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फाइलेरिया से बचाव की दवा खाएं, हाथीपांव होने से बचाएं,जानिए उपाय

डॉ. ऋतु श्रीवास्तव ने बताया 'फाइलेरिया एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है इसकी जानकारी बहुत जरूरी'दवा का समय सेवन बहुत जरूरी

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Feb 07, 2023

नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दी जानकारी

नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दी जानकारी

केन्द्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय और नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर बार्न डिजीज कंट्रोल की पहल पर फाइलेरिया प्रभावित जिलों में 10 फरवरी से सर्वजन दवा सेवन अभियान शुरू हो रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने पूरी तैयारी की जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने सहयोगी संस्थाओं सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार), विश्व स्वास्थ्य संगठन, पाथ, पीसीआई व जीएचएस के सहयोग से मीडिया कार्यशाला की गई।

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बड़े पैमाने पर अभियान शुरू

एनएचएम महाप्रबंधक डॉ लक्ष्मण सिंह, ने बताया कि केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र ने स्पष्ट किया है कि अन्य देश इस बीमारी को भले उपेक्षित बीमारी की श्रेणी में रख रहे हैं लेकिन भारत में यह बीमारी वर्ष 2027 तक प्राथमिकता से समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित है। जनपद में 10 फरवरी से आईडीए (आइवरमेक्टिन, डाईइथाइल कार्बामजीन और एल्बेंडाजाल) अभियान शुरू हो रहा है।

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फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाने का लक्ष्य

एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर दवा खिलाएंगी। स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा विभिन्न स्थानों पर दवा सेवन के लिए बूथ भी लगेंगे। इस बार शहरी क्षेत्र में अपार्टमेंट्स और मलिन बस्ती में रहने वाले लोगों को खासकर फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. ऋतु श्रीवास्तव ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन एक साल के बच्चों, गर्भवती और गंभीर बीमार को छोड़कर सभी को करना है।

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एक से दो साल की आयु के बच्चों को केवल एल्बेंडाजोल खिलाई जाएगी। दवा का सेवन स्वास्थ्य कार्यकर्ता अपने सामने ही करवाएंगे। दवा खाली पेट नहीं खानी है। दवा खाने से बचने के लिए बहाने बिल्कुल भी न करे। दवाओं का सेवन कर समाज को फाइलेरिया मुक्त बनाएं।

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नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दी जानकारी

कलाकारों द्वारा नुक्कड़ नाटक के जरिए बड़े ही रोचक तरीके से बताया कि फाइलेरिया बीमारी जब होती है तो पता नहीं चलता और जब पता चलता है तब तक बहुत देर हो जाती है । नाटक के अंत मे फाइलेरिया रोगी और फाइलेरिया नेटवर्क के मनीष और गंगा प्रसाद ने अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि यह जान तो नहीं लेती है लेकिन जीना मुश्किल जरूर कर देती है। हमारे समय दवा नही थी पर अब दवा भी है और जानकारी भी इसलिए आईडीए राउंड में दवा जरूर खाएं।