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केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के खिलाफ अपील पर सुनवाई टली, 27 सितम्बर नई डेट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खण्डपीठ में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के खिलाफ दाखिल राज्य सरकार की अपील पर मंगलवार को सुनवाई नहीं हो सकी। हाईकोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 सितंबर की तिथि नियत कर दी है।        

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केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के खिलाफ अपील पर सुनवाई टली, 27 सितम्बर नई डेट

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के खिलाफ अपील पर सुनवाई टली, 27 सितम्बर नई डेट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खण्डपीठ में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के खिलाफ दाखिल राज्य सरकार की अपील पर मंगलवार को सुनवाई नहीं हो सकी। मंगलवार को जब मामला सुनवाई के लिए आया तो केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि स्थानांतरण प्रार्थना पत्र को खारिज किए जाने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। वकील ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई के पश्चात ही वर्तमान अपील की सुनवाई की जाए। हाईकोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 सितंबर की तिथि नियत कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रेनू अग्रवाल की खंडपीठ ने पारित किया। लखीमपुर खीरी से भाजपा के लोकसभा सदस्य अजय मिश्रा टेनी के लिए आज बड़ा दिन था। नरेन्द्र मोदी सरकार में गृह राज्य मंत्री के खिलाफ मंगलवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच सजा सुनाने वाली थी।

प्रभात गुप्‍ता हत्याकांड मामला

प्रभात गुप्‍ता हत्याकांड 22 साल पुरानी घटना है। 8 जुलाई 2022 को लखीमपुर खीरी के तिकुनिया कस्बे में एक 22 साल के युवा प्रभात गुप्ता की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अजय मिश्रा टेनी समेत 4 लोगों शशि भूषण, राकेश डालू और सुभाष मामा पर नामजद एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद प्रभात गुप्ता हत्या मामले में अजय मिश्रा टेनी की गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू हुई थी लेकिन बाद में कोर्ट ने इस मामले में स्टे लगा दिया। लेकिन हाई कोर्ट में जस्टिस डीके त्रिवेदी ने 5 जनवरी 2001 को टेनी को गिरफ्तारी पर मिली रोक को खारिज कर दिया। पर 26 जून 2001 से टेनी जमानत पर हैं।

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सुनवाई टलती रही

निचली अदालत ने 29 अप्रैल 2004 को अजय मिश्र समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया। इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। अगले 14 साल तक लखनऊ हाई कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हुई। फिर मार्च 2018 में हाई कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया। इसके बाद 5 अप्रैल 2022 को जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस सरोज यादव ने सुनवाई की। और 16 मई 2022 को सुनवाई की अंतिम तारीख तय की। तब से लगातार किसी न किसी कारण से सुनवाई टलती रही है।

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