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भागदौड़ भरी जिन्दगी में आठ घंटे की नींद है सेहत के लिए जरुरी

उठने के तीन घंटेों के अंदर नाश्ता या खा पी लें , लेकिन खाने के बाद ही नहाने खाने से बचें .

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लखनऊ . फिक्की लखनऊ - कानपुर की ओर से वेलनेस वर्कशॉप में लोंगो को हेल्थ से जुड़े टिप्स देते नजर आए आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉक्टर नरेश पेरुम्बुदुरी । उनका कहना है कि खाने से ज्यादा जरुरी है सोना । शरीर के लिए कम से कम आठ घंटे की नींद वह भी रात 10 बजे के पहले से सुबह सुर्योदय से पहले तक वाली ही नींद शरीर के लिए फायदेमंद है । न कि देर रात 10 बजे से सुबह के 10 बजे तक 8 घंटे वाली नींद ।

आज की भागदौड़ भरी जिन्दगी में ब्रेक लेने से बचने के लिए जरूरी है कि हम आठ घंटे कि प्रॉपर नींद लें । डॉक्टर नरेश ने बताया कि भोजन , सोना , अभ्यास और पानी इन चारों को लेकर हमने एक लाइफस्टाइल साईकिल डवलप कर लिया तो कोई दिक्कत नहीं होगी । योगिक साइंस विशेषज्ञ शम्भु कुमार ने सहज ध्यान करवाया । फिक्की लेडीज ऑर्गनाईशन लखनऊ - कानपुर चैपटर की चेयरपर्सन रेनुका टंडन ने बताया कि महिलाओं को सशक्त बनने के लिए यह आयोजन हुआ है ताकि वो शारीरिक व मानसिक तौर पर मजबूत बनें ।

खाने से लेकर सोने , जगने का चक्र तय करें , दूर रहेंगी बीमारियां

आयुर्वेद में एमडी और विभिन्न मनोवैज्ञानिक व शारीरिक स्वास्थ्य मुद्दों व्यापक शोध कर चुके आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉक्टर नरेश पेरूम्बुदुरी ने बताया कि अगर हम खाने से लेकर सोने और उठने का संतुलन चक्र तय कर लें तो हमेशा बीमारियों से दूर रहेंगे । बताया कि ऑटो - इम्यून विकारों जैसे आर्थराइटिस , इरिटेबल बावेल सिंड्रोम के लिए आयु्र्वेद में ही समाधान है । उन्होंने कुछ सामान्य बातें बताईं , जिनसे लोग अपनी दिनचर्या के कारण होने वाली बीमारियों से बच सकते हैं ।

डॉ. नरेश के टिप्स

* उठने के तीन घंटेों के अंदर नाश्ता या खा पी लें , लेकिन खाने के बाद ही नहाने खाने से बचें ।
* दिन भर में किसी भी समय थोड़ा अभ्यास से वॉक या वर्जिश करें , जिससे पसीना निकले । ये शरीर के भीतरी स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है ।
* लंच - डिनर के बीच कम से कम 6-7 घंटे का अंतराल रखें । खाने के बाद सोने से पहले टहलें जरूर ।
* आठ घंटे की नींद कम से कम जरूर लें । कोशिश रहें कि रात 10 बजें तक सो जाएं और सूर्योदय से पहले बेड छोड़ दें ।
* दिन में कुछ समय फिक्स करें या सप्ताह में एक दिन जब बिना मोबाईल के दिन बिताएं । ये हमें दिमागी रूप से दूसरे पर निर्भर रहना सिखाता जा रहा है , जो देिमागी गतिविधियों के लिए खतरनाक है ।