
हिंदी दिवस पर कुमार विश्वास ने 20 साल पुराने काव्य सम्मेलन को याद कर इसके बारे में सोशल साइट "X " पर बतायाा है।
Kumar Vishwas: हिंदी की बात हो और लोकप्रिय कवि कुमार विश्वास का जिक्र न हो ऐसा हो नहीं सकता। हिंदी कविता में कुमार विश्वास का योगदान सराहनीय है। शायद ये उनकी ओजस्वी कविता पाठ का ही असर है जो उनके प्रशंसकों की तादात में दिनों दिन इजाफा होता जा रहा है। उनके कवि सम्मेलनों का इंतजार उनके प्रशंसक बेसब्री से करते हैं।
"जब कहा था हम आपको मानदेय नही दे पाएंगे"
हिंदी दिवस पर कवि कुमार विश्वास ने ट्वीट कर अपने पहले काव्य पाठ के बारे में बताया। लिखा- "दो दशक से अधिक का समय हो गया। दो पीढ़ियां इसे गाकर-गुनगुनाकर बड़ी हुई। संभवतः यह पहला ऐसा कार्यक्रम था जिसमें काव्य-पाठ के लिए मुझे कोई मानदेय नहीं मिला था। कार्यक्रम से पहले आयोजन समिति के युवकों ने थोड़ा झिझकते हुए कहा कि हमारे पास पूरे पैसे इकट्ठे नहीं हो पाये हैं इसलिए हम आपको मानदेय नहीं दे पायेंगे।
"मैं कार्यक्रम के लिए पहले ही स्वीकृति दे चुका था अतः उस कार्यक्रम में मैंने मानदेय के बिना ही अपना काव्य पाठ किया। उस समय किसे पता था कि इस कार्यक्रम का मानदेय समय स्वयं तय करेगा तथा उस कार्यक्रम की यही एक छोटी-सी क्लिप हिंदी के लिए इतने बड़े विस्तार का माध्यम बनेगी। मुझे स्वयं भी कहां पता था कि बिना मानदेय के केवल उन्मुक्त मन और पूरी निष्ठा के साथ गुनगुनायी जा रही ये पंक्तियाँ मेरे अतिरिक्त लाखों हिंदी लिखने पढ़ने वालों का कंठहार बनकर कविताओं और रचनात्मकता के माध्यम से हिंदी में रोज़गार के अवसर ढूँढने वालों को स्वाभिमान के साथ जीने का अवसर प्रदान करेंगी। आप सबके इस अपार प्यार के सम्मुख नतमस्तक हूँ ! निशब्द हूँ ! कृतज्ञ हूँ !"
गीतकार भी हैं विश्वास
कुमार विश्वास ने अब तक हजारों कवि-सम्मेलनों में कविता पाठ किया है। साथ ही वह कई पत्रिकाओं में नियमित रूप से लिखते हैं। विश्वास मंच के कवि होने के साथ साथ हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री के गीतकार भी हैं। उनके द्वारा लिखे गीत अगले कुछ दिनों में फ़िल्मों में दिखाई पड़ेगी। उन्होंने आदित्य दत्त की फिल्म 'चाय-गरम' में अभिनय भी किया है।
'राजनीति 10 साल 5 साल,लेकिन कविता हजार साल
कुमार विश्वास ने अमेठी से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा, परन्तु हार गए थे। राजनीति से रूठे कवि कुमार विश्वास कहते हैं "सियासत में मेरा खोया या पाया हो नहीं सकता। सृजन का बीज हूं मिट्टी में जाया हो नहीं सकता।" उनका कहना है कि 'राजनीति 10 साल 5 साल, लेकिन कविता हजार साल।'कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के क्षेत्र में भी डां॰ विश्वास एक अग्रणी कवि हैं। वो अब तक हजारों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में कविता-पाठ और संचालन कर चुके हैं। देश के सैकड़ों प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थाओं में उनके एकल कार्यक्रम होते रहे हैं।
'कोई दीवाना कहता है' युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय
कुमार विश्वास को श्रृंगार रस का कवि माना जाता है। उनके द्वारा लिखा काव्य संग्रह 'कोई दीवाना कहता है' युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय रहा। उन्होंने कई सुंदर कविताएं लिखी हैं जिनमे हिंदी कविता के नवरस मिलते हैं। उनके लिखे गीत कुछ फिल्मों आदि में भी उपयोग किये गए हैं। उन्होंने अपने से पूर्व में हुए महनीय कवियों को श्रद्धांजलि देते हुए 'तर्पण' नामक टीवी कार्यक्रम भी बनाया, जिसमे स्वयं विश्वास ने पुराने कवियों की कविताओं को अपना स्वर दिया है।
Published on:
15 Sept 2023 09:03 am
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