
टीएमसी नेता जहांगीर खान और आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा
Jahangir Khan Arrested: फिल्म 'पुष्पा' का वो मशहूर डायलॉग तो आपको याद ही होगा, पुष्पा नाम सुनकर फ्लावर समझे क्या… फायर है मैं, झुकेगा नहीं! राजनीति के मैदान में खुद को ऐसा ही फायर समझने वाले पश्चिम बंगाल के एक नेताजी का गुरूर आखिरकार पुलिस ने तोड़ दिया है। उत्तर प्रदेश के 'सिंघम' आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को खुलेआम 'पुष्पा' बनकर धमकी देने वाले पूर्व टीएमसी (TMC) नेता जहांगीर खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने जहांगीर खान को भारत-नेपाल सीमा से दबोचा है।
जहांगीर खान काफी समय से फरार चल रहा था। वह पुलिस से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था और भागकर नेपाल बॉर्डर पर छिप गया था। लेकिन पुलिस की नजरों से बच नहीं पाया। एसटीएफ ने जहांगीर के एक बेहद करीबी दोस्त के फोन को सर्विलांस पर ले रखा था। जैसे ही उस फोन की लोकेशन मिली, एसटीएफ ने जाल बिछाकर नेपाल बॉर्डर से 'फाल्टा के पुष्पा' को धर दबोचा।
यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के समय का है, जिसने देश भर की मीडिया में खूब सुर्खियां बटोरी थी। चुनाव आयोग ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को दक्षिण 24 परगना जिले का पुलिस ऑब्जर्वर बनाकर भेजा था।
फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में जब वोटरों को डराने-धमकाने और बूथ कैप्चरिंग की शिकायतें आईं, तो आईपीएस अजय पाल शर्मा खुद भारी फोर्स के साथ मैदान में उतर गए। उन्होंने ऑन-कैमरा दबंगों को सख्त लहजे में चेतावनी दी कि अगर किसी ने भी चुनाव में गड़बड़ी की या मतदाताओं को डराया, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।
IPS अधिकारी की इस सख्ती से पूर्व टीएमसी नेता जहांगीर खान बौखला गया। उसने पुलिस को चुनौती देते हुए खुलेआम कह दिया कि अगर अजय पाल शर्मा खुद को 'सिंघम' समझते हैं, तो हम भी 'पुष्पा' हैं… पुष्पा कभी झुकेगा नहीं। इस बयान के बाद लोग उसे 'फाल्टा का पुष्पा' कहने लगे।
जहांगीर खान के दबदबे और पुलिस की सख्ती के बीच चुनाव के दिन वहां भारी हिंसा और बवाल हुआ। ईवीएम मशीन में छेड़खानी के आरोप भी लगे। माहौल इतना खराब हुआ कि चुनाव आयोग को फाल्टा का चुनाव रद्द करना पड़ा और बाद में वहां दोबारा वोटिंग करानी गई।
दोबारा हुए चुनाव में बीजेपी की जीत हुई और खुद को 'पुष्पा' बताने वाला यह नेता चौथे नंबर पर खिसक गया। इस हार के बाद पार्टी के अंदर भी उनकी किरकिरी हुई।
जहांगीर खान पर वोटरों को धमकाने, जमीन कब्जाने और चुनावी धांधली समेत 7 गंभीर केस दर्ज थे। हाल ही में कोलकाता हाईकोर्ट ने भी उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक हटा दी थी। इसके बाद वह नेपाल भागने की फिराक में था, लेकिन आखिरकार कानून के शिकंजे में आ ही गया।
Published on:
08 Jun 2026 02:13 pm
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