॉस्पिटल प्रशासन ने पीजीआई में 95 बच्चों की मौत को स्वीकार किया है। मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। डीएम और सीएमओ ने मामले की जांच कराने की बात कही है लेकिन खुलकर कोई भी कुछ कहने से बच रहा है।
यह भी बताया जा रहा है कि इन मौतों को लेकर हॉस्पिटल प्रशासन ने एक जांच रिपोर्ट तैयार की है और खुद को बेकसूर ठहरा दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की कमी या इलाज में लापरवाही जैसी बात नहीं हुई है।
जानकारी के मुताबिक अगस्त महीने में हॉस्पिटल में कुल 1464 बच्चे इलाज के लिए भर्ती हुए थे। इन बच्चों में से 95 बच्चो की मौत हुई है। इस मामले में पीजीआई सैफई के कुलपति टी प्रभाकर ने हॉस्पिटल में आक्सीजन की कमी या इलाज में लापरवाही की बातों से इंकार किया है।
इससे पहले उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हॉस्पिटल्स में बच्चों की मौतों की घटनाएं सामने आती रही हैं और इन्हें लेकर सरकार की खूब आलोचना भी हो चुकी है। गोरखपुर में आक्सीजन की कमी से बच्चों की मौतों और फर्रुखाबाद में 49 बच्चों की मौत की घटनाओं के बाद उत्तर प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य महकमे की काफी आलोचना हुई। अब ताजा मामले के बाद एक बार फिर से स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
Published on:
08 Sept 2017 08:23 pm
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