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Lucknow Metro ईस्ट–वेस्ट कॉरिडोर को रफ्तार, कास्टिंग यार्ड व डिपो के लिए एलडीए देगा भूमि

Lucknow Metro के ईस्ट–वेस्ट कॉरिडोर के निर्माण को गति देने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण 12.5 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराएगा। अस्थायी कास्टिंग यार्ड और मेट्रो डिपो के लिए वसंत कुंज व प्रबंध नगर योजना में भूमि चिन्हित की गई है, जिससे परियोजना के काम में तेजी आएगी।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jan 03, 2026

लखनऊ मेट्रो ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर को मिलेगी रफ्तार, अस्थायी कास्टिंग यार्ड के लिए एलडीए देगा 12.5 हेक्टेयर भूमि (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

लखनऊ मेट्रो ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर को मिलेगी रफ्तार, अस्थायी कास्टिंग यार्ड के लिए एलडीए देगा 12.5 हेक्टेयर भूमि (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Lucknow Metro East–West Corridor Set to Accelerate: लखनऊ शहर के सार्वजनिक परिवहन को नई दिशा देने वाली मेट्रो परियोजना के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर को गति देने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस कॉरिडोर के निर्माण के लिए अस्थायी कास्टिंग यार्ड बनाए जाने की योजना को लेकर LDA 12.5 हेक्टेयर भूमि मेट्रो को उपलब्ध कराएगा। इस संबंध में LDA के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने मेट्रो रेल अधिकारियों के साथ बैठक कर परियोजना से जुड़ी प्राधिकरण और नजूल भूमि के प्रस्तावों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि मेट्रो परियोजना के समयबद्ध और सुचारू निर्माण के लिए भूमि की उपलब्धता सबसे अहम है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत उपलब्ध भूमि को चिन्हित कर मेट्रो प्रशासन को सौंपने की प्रक्रिया तेज की जा रही है।

अस्थायी कास्टिंग यार्ड के लिए कहां-कहां से मिलेगी जमीन

ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के निर्माण के लिए प्रस्तावित अस्थायी कास्टिंग यार्ड हेतु एलडीए द्वारा दो प्रमुख स्थानों की पहचान की गई है। पहला, बसन्त कुंज आवासीय योजना के सेक्टर-के में स्थित लगभग 6 हेक्टेयर भूमि है। दूसरा, प्रबंध नगर योजना के अंतर्गत निर्मित अस्थायी पार्किंग स्थल की लगभग 6.5 एकड़ भूमि को इस उद्देश्य के लिए चिन्हित किया गया है।

प्रबंध नगर योजना में यह अस्थायी पार्किंग राष्ट्र प्रेरणा स्थल के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान बड़े पैमाने पर वाहनों के संचालन और प्रबंधन के लिए बनाई गई थी। अब कार्यक्रम संपन्न होने के बाद इस भूमि के वैकल्पिक उपयोग पर विचार किया गया, जिसमें मेट्रो के अस्थायी कास्टिंग यार्ड के रूप में इसका इस्तेमाल सबसे उपयुक्त माना गया है। LDA  और मेट्रो प्रशासन के बीच सहमति बनने के बाद यह भूमि औपचारिक रूप से मेट्रो को हस्तांतरित कर दी जाएगी।

कास्टिंग यार्ड क्यों है जरूरी

मेट्रो परियोजनाओं में कास्टिंग यार्ड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यहां मेट्रो के पिलर, गर्डर, सेगमेंट और अन्य प्रीकास्ट संरचनाओं का निर्माण किया जाता है। इसके बाद इन्हें निर्माण स्थल तक ले जाकर स्थापित किया जाता है। इससे निर्माण कार्य तेज होता है, गुणवत्ता बनी रहती है और लागत नियंत्रण में भी मदद मिलती है। ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर जैसे बड़े और तकनीकी रूप से जटिल प्रोजेक्ट के लिए कास्टिंग यार्ड की समय पर स्थापना आवश्यक मानी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, भूमि उपलब्ध होते ही कास्टिंग यार्ड के विकास का काम शुरू कर दिया जाएगा।

मेट्रो डिपो के लिए भी चिन्हित हुई भूमि

बैठक में केवल कास्टिंग यार्ड ही नहीं, बल्कि मेट्रो डिपो के निर्माण को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मेट्रो डिपो के लिए बसन्त कुंज योजना के सेक्टर-ए के दक्षिणी भाग में लगभग 18 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है। मेट्रो डिपो किसी भी मेट्रो परियोजना का स्थायी और अनिवार्य हिस्सा होता है। यहां मेट्रो ट्रेनों की पार्किंग, रखरखाव, मरम्मत, सफाई और तकनीकी जांच जैसे कार्य किए जाते हैं। इसके अलावा, मेट्रो संचालन से जुड़े कई प्रशासनिक और तकनीकी विभाग भी डिपो परिसर में ही स्थित होते हैं।

दुबग्गा मछली मंडी के पुनर्वास की योजना

मेट्रो डिपो के लिए चिन्हित भूमि में दुबग्गा मछली मंडी की जमीन भी शामिल है। इसको लेकर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मछली मंडी को हटाने के साथ-साथ उसका समुचित पुनर्वास भी सुनिश्चित किया जाएगा। दुबग्गा मछली मंडी के एवज में आगरा एक्सप्रेस-वे पर प्रस्तावित वरुण विहार योजना में उतनी ही भूमि मछली मंडी के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, नई मछली मंडी को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा, जिससे व्यापारियों को बेहतर बुनियादी ढांचा, स्वच्छता और परिवहन सुविधा मिल सके। प्रशासन का कहना है कि इस पुनर्वास योजना से मेट्रो परियोजना और स्थानीय व्यापार दोनों के हितों का संतुलन बनाया गया है।

बैठक में क्या-क्या हुआ तय

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भूमि स्वामित्व, नजूल भूमि से जुड़े नियम, हस्तांतरण की प्रक्रिया और समय सीमा पर विस्तार से चर्चा की गई। मेट्रो अधिकारियों ने भी अपनी आवश्यकताओं और तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। एलडीए उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मेट्रो परियोजना के लिए भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया में किसी तरह की अनावश्यक देरी न हो। साथ ही, जिन योजनाओं या संस्थाओं की भूमि ली जा रही है, उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था समय रहते सुनिश्चित की जाए।

शहर के विकास में ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर की भूमिका

लखनऊ मेट्रो का ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर शहर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। इसके पूरा होने से शहर के ट्रैफिक दबाव में कमी आएगी, यात्रा समय घटेगा और प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर लखनऊ के तेजी से विकसित हो रहे आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। साथ ही, मेट्रो के आसपास के क्षेत्रों में रियल एस्टेट, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

LDA   और मेट्रो के बीच समन्वय

इस पूरी प्रक्रिया में  LDA  और मेट्रो प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिल रहा है। भूमि चिन्हांकन, पुनर्वास और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़े फैसले आपसी सहमति और योजना के तहत लिए जा रहे हैं।  LDA  अधिकारियों का कहना है कि मेट्रो परियोजना लखनऊ के शहरी विकास की रीढ़ साबित होगी और इसके लिए हर संभव सहयोग दिया जाएगा।