
साइना नेहवाल से हारकर भी दिल जीत ले गई लखनऊ की ये बैडमिंटन स्टार
लखनऊ. खेल में मुकाबले के साथ-साथ इमोशंस का भी अहम रोल होता है। राजधानी लखनऊ में चल रहे सैयद मोदी बैडमिंटन चैंपियनशिप के दौरान लखनऊ की अमोलिका सिंह भले ही साइना नेहवाल से हार गईं लेकिन उन्होंने अपने साहस से दर्शकों का दिल जीत लिया। लखनऊ गर्ल' अमोलिका सिंह सिसोदिया मोदी बैडमिंटन के प्री क्वार्टर फाइनल मुकाबले में गुरुवार को साइना का डटकर सामना किया। उन्होंने साइना जैसी खिलाड़ी को टक्कर भी दी लेकिन साइना के अनुभव के आगे टिक नहीं सकीं। हालांकि उन्होंने जिस साहस से खेल दिखाया उससे उन्होंने साबित कर दिया कि जल्द ही यह 'लखनऊ गर्ल' बैडिमिंटन का भविष्य है।
लखनवाइट्स ने सराहा
बीबीडी अकैडिमी में इस मुकाबले के दौरान अमोलिका ने साइना को कई बार छकाया। एक बार तो एक स्मैस मारा कि साइना को संभलने का मौका ही नहीं मिला और शटल उनके शरीर से टकरा गई। दो गेम के संघर्ष के बाद आखिरकार अमोलिका का जोश पर साइना का अनुभव और बेहतर टेक्निक पर पड़ी और साइना ने मैच 21-14, 21-9 से अपने नाम कर लिया. मैच के बाद अमोलिका सिंह मुस्कुराते हुए जब कोर्ट से निकली तो लोगों ने उन्हें घेर लिया। दर्शकों के साथ ही यूपीबीए के कोच और साथी खिलाडि़यों ने उन्हें दमदार प्रदर्शन करने के लिए बधाई दी।
नर्वसनेस का खेल पर नहीं दिखा असर
अमोलिका ने मैच से पहले थोड़ी नर्वस जरूर दिख रहीं थीं लेकिन उन्होंने साइना का डटकर मुकाबला किया। इस चैंपियनशिप में उन्होंने क्वालीफाइंग राउंड से शुरुआत की और मेन ड्रॉ में जगह बनाई. बीते बुधवार को मेन ड्रॉ में भारतीय खिलाड़ी को टक्कर देकर प्री क्वार्टर फाइनल में एंट्री ली। इस मैच के बाद जब उन्हें पता चला कि प्री क्वार्टर फाइनल में ओलम्पिक कांस्य पदक विजेता साइना से उनका मुकाबला होना है तो वह नर्वस हो गई। बुधवार को ठीक ढंग से प्रैक्टिस भी नहीं कर सकी।
मां ने भी देखा मुकाबला
इस मुकाबले को देखने उनकी मां सुषमा सिंह भी पहुंची थीं। अमोलिक के मुताबिक मैच के दौरान भी उन्होंने हर वक्त मुझे दमदार प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया। वहां भी जब नर्वस हुई तो मां की तरफ देख लेती और फिर नए जोश के साथ खेलना शुरू कर देती। अमोलिका ने बताया कि उन्होंने तकरीबन सात साल पहले बैडमिंटन के क्षेत्र में एंट्री ली। यूपी बैडमिंटन अकादमी में चल रही समर ट्रेनिंग के दौरान बैडमिंटन ज्वाइन किया। तब यह सोचा भी नहीं था कि बैडमिंटन में इतना लंबा सफर कर सकूंगी. धीरे-धीरे रुझान बढ़ने लगा और मैंने भी प्रोफेशनल ट्रेनिंग शुरू कर दी. आज नतीजा आपके सामने है।
Published on:
23 Nov 2018 03:42 pm
