
KALYAN SINGH
देश के सबसे बड़े सूबे में पहली बार भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में लाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की आज 94वीं जयंती है। यूपी की राजनीति की जब भी चर्चा होती है, बिना कल्याण सिंह के उल्लेख के वे अधूरी ही है।
कल्याण सिंह के बारे में उनको याद करते हुए लोकसभा के पूर्व सांसद और वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारतीय ने पत्रिका डॉट कॉम से बात करते हुए कहा कि देश में मंडल कमीशन लगने के बाद जिस तरीके से पिछड़े वर्ग में उत्साह आया, उसको लगा कि वे वर्ग भी सत्ता में प्रवेश कर सकता है, उस समय कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश में दूसरी सबसे अहम जाति यानी लोधी समाज के एकछत्र नेता थे। उनकी वजह से ही बीजेपी को यूपी में सत्ता में आने का मौका मिला। अपने मुख्यमंत्रित्व काल में उन्होंने कई अहम काम किए, पर उनके कार्यकाल में जिस तरह बाबरी विध्वंस हुआ, वे पूरे देश को हमेशा याद रहेगा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जो वादा किया था, वो नहीं निभा पाए। वे ऐसे पहले सीएम हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन की सजा दी थी। पर इससे अलग उनको रामजन्म भूमि निर्माण या रामलला के प्रति उनकी श्रद्धा का श्रेय भी जाता है।
एटा, मैनपुरी, फरुखाबाद से झांसी तक के लोदी बाहुल्य इस समाज को बीजेपी से जोड़ने और उसकी वजह से पार्टी को सत्ता में लाने में उनकी अनुकरणाय भूमिका रही है। युवाओं और किसानों के विकास के वक्त वे किसी विचारधारा से नहीं बंधते थे। ये भी उल्लेखनीय है कि लोधी समाज के हिस्से में सत्ता उनके चलते ही आई, वरना इससे पहले पिछड़ो में यादव ही सत्ता में दखलअंदाजी रखते थे। उनके नेतृत्व में लोधी समाज ने आर्थिक रूप से भी प्रगति की।
जब कल्याण सिंह, नेता विरोधी दल थे और प्रदेश में पार्टी की कमान कलराज मिश्र संभाल रहे थे, तो वे मुझे बीजेपी में शामिल करा फतेहपुर से चुनाव लड़ाना चाहते थे, पर उस समय मैं किसी दल में शामिल नहीं होना चाहता था, क्योंकि मैं 1996 में ही राजनीति से किनारा कर पूरी तौर पर पत्रकारिता पर आ गया था, इसलिए मैंने उनकी ये बात नही मानी और मुझे इसका बहुत दुख भी नहीं है।
कल्याण सिंह की विशेषता थी कि वे व्यक्तिगत रिश्तों का बहुत मान रखते थे। जब वो राजस्थान के गवर्नर थे, तो मैं उनके पास नवलगढ़ में कमल मोरारका ने, जो खेती का प्रोजेक्ट शुरू किया था, वहां आने का निमंत्रण लेकर गया तो उन्होंने एक मिनट में अपनी सहमति दे दी थी।
साधारण इंसान पर हाथ रखकर वो उसे ऊंचाई पर पहुंचाने की कुव्वत वे रखते थे। मुझे आज भी याद है कि मुकेश राजपूत पर उनकी ही दृष्टि पड़ी थी, और फिर उसके बाद वे नगरपालिका का अध्यक्ष, विधायक और फिर सांसद तक बना। सांसदी के उसके टिकट के लिए उन्होंने अंगद की तरह दिल्ली में अपना पैर जमा दिया था।
बीजेपी से किनारे होने के बाद भी अपनी जीजिविषा और समझदारी की वजह से और लोधी समाज के समर्थन के चलते उस समय कल्याण सिंह एक प्रयोग करना चाहते थे, वे अपना महत्व अपने कर्म से दिखाते थे। उन्होंने अपनी पार्टी बनाई, उनके पास लोग तो थे, पर पैसा नहीं था और वो राजनीति का ऐसा दौर था जब चुनावों में पैसे की एंट्री हो चुकी थी। इस कारण उनकी पार्टी चुनावों में कई असर नहीं डाल पाई, पर उसके बाद अटल जी ने दोबारा जोर देकर उनको बीजेपी में वापस बुलाया। भारतीय जनता पार्टी में लौटने के बाद वे राजस्थान के गर्वनर बने। कल्याण सिंह सिर्फ यूपी के मुख्यमंत्री के तौर पर ही नहीं, बल्कि देश के बडे़ नेता के रूप पर याद किये जाते हैं।
जब भारतीय जनता पार्टी से अलगाव के बाद कल्याण सिंह ने अपनी पार्टी बनाई तो उनकी किचन कैबिनेट के हिस्सा रहे आगरा के पूर्व विधायक केशो मेहरा उनके साथ अपनी सबसे खूबसूरत याद का जिक्र करते हुए कहते हैं कि 9 अक्टूबर 1996 को मैं पहली बार आगरा छावनी से विधायक बना था। उस समय जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट के अनुसार आगरा में उच्च न्यायालय इलाहाबाद की खंडपीठ बने इस विषय पर बड़ा आंदोलन हुआ, उस आंदोलन में मेरी भी सक्रिय सहभागिता हुई ।
आगरा के दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं साराभाई एवं देवेंद्र वाजपेई के पास बैठकर मैंने जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट जो दो खंडों में थी, उसको बड़े विस्तार से पढ़ा और समझा, जिसके उपरांत वर्ष 1997 में विधानसभा का सत्र शुरू हुआ और वहां मैंने प्रस्ताव रखा कि जस्टिस जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट के अनुसार उच्च न्यायालय इलाहाबाद की खंडपीठ आगरा में स्थापित की जाए, मेरा प्रस्ताव विचारार्थ स्वीकृत हुआ। देश में कितने हाईकोर्ट हैं, कितने हाईकोर्ट की कितनी खंडपीठ हैं, मैंने इसका विस्तार से विधानसभा में वर्णन किया। सुश्री मायावती उस समय मुख्यमंत्री थी, विधानसभा की सारी बहस माननीय कल्याण सिंह जी अपने चेंबर में सुनते थे। ऐसे में उस दिन की पूरी कार्यवाही भी उन्होंने देखी और फिर अगले दिन जब मैं विधानसभा में बैठा था, तब माननीय कल्याण सिंह जी के ऑफिस से एक पर्ची आई कि मैं उनसे जाकर मिलूं।
मुलाकात के सय कल्याण सिंह जी ने मेरे भाषण की बहुत तारीफ की और कहा तुमने विषय बहुत अच्छे ढंग से तैयार किया है, इसलिए प्रस्तुतीकरण बहुत अच्छा था। कल्याण सिंह अच्छे कार्यकर्ताओं को पहचान कर उन्हें निरंतर प्रोत्साहित करते थे, यह उनकी बहुत बड़ी विशेषता थी।
Updated on:
05 Jan 2026 08:20 pm
Published on:
05 Jan 2026 07:25 pm
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