
हाईकोर्ट के आदेश के आगे झुका नगर निगम, कल पार्षद पद की शपथ लेंगे ललित (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
Lucknow Municipal Corporation turning point:राजधानी Lucknow की सियासत और नगर निगम की कार्यप्रणाली से जुड़ा एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। लंबे समय से चर्चा और विवादों में रहे ललित किशोर तिवारी को आखिरकार पार्षद पद की शपथ दिलाने का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट के सख्त रुख और स्पष्ट आदेश के बाद अब नगर निगम प्रशासन ने उन्हें शपथ ग्रहण के लिए आधिकारिक रूप से आमंत्रित कर दिया है। रविवार होने के बावजूद विशेष व्यवस्था करते हुए सुबह 9 बजे शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
इस पूरे मामले ने नगर निगम की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। बीते कई दिनों से शपथ ग्रहण को लेकर खींचतान चल रही थी और मामला न्यायालय तक पहुंच गया था। अब कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है और नगर निगम प्रशासन को झुकना पड़ा है।
सूत्रों के अनुसार ललित किशोर तिवारी को पार्षद पद की शपथ दिलाने में हो रही देरी को लेकर मामला न्यायालय पहुंचा था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रशासनिक स्तर पर जानबूझकर प्रक्रिया को रोका जा रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नगर निगम प्रशासन से जवाब तलब किया और शपथ प्रक्रिया में देरी पर नाराजगी जताई।
बताया जा रहा है कि कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अनावश्यक बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी। इसके बाद नगर निगम प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ललित किशोर तिवारी को शपथ ग्रहण के लिए आमंत्रण भेज दिया। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है। विपक्षी दलों के साथ-साथ कई पार्षदों ने भी इसे लोकतंत्र की जीत बताया है।
इस पूरे विवाद के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा Sushma Kharkwal की भूमिका को लेकर होती रही। नगर निगम की राजनीति में यह चर्चा आम रही कि शपथ ग्रहण को लेकर मेयर की ओर से सख्त रुख अपनाया गया था। हालांकि कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब स्थिति बदल गई है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह मामला केवल एक शपथ ग्रहण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने नगर निगम के भीतर चल रही अंदरूनी राजनीति और शक्ति संतुलन को भी उजागर कर दिया है। नगर निगम के कई जनप्रतिनिधियों का मानना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में निर्वाचित प्रतिनिधियों को समय पर अधिकार और जिम्मेदारियां मिलनी चाहिए। ऐसे मामलों में देरी जनता के विश्वास को प्रभावित करती है।
आमतौर पर रविवार को सरकारी कार्यालयों में अवकाश रहता है, लेकिन इस मामले की संवेदनशीलता और न्यायालय के निर्देशों को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है। रविवार होने के बावजूद सोमवार सुबह 9 बजे शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक नगर निगम मुख्यालय में कार्यक्रम को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं ताकि शपथ ग्रहण प्रक्रिया शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।
ललित किशोर तिवारी के शपथ ग्रहण को लेकर राजधानी की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में नगर निगम की कार्यशैली और राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। नगर निगम के कई पार्षदों और कार्यकर्ताओं ने कहा कि न्यायालय का हस्तक्षेप यह दर्शाता है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में कानून सर्वोपरि है और किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधि को उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।
अब राजधानी के लोगों की नजरें सोमवार सुबह होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम में नगर निगम और राजनीतिक जगत से जुड़े कई लोग मौजूद रह सकते हैं। ललित किशोर तिवारी के समर्थकों में इस फैसले को लेकर उत्साह का माहौल है। समर्थकों का कहना है कि लंबे इंतजार और कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार उन्हें न्याय मिला है। वहीं विपक्षी खेमे में भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कई लोग इसे नगर निगम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बता रहे हैं।
Published on:
23 May 2026 11:19 pm
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