वे कहती हैं कि वैसे तो हमें पूर्ण रूप से डॉक्टर की ही सलाह लेनी चाहिए, लेकिन फर्स्ट एड के रूप में स्वयं भी कुछ कोशिश करना सही माना जाता है। क्योंकि यह ऐसा बुखार है जो कुछ ही पलों में बॉडी के ब्लड प्लेटलेट्स की मात्रा को अचानक गिरा सकता है।
इसलिए साधारण डेंगू बुखार में आमतौर से पैरासिटामोल (क्रोसिन आदि) से काम चल सकता है। लेकिन ऐसे रोगियों को एस्प्रिन (डिस्प्रिन आदि) बिल्कुल नहीं देनी चाहिए। क्योंकि इससे प्लेटलेट्स कम होने का खतरा रहता है। लेकिन जल्द से जल्द डॉक्टर की भी सलाह लेनी चाहिए।
बचाव के घरेलू इलाज
डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं के अलावा आप कुछ घरेलू इलाज भी कर सकते हैं। डेंगू बुखार के दौरान विटामिन-सी की अधिकता वाली चीजें जैसे आंवला, संतरा या मौसमी अधिक मात्रा में लेनी चाहिए। इससे शरीर का सुरक्षा चक्र मजबूत होता है।
इसके साथ ही खाने में हल्दी का अधिकाधिक प्रयोग करें। इसे सुबह आधा चम्मच पानी के साथ या रात को दूध के साथ लिया जा सकता है। किन्तु यदि पीड़ित को नजला/जुकाम हो, तो दूध का प्रयोग न करें। तुलसी के पत्तों को उबालकर शहद के साथ पिएं, इससे भी इम्यून सिस्टम बेहतर बनता है।
इन सबके अलावा आजकल एक आयुर्वेदिक इलाज काफी प्रसिद्ध हो रहा है और यह काफी असरदार भी है। जिसके अनुसार डेंगू के बुखार को गिलोय बेल की डंडी जल्द से जल्द काटती है, साथ ही यह शरीर में ब्लड प्लेटलेट्स की मात्रा को भी बढ़ाने में मदद करती है।