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Viral Video: बड़े इमामबाड़े में युवक की शर्मनाक हरकत, वायरल वीडियो से भड़का आक्रोश, पुलिस जांच तेज

Shocking Act at Lucknow Bara Imambara Sparks Outrage: लखनऊ के ऐतिहासिक बड़े इमामबाड़े में एक युवक द्वारा धार्मिक परिसर के अंदर अनुचित व्यवहार किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से हड़कंप मच गया है। शिया समुदाय के इस पवित्र स्थल की गरिमा भंग होने पर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और पुलिस जांच जारी है।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jan 03, 2026

लखनऊ के बड़े इमामबाड़े में शर्मनाक घटना, धार्मिक स्थल की गरिमा पर सवाल (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

लखनऊ के बड़े इमामबाड़े में शर्मनाक घटना, धार्मिक स्थल की गरिमा पर सवाल (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Viral Video Shocking:  उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बड़े इमामबाड़े में हाल ही में सामने आई एक शर्मनाक घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। शिया समुदाय के इस प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल में एक युवक द्वारा अनुचित व्यवहार किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में युवक को इमामबाड़े परिसर की प्रसिद्ध भूल-भुलैया के अंदर पेशाब करते हुए देखा जा सकता है। इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और शिया समुदाय में भारी आक्रोश है।

बड़ा इमामबाड़ा लखनऊ की पहचान

बड़ा इमामबाड़ा न केवल लखनऊ की पहचान है, बल्कि यह भारत की ऐतिहासिक विरासत का भी अहम हिस्सा है। इसका निर्माण 18वीं शताब्दी में अवध के नवाब आसफ़-उद-दौला ने कराया था। यह इमारत अपनी अद्भुत वास्तुकला, विशाल हॉल और जटिल भूल-भुलैया के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। हर साल लाखों पर्यटक और श्रद्धालु यहां दर्शन और भ्रमण के लिए आते हैं। ऐसे पवित्र और ऐतिहासिक स्थल पर इस तरह की हरकत ने समाज में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है।

वीडियो सोशल मीडिया

वायरल वीडियो सामने आने के बाद सबसे पहले स्थानीय लोगों ने इसकी कड़ी निंदा की। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने युवक के व्यवहार को निंदनीय बताते हुए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की। शिया धर्मगुरुओं और समुदाय के वरिष्ठ लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य बताया है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल धार्मिक स्थलों की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती हैं।

चौक कोतवाली में  2026 की पहली  एफआईआर

मामले की गंभीरता को देखते हुए हुसैनाबाद ट्रस्ट ने तत्काल कार्रवाई की। ट्रस्ट के सहायक कार्यालय अधीक्षक की ओर से लखनऊ की चौक कोतवाली में इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह साल 2026 में चौक कोतवाली में दर्ज की गई पहली एफआईआर है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और वायरल वीडियो के आधार पर आरोपी युवक की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि वीडियो की तकनीकी जांच कराई जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वीडियो कब का है और इसे किसने रिकॉर्ड किया। इसके साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, जिससे आरोपी तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके। पुलिस अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि आरोपी की पहचान होते ही उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कड़े नियमों को जारी करें 

इस घटना ने एक बार फिर से ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़ा इमामबाड़ा जैसे महत्वपूर्ण स्थल पर प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में पर्यटक आते हैं, लेकिन इसके बावजूद इस तरह की घटना का सामने आना सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है। कई स्थानीय लोगों का कहना है कि परिसर में निगरानी और गश्त को और मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। शिया समुदाय के नेताओं ने प्रशासन से मांग की है कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले पर्यटकों के लिए सख्त नियम बनाए जाएं और उनका कड़ाई से पालन कराया जाए। उनका कहना है कि इमामबाड़ा केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा और आस्था का केंद्र है, जहां आने वाले हर व्यक्ति को मर्यादा और नियमों का पालन करना चाहिए।

पुलिस से शुरू की जांच तेज 

प्रशासन की ओर से भी इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया गया है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि धार्मिक स्थलों की गरिमा भंग करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में कानून के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह की हरकत करने से पहले सौ बार सोचे। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और आरोपी की तलाश की जा रही है। प्रशासन और ट्रस्ट दोनों ही यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि बड़े इमामबाड़े जैसे पवित्र और ऐतिहासिक स्थल की गरिमा बनी रहे। यह घटना एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और वहां आने वालों की जिम्मेदारी को हल्के में नहीं लिया जा सकता।