
हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच छह महीने में पूरी करने के दिए आदेश , जाने पूरा मामला
लखनऊ। सहायक शिक्षकों के 68 हजार 500 पदों पर भर्ती मामले में High court की लखनऊ बेंच ने पूरी चयन प्रक्रिया के सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने छह माह में CBI को जांच पूरी करने के भी निर्देश दिए हैं।
न्यायालय ने यह बड़ा फैसला सुनाया।
न्यायालय ने अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं बदलने के मामले में पहले महाधिवक्ता से पूछा था कि State government इस मामले की CBI जांच कराने को तैयार है अथवा नहीं जिस पर महाधिवक्ता द्वारा government की ओर से CBI जांच से इंकार किए जाने की जानकारी देने के बाद Court ने यह बड़ा फैसला सुनाया।
उत्तर पुस्तिकाओं के पहले पृष्ठ पर अंकित बार कोड अंदर के पृष्ठों से मेल नहीं खा रहे
यह आदेश न्यायमूर्ति इरशाद अली की एकल सदस्यीय पीठ ने कई अभ्यर्थियों की दर्जनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए, पारित किया। उक्त मामलों की सुनवाई के दौरान Court ने पाया था कि कुछ उत्तर पुस्तिकाओं के पहले पृष्ठ पर अंकित बार कोड अंदर के पृष्ठों से मेल नहीं खा रहे हैं। Court ने तब ही इस पर हैरानी जताते हुए कहा था कि उत्तर पुस्तिकाएं बदल दी गई हैं।
दोषी अधिकारियों को बखशा नहीं जाएगा
इस पर महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने मामले की पर्याप्त जांच का भरोसा दिया था, साथ ही यह भी आश्वासन दिया था कि इन मामलों में दोषी अधिकारियों को बखशा नहीं जाएगा। जिसके बाद तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाकर मामले की जांच किए जाने का दावा भी सरकार की ओर से किया गया लेकिन गुरूवार को सुनाए फैसले में जांच कमेटी के रवैये पर न्यायालय ने स्पष्ट तौर पर कहा कि जिन अभ्यर्थियों को स्कृटनी में रखा गया था, उनके भी चयन पर अब तक निर्णय नहीं लिया गया।
विभाग के अधिकारी उक्त जांच के दायरे में
न्यायालय ने कहा कि जांच कमेटी में दो सदस्य बेसिक शिक्षा विभाग के ही हैं। न्यायसंगत अपेक्षा के सिद्धांत के तहत दोनों को जांच कमेटी में नहीं रखा जाना चाहिए था क्योंकि उसी विभाग के अधिकारी उक्त जांच के दायरे में हैं।
प्राथमिक विद्यालयों में बड़े पैमाने पर गैर कानूनी चयन किए गए
Court ने आगे कहा कि वर्तमान चयन प्रक्रिया पर भारी भ्रष्टाचार व गैर कानूनी चयन के आरोप हैं। सरकार से स्वतंत्र व साफ-सुथरे चयन की उम्मीद की जाती है लेकिन कुटिल इरादे से राजनीतिक उद्देश्य पूरा करने के लिए प्राथमिक विद्यालयों में बड़े पैमाने पर गैर कानूनी चयन किए गए जिससे नागरिकों के मौलिक अधिकारी बुरी तरह प्रभावित हुए।
अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं फाड़ दी गईं
Court ने कहा कि इस चयन प्रक्रिया के बावत कोर्ट प्रथम दृष्टया मानती है कि परीक्षा कराने वाले अधिकारियों ने भ्रष्टाचार के द्वारा अपने उम्मीदवारों को फाएदा पहुंचाने के लिए, अधिकारों की दुरूपयोग किया। जिन अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा में कम मार्क्स मिले उन्हें अधिक मार्क्स दे दिए गए वहीं कुछ अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं फाड़ दी गईं और पन्ने बदल दिए गए ताकि उन्हें फेल घोषित किया जा सके। सरकार द्वारा बार कोडिंग की जिम्मेदारी जिस एजेंसी को दी गई थी, उसने स्वयं स्वीकार किया है कि 12 अभ्यर्थियों की कॉपियां बदली गईं, बावजूद इसके उसके खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं की गई।
26 नवम्बर को लिस्टेड करने का भी आदेश दिया है।
Court ने कहा कि इन परिस्थितियों में मजबूर होकर हम CBI को इस पूरे चयन प्रक्रिया की जांच करने का आदेश देते हैं। Court ने CBI को दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी कानून सम्मत कार्रवाई करने को कहा है। इसके साथ ही जांच की प्रगति जानने के लिए मामले को 26 नवम्बर को लिस्टेड करने का भी आदेश दिया है।
अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा ने कहा कि
डॉ. प्रभात कुमार ने बतायाकि जिनको नियुक्ति पत्र मिला हैं उनकी नौकरी की जिम्मेदारी सरकार की हैं वो किसी के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। उन्होंने कहाकि भर्ती की उच्च स्तरीय जांच शासन ने खुद कराई है अभी तक की जांच में कोई तथ्य सामने नहीं आया हैं। 12,460 की भर्ती में नियुक्ति पत्र पाने वालो के लिए हम अपील करेंगे डबल बेंच में।
Updated on:
02 Nov 2018 12:35 pm
Published on:
02 Nov 2018 12:27 pm
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