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यूपी में आधार कार्ड बनाने में चल रहा था फर्जीवाड़ा, एसटीएफ ने दस आरोपी किये अरेस्ट

यूपी एसटीएफ ने कानपुर से 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है जो ऑपरेटर के फिंगर प्रिंट का क्लोन बनाकर आधार कार्ड बनाने का काम कर रहे थे।

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लखनऊ

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Laxmi Narayan

Sep 10, 2017

Fake Aadhar Card Registration

लखनऊ. आधार कार्ड बनाने के नाम पर चल रहे बड़े फर्जीवाड़े का एसटीएफ ने खुलासा किया है। एसटीएफ लखनऊ की टीम ने कानपुर से दस ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया है जो भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के निर्धारित बायोमैट्रिक मानकों को बाईपास कर और ऑपरेटर के क्लोन फिंगर प्रिंट बनाकर आधार कार्ड बनाने के काम को अंजाम दे रहे थे। गिरफ्त में आये दस आरोपियों में से चार आरोपी आधार कार्ड बनाने वाली एजेंसी के अधिकृत आपरेटर रहे हैं। जांच एजेंसी को सुराग मिले हैं कि इस तरह के बहुत सारे ऑपरेटर उत्तर प्रदेश में सक्रिय हैं जो गलत तरीके से आधार कार्ड बनाने के काम में जुटे हैं।

आधार के डिप्टी डायरेक्टर ने दर्ज कराया था केस

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के डिप्टी डायरेक्टर ने लखनऊ के साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में टेम्पर्ड क्लाइंट एप्लिकेशन के माध्यम से आपरेटर्स और इनरोलमेंट एजेंसी के प्रमाणित लॉगिन आईडी का दुरूपयोग कर और बाईपास कर आधार कार्ड बनाने वाला गिरोह सक्रिय है। इस शिकायत से पूर्व आधार कार्ड बनाने में हो रहे फर्जीवाड़े से जुडी शिकायतें लखनऊ, देवरिया और कुशीनगर में भी दर्ज कराई जा चुकी हैं। संवेदनशील और अंतर्राज्यीय मामला होने के कारण खुलासे की जिम्मेदारी एसटीएफ को सौपी गई।

कानपुर से गिरफ्तार हुए 10 आरोपी

खुलासे में जुटी एसटीएफ को पता चला कि फर्जी आधार कार्ड बनाने वाला गिरोह उत्तर प्रदेश के कई शहरों में सक्रिय है और गिरोह का मास्टरमाइंड सौरभ सिंह कानपुर का रहने वाला है। एसटीएफ ने कानपुर नगर के बर्रा थानाक्षेत्र के विश्व बैंक कॉलोनी में दबिश देकर सौरभ सिंह सहित 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के पास से लैपटॉप, कृत्रिम फिंगर प्रिंट सहित बहुत सारे उपकरण बरामद हुए हैं।

कई तरह के उपकरण बरामद

एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश ने बताया कि गिरफ्त में आये सौरभ सिंह, शिवम कुमार, तुलसीराम, कुलदीप सिंह और चमन गुप्ता आधार कार्ड बनाने वाली एजेंसी के आपरेटर रहे हैं। इसके अलावा छह और आरोपी शुभम सिंह, शोभित सचान, मनोज कुमार, गुड्डू और सतेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से 11 लैपटॉप, कागज़ पर बने 38 कृत्रिम फिंगर प्रिंट, कैमिकल से निर्मित 46 कृत्रिम फिंगर प्रिंट, 12 मोबाइल फोन, 2 आधार फिंगर स्कैनर, 2 फिंगर स्कैनर डिवाइस, 2 रेटिना स्कैनर, 8 रबर स्टैम्प, 18 आधार कार्ड, 1 वेब कैम, 1 जीपीएस इक्युपमेंट, 1 पॉलीमर क्यूरिंग इंस्ट्रूमेंट, 1 गुलाबी केमिकल, 1 प्रिण्टो प्रिंट एनहैंसर, 2 पारदर्शी कांच की प्लेट बरामद हुई है।

ऑपरेटर के फिंगर प्रिंट का बनाते थे क्लोन

गिरफ्तार हुए आरोपियों ने बताया कि वे आधार कार्ड बनाने के लिए निर्धारित विधिक प्रणाली को बाईपास करते हुए बायोमैट्रिक डिवाइस के माध्यम से अधिकृत आपरेटर्स के फिंगर प्रिंट ले लेते थे। इसके बाद उसका बटर पेपर पर लेजर प्रिंटर से प्रिंट आउट निकालते थे। इसके बाद फोटो पॉलीमर रेजिन केमिकल डालकर पॉलीमर क्यूरिंग उपकरण में पहले दस डिग्री और उसके बाद 40 डिग्री तापमान पर कृत्रिम फिंगर प्रिंट मूल फिंगर प्रिंट के समान तैयार कर लेते थे। आपरेटर के इस क्लोन फिंगर प्रिंट का उपयोग ऑपरेटर के अलावा अन्य व्यक्ति अलग-अलग स्थानों पर करते हैं और यह आपरेटर के मूल फिंगर प्रिंट की तरह काम करता है।

फर्जी ऑपरेटर से वसूलते थे पांच हज़ार रूपये

पूर्व में आधार कार्ड बनाने के लिए ऑपरेटर को अपने फिंगर प्रिंट के माध्यम से आधार की क्लाइंट एप्लिकेशन को एक्सेस किया जाता था लेकिन जब हैकर्स द्वारा क्लोन बनाकर काम किया जाने लगा तो भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने फिंगर प्रिंट के अलावा बायोमेट्रिक में ऑपरेटर के आयरिस को भी आथेंटिफिकेशन प्रोसेस का हिस्सा बना दिया। इसके बाद फर्जी ऑपरेटर्स का एक्सेस नियंत्रित हो गया लेकिन बायोमैट्रिक और आयरिस को भी बाईपास करने के लिए नए क्लाइंट एप्लिकेशन हैकर्स ने बना लिए थे। यह एप्लिकेशन हैकर्स अनधिकृत ऑपरेटर को भेजकर 5 हज़ार रूपये वसूलते थे। इस तरह एक ऑपरेटर की आईडी पर कई मशीनें एक साथ काम करती थीं।

गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश

इस गिरोह ने अब तक कितने आधार कार्ड इस तरह बनाये हैं, इस बात का पता लगाने की कोशिश चल रही है। अनुमान है कि उत्तर प्रदेश में लाखों की संख्या में इस तरह से आधार कार्ड बनाये जा चुके हैं और सैकड़ों फर्जी ऑपरेटर सक्रिय है। एसटीएफ का दावा है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क के अन्य लोग भी पकड़ में आएंगे और इस फर्जीवाड़े पर पूरी तरह रोक लग सकेगी।