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सेठ लोग Sex Workers में भी शराफत और सलीका ढूंढते है: मंटो

आपको मेरी कहानियां अश्लील, गंदी लगती हैं, तो जिस समाज में आप रह रहे हैं, वह अश्लील और गंदा है।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jun 03, 2023

संवेदनाओं को दिखाने की कोशिश

संवेदनाओं को दिखाने की कोशिश

मंटो की लिखी कहानी पर आधारित नाट्य प्रस्तुति हतक का मंचन होगा 12 जून 2023 को सृजन शक्ति वेलफेयर सोसाइटी के माध्यम से संगीत नाटक अकादमी लखनऊ में किया जायेगा।

दर्द , प्यार, बंधन, घुटने का एहसास है वेश्या

जिसका नाट्य लेखन और निर्देशन के के अग्रवाल ने किया है। मंटो की कहानी की वेश्या सौगंधी रोल निभा रही है, रंगमंच कलाकार डॉ सीमा मोदी ,उनका कहना है कि पहली बार एक वेश्या का रोल अदा करूंगी , दर्द , प्यार, बंधन, घुटन, मोहब्बत की चाह और भी बहुत सारे भाव एक स्त्री के भीतर का दर्द ।

नाटक के कलाकारों की जोरदार भूमिका

नाटक के हर एक पहलू पर किया गया है बेहतरीन काम, जो दर्शकों को सीट से उठने नहीं देगा। दलाल के रूप में है नवनीत मिश्रा , दूसरी वेश्या अनन्या सिंह, पूना का दरोगा अंकुर सक्सेना ,मुंशी पलटी का दारोगा नितिन निभा रहे है।

2 जून को International Sex Workers Day होता है

2 जून को हर साल अंतर्राष्ट्रीय सेक्स वर्कर्स दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह उन दयनीय जीवन स्थितियों को सामने लाता है जिनके तहत यह समुदाय काम करता है। इस दिन को अंतर्राष्ट्रीय वेश्या दिवस के रूप में भी जाना जाता है। अंतर्राष्ट्रीय सैक्स वर्कर डे पर हुई सआदत हसन मंटो के साहित्य पर चर्चा संगीत नाटक अकादमी के रिहर्सल हॉल में ।

सैक्स व्यापार एक मज़बूरी : के के अग्रवाल

वरिष्ठ रंगकर्मी और निर्देशक के के अग्रवाल का कहना है कि सैक्स व्यापार से जुड़ा हर प्राणी चाहे वो वेश्या हो, दलाल हो, इन घरों के नौकर हों सभी घुटन, उदासी, ऊब और अभावों से भरी एक ऐसी जिन्दगी जीते है, जिससे बाहर आने का कोई रास्ता नहीं दिखाई देता। फिर भी उनमें जीने की एक ललक होती है जो उन्हें मरने नहीं देती।

वेश्याओं की संवेदनाओं को दिखाने की कोशिश

मशहूर लेखक सआदत हसन मंटो ने अपनी कहानियों में वेश्याओं की संवेदनाओं को जिस कदर उकेरा है, वैसा उनसे पहले किसी भी लेखक ने नहीं किया। कहानियों में 'हतक' की सौगंधी हो या ‘काली सलवार’ की सुलताना, वेश्याओं की तमाम हसरतों को हमारे सामने रखती है, जिससे यह साबित होता है कि उसका अस्तित्व सिर्फ लोगों की जिस्मानी जरूरतों को पूरा करना वाली एक वस्तु की तरह ही नहीं है, बल्कि उसके भी अरमान एक आम लड़की की तरह होते हैं।

मंटो महिलाओं को इंसान मानते

मंटो ने अपनी कहानियों में महिलाओं को इंसान के तौर पर स्वीकार किया। उन्होंने महिला-संबंधित सभी सामाजिक पहलुओं को हमारे सामने रखा, जिसे सदियों से समाज ने सभ्यता और इज्जत की ईंटों में चुनवा रखा था। आपको मेरी कहानियां अश्लील या गंदी लगती हैं, तो जिस समाज में आप रह रहे हैं, वह अश्लील और गंदा है। मेरी कहानियां तो सच दर्शाती हैं, सआदत हसन मंटो।