
लखनऊ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीआईपी कल्चर खत्म करने का सन्देश देने के मकसद से लालबत्ती और नीलीबत्ती प्रचलन पर रोक लगा दी लेकिन सरकारी अफसर खुद को वीआईपी साबित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे। मोदी सरकार के एक मंत्री के ओएसडी के लिए लखनऊ में ट्रेन में न सिर्फ अलग से कोच लगाई गई बल्कि ट्रेन को एक घंटे देरी से रवाना किया गया। लखनऊ मंडल के डीआरएम ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
बताया जा रहा है कि शनिवार की रात भारत सरकार के एक मंत्री के ओएसडी को परिवार के साथ दिल्ली जाना था। इसके अलावा एक पूर्व मंत्री को भी दिल्ली रवाना होना था। मंत्री के ओएसडी को 14207 पद्मावत एक्सप्रेस से रवाना होना था। जब ट्रेन में वीआईपी कोटे की सीट उपलब्ध नहीं हुई तो उनके लिए रेलवे ने विशेष इंतजाम किये। रेलवे ने इस अफसर के लिए वह सुविधा उपलब्ध कराई जो आमतौर पर केंद्रीय मंत्री को उपलब्ध होती है।
ट्रेन को प्लेटफार्म लखनऊ के चारबाग़ स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो पर आना था लेकिन उसे छह पर लाने के लिए आउटर पर रोक दिया गया। दरअसल छह नंबर पर लाकर उसमें स्पेशल बोगी जोड़ना था। ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचने के ठीक पहले प्लेटफार्म बदलने का अनाउंसमेंट किया गया। यात्रियों ने जल्दबाजी में प्लेटफार्म नंबर छह पर पहुंचकर ट्रेन पकड़ा। बताया जा रहा है कि ट्रेन रात 10 बजकर 35 मिनट पर रवाना हुई। इस दौरान ट्रेन में सवार हुए लोगों के पास टिकट भी नहीं था। उनके लिए जनरल टिकट की व्यवस्था कराकर रास्ते में एसी टिकट में बदला गया।
मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। दरअसल रेलवे स्पेशल बोगी की सुविधा विभागीय उच्च अफसरों या फिर केंद्र सरकार के मंत्रियों को प्रदान करता है। इस ट्रेन में ओएसडी के साथ इस पूर्व मंत्री के भी सवार होने की बात कही जा रही है। उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के डीआरएम सतीश कुमार ने पत्रिका संवाददाता को बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है। वे मामले की जांच करा रहे हैं।
Published on:
22 Oct 2017 01:15 pm
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