
Wine File Photo
Wine Factory: वाइन के शौकीनों के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश में वाइन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए यूपी सरकार ने यूपी वाइनरी नियमवाली में संशोधन किया है। इस संशोधित नियमवाली में वाइनरी लाने के लिए कई सुविधाएं और छूट दी गई हैं। ऐसा माना जा रहा है कि संशोधन के बाद यूपी में बड़े पैमाने पर 12 से 24 फीसदी अल्कोहल तीव्रता की इकाइयां वाइन तैयार करने की लग सकेंगी। बता दें कि अभी तक यूपी में कोई भी वाइनरी उपलब्ध नहीं है। आबकारी विभाग दूसरे राज्यों के वाइन उत्पादकों को यहां वाइन बेचने का लाइसेंस देती है। अपर मुख्य सचिव आबकारी संजय आर भसरेड्डी ने कहा कि यूपी में सब-ट्रॉपिकल फलों (आम, जामुन, कटहल, अंगूर, लीची, अमरूद) का उत्पादन ज्यादा होता है। लेकिन खपत कम होने और भंडारण की सुविधा के अभाव में भारी मात्रा में फल खराब होते हैं। ऐसे में राज्य सरकार ने इन फलों को प्रोसेस्ड कर उनसे वाइन बनाने की इकाइयां स्थापित करने का फैसला किया है।
कितना देना होगा शुल्क?
उन्होंने कहा कि सरकार ने वाइनरी नियमवाली में संशोधन किया है। संशोधन हो जाने के बाद इसे उत्तर प्रदेश द्राक्षासवनी (वाइनरी) द्वितीय संशोधन नियमवाली 2022 कहा जाएगा। नियमवाली में संशोधन के बाद वाइनरी लगाने के लिए आवेदन की शुल्क सीमा ढाई हजार रुपये हो जाएगी। वी-1 लाइसेंस जारी होगा, जिससे कि वाइनरी की स्थापना होगी।
वाइनरी चलाने के लिए वी-2 लाइसेंस
वाइनरी लगाने के बाद उसे चलाने के लिए वी-2 लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए एक साल की लाइसेंस फीस लगेगी जिसका रेट पांच हजार तय किया गया है। साथ ही प्रतिफल शुल्क के रूप में पांच हजार रुपये की एफडी भी जमा करनी होगी। इसके साथ ही बोतल भरने के लिए एफएल-3 का लाइसेंस लेना होगा। लेकिन वाइनरी शुरू होने से पहले पांच साल तक लैब टेस्ट के लिए किसी भी तरह का शुल्क सरकार को नहीं देना होगा।
Updated on:
18 May 2022 05:33 pm
Published on:
18 May 2022 05:26 pm
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