
Dev Uthani Ekadashi 2019 : देवोत्थान एकादशी से शुरू हो जाएंगे मांगलिक कार्य, इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, होगी हर मन्नत पूरी
लखनऊ. देवोत्थान एकादशी का पर्व इस साल 2019 में 7 नवम्बर को उत्तर प्रदेश सहित पूरे भारत में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य राजेन्द्र तिवारी ने बताया है कि देवोत्थान एकादशी के बाद हिन्दू में होने सारे मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। शास्त्रों के अनुसार माना जाता हैं कि देवउठनी एकादशी के दिन सभी देवता अपनी योग निद्रा से जाग जाते हैं। इस एकादशी को प्रबोधिनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी और देवउठनी ग्यारस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन कई लोग व्रत रख भगवान विष्णु की विधिवत पूजा अर्चना करते हैं।
देवउठनी एकादशी शुभ मुहूर्त (Dev Uthani Ekadashi 2019 Date And Shubh Muhurat)
देवउठनी एकादशी तिथि प्रारम्भ - 7 नवम्बर को सुबह 9 बजकर 55 मिनट से
देवउठनी एकादशी तिथि समाप्त - 8 नवम्बर अगले दिन दोपहर 12 बजकर 24 तक
देवउठनी एकादशी का महत्व (Dev Uthani Ekadashi Significance)
शास्त्रों के अनुसार बताया जाता हैं कि इस एकादशी को भगवान विष्णु समेत सभी देवताओं की अराधना की जाती है। इस दिन तुलसी विवाह भी कराया जाता है। देवउठनी एकादशी को दान, पुण्य करना भी काफी फलदायी माना जाता है। इस दिन सभी देवता अपनी निद्रा से बाहर आ जाते हैं। 12 जुलाई को देवशयनी एकादशी थी जिस दिन से भगवान विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान भगवान शिव सृष्टि के पालक होते हैं। भगवान विष्णु के निद्रा में जाते ही सभी तरह के मांगलिक कार्य वर्जित हो जाते हैं जो कि देवउठनी एकादशी से फिर से आरंभ हो जाते हैं।
देवोत्थान एकादशी के दिन इन बातों रखें विशेष ख्याल
1. एकादशी व्रत के नियमों का पालन दशमी तिथि से ही लोगों को शुरू कर देना चाहिए।
2. सभी लोग इस दिन सूर्योदय से पहले उठ जाएं और पूरे घर की सफाई कर लें।
3. देवउठनी एकादशी के दिन स्नानादि करके साफ वस्त्र धारण करें।
4. पूजा के लिए एक साफ चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्थापित करें।
5. भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं। उन्हें पीले कपड़े, पीले फूल, नवैद्य फल, मिठाई, बेर और गन्ना अर्पित करें।
6. भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें और रात के समय घर के बाहर और पूजा स्थल पर दीया जरूर जलाएं।
7. अंत में भगवान विष्णु की आरती उतार कर उन्हें भोग लगाएं।
8. इसके बाद भगवान विष्णु का प्रसाद सभी वितरित करें।
इन मंत्रों का करें जाप
उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पतये।
त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्॥
उत्थिते चेष्टते सर्वमुत्तिष्ठोत्तिष्ठ माधव।
गतामेघा वियच्चैव निर्मलं निर्मलादिशः॥
Published on:
02 Nov 2019 10:35 pm
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