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उत्तर प्रदेश में शराब की दुकानों को भी फूड सेफ्टी एक्ट के अंतर्गत शामिल किया जाएगा। इससे पहले योगी सरकार ने ऐलान किया था कि शराब की दुकानों को भी खाद्य सुरक्षा औषधि विभाग से लाइसेंस लेना होगा। इस नियम पर धरातल पर काम करना भी शुरू गया है। यूपी सरकार ने अधिकारियों को निर्देश जारी किया है कि अब शराब की दुकानों को खाद्य सुरक्षा कौशिक विभाग से लाइसेंस लेना होगा। दुकानदारों को बिक्री के अनुसार ही टैक्स भी देना होगा। लाइसेंस न लेने वाले दुकानदार मदिरा नहीं बेच सकेंगे। उधर, शराब विक्रेताओं ने इस नए नियम का विरोध किया है।
लखनऊ में है 600 से अधिक शराब की दुकानें
राजधानी लखनऊ में अंग्रेजी, देसी व मॉडल की दुकानों के संचालकों को आय के हिसाब से पंजीयन का शुल्क जमा करना होगा। साथ ही इसका नवीनीकरण कराना होगा। लखनऊ में 600 से अधिक मदिरा की दुकानें हैं। सरकार ने सभी संचालकों को निर्देश दिया है कि वह खाद्य औषधि विभाग से लाइसेंस जारी करा लें। विभाग ने आबकारी विभाग से जिले के लाइसेंसी शराब की दुकानों की सूची मांगी है।
बिक्री अनुसार होगी लाइसेंस फीस
शराब की दुकान चलाने वालों के लिए लाइसेंस फीस बिक्री के अनुसार होगी। यह बिक्री का लगभग 0.01 प्रतिशत होगा। इस नए नियम से शराब विक्रेताओं को परेशानी हो सकती है। उन्हें लिखापढ़ी की परेशानी हो सकती है। शराब विक्रेताओं का कहना है कि रिकॉर्ड अनुसार टैक्स बहुत कम है पर लिखापढ़ी काफी बढ़ जाएगी।
गौरतलब है कि बीते वर्ष यूपी सरकार ने शराब को लेकर होम लाइसेंस के नियम जारी किए थे। इसके मुताबिक घर में बार खोलने वालों के लिए एक तय लिमिट तक शराब की बोतलें रखने के नियम बनाए गए थे। नई आबकारी नीति के मुताबिक, घर में शराब रखने के लिए लाइसेंस फीस का प्रावधान किया गया है। घर में एक तय मात्रा से ज्यादा शराब रखने के लिए आबकारी विभाग से लाइसेंस लेना होगा। घर में शराब रखने की लिमित 6 लीटर तक है। घर में तय लिमिट से ज्यादा शराब रखने पर आपको 12,000 रुपये सालाना फीस देकर आबकारी विभाग से लाइसेंस लेना होगा। इसके अलावा सिक्योरिटी मनी में आपको 51,000 रुपये देने होंगे।
Updated on:
29 Apr 2022 12:28 pm
Published on:
29 Apr 2022 12:24 pm
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