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इस वजह से एक बार फिर चर्चा में आए आजम खान का किला ढहाने वाले IAS अधिकारी; अखिलेश राज में आए थे UP

IAS Anjaneya Kumar Singh: एक बार फिर चर्चा में आजम खान का किला ढहाने वाले IAS अधिकारी आंजनेय कुमार सिंह आ गए हैं। जानिए क्यों?

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लखनऊ

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Harshul Mehra

Aug 26, 2025

IAS Anjaneya Kumar Singh

IAS अधिकारी आंजनेय कुमार सिंह को मिला एक्सटेंशन। फोटो सोर्स-x

IAS Anjaneya Kumar Singh: केंद्र सरकार ने सोमवार को वरिष्ठ IAS अधिकारी आंजनेय कुमार सिंह की अंतर-कैडर प्रतिनियुक्ति ( inter-cadre deputation) को एक साल के लिए अगस्त 2026 तक बढ़ाने को मंजूरी दे दी। सिंह सिक्किम कैडर के 2005 बैच के अधिकारी हैं।

आंजनेय कुमार सिंह को मिला सातवीं बार एक्सटेंशन

भाजपा सरकार ने सातवीं बार 2016 में अखिलेश यादव सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश में प्रतिनियुक्ति पर आए IAS आंजनेय सिंह को एक्सटेंशन दिया है। मुरादाबाद के मंडलायुक्त के पद पर कार्यरत सिंह 14 अगस्त को उत्तर प्रदेश में अपनी प्रतिनियुक्ति (Deputation) समाप्त होने के बाद 60 दिनों की छुट्टी पर चले गए थे। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक निरंतरता का हवाला देते हुए केंद्र से उनकी प्रतिनियुक्ति एक साल के लिए बढ़ाने का अनुरोध किया था। इस विस्तार के साथ उनके उत्तर प्रदेश में सेवा जारी रखने की उम्मीद है।

आजम खान के खिलाफ करवाया था मामला दर्ज

बता दें कि सिंह को रामपुर के जिला मजिस्ट्रेट के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान प्रसिद्धि मिली। जहां उन्होंने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के खिलाफ कार्रवाई की थी। 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान, आदर्श आचार संहिता के सख्त पालन को लेकर सपा नेताओं के साथ उनका टकराव हुआ था। आजम खान ने कथित तौर पर सिंह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी जिससे विवाद खड़ा हो गया था। सिंह ने बाद में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के खिलाफ मामले दर्ज कराए थे। बता दें कि आजम खान पर जमीन हड़पने से लेकर तमाम घोटाले के आरोप आंजनेय कुमार सिंह के 2 साल के कार्यकाल के दौरान ही लगे. इस दौरान उन्हें और उनके पूरे परिवार को जेल तक जाना पड़ा।

कई पदों पर रह चुके हैं आंजनेय कुमार सिंह

सिंह को 2015 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के कार्यकाल के दौरान प्रतिनियुक्त किया गया था। उन्होंने सिंचाई विभाग, वाणिज्यिक कर विभाग में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और बुलंदशहर, फतेहपुर और रामपुर में जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य किया। 2021 में उन्हें मुरादाबाद का मंडलायुक्त नियुक्त किया गया।

2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग से सिंह को मुरादाबाद के पद से हटाने का आग्रह किया था। बाद में जब नवंबर 2024 में संभल में हिंसा भड़की, तो यादव ने स्थिति से निपटने के सिंह के तरीके की सार्वजनिक रूप से आलोचना की।