
सरकारी नोटिस ने उड़ा दी परिवारों की नींद (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)
Poor Families Caught in Bureaucratic Crossfire Over Lucknow Housing Scheme : राजधानीलखनऊके डालीबाग स्थित सरदार पटेल आवासीय योजना को लेकर उठा विवाद अब नया मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। कुछ दिन पहले जिस सरकारी आवासीय परिसर की दीवार पर सिंचाई विभाग की ओर से नोटिस चस्पा किए जाने और अवैध अतिक्रमण संबंधी निशान लगाए जाने की चर्चा थी, अब विभागीय अधिकारियों की सफाई के बाद मामला और अधिक सवालों के घेरे में आ गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल आवंटियों की चिंता बढ़ाई है, बल्कि विभागों के बीच समन्वय और जिम्मेदारी को लेकर भी बहस छेड़ दी है।
डालीबाग स्थित यह भूमि कभी माफिया मुख्तार अंसारी के कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन के रूप में चर्चा में रही थी। कब्जामुक्त कराए जाने के बाद इस भूमि पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने गरीब और मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए फ्लैट निर्माण कराया। योजना को सरकार की महत्वपूर्ण आवासीय योजनाओं में शामिल किया गया और पात्र लाभार्थियों को आवास आवंटित किए गए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथद्वारा लाभार्थियों को फ्लैट की चाबियां सौंपे जाने के बाद लोगों ने अपने जीवन के सबसे बड़े सपनों में से एक को साकार होते देखा। कई परिवारों ने वर्षों की बचत, कर्ज और संघर्ष के बाद अपने घर का सपना पूरा किया था। ऐसे में जब इसी परिसर से जुड़ा नोटिस विवाद सामने आया तो स्वाभाविक रूप से लोगों की चिंता बढ़ गई।
डालीबाग आवासीय योजना की आवंटी सुनीता देवी ने भर्राए गले से बताया कि उन्होंने अपने पूरे जीवन की जमा-पूंजी जोड़कर यह घर खरीदा था। पति के निधन के बाद उन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों में अपने चार बच्चों का पालन-पोषण किया। छोटी-छोटी बचत करके और कई त्याग करके उन्होंने अपने परिवार के लिए एक छत का सपना पूरा किया था।
सुनीता कहती हैं, "जब से फ्लैट पर लाल निशान लगाया गया है और लोगों से कहा गया कि यह कॉलोनी अवैध है तथा यहां से जाना पड़ सकता है, तब से हमारी जिंदगी में जैसे भूचाल आ गया है। समझ नहीं आ रहा कि आखिर हमारी क्या गलती है। अगर यह घर भी हमसे छिन गया तो हम अपने बच्चों को लेकर कहां जाएंगे? पति के जाने के बाद बड़ी मुश्किल से बच्चों को पाला और यह आशियाना बनाया था। अब हर समय यही चिंता सताती है कि कहीं यह छत भी न छिन जाए। कभी-कभी तो लगता है कि किस्मत ने फिर से हमारे साथ अन्याय कर दिया है।"
उन्होंने बताया कि विवाद की खबर सामने आने के बाद परिवार इतना परेशान हो गया कि रात को घर में चूल्हा तक नहीं जला और बच्चे भूखे ही सो गए। पूरे परिवार के मन में भविष्य को लेकर डर और अनिश्चितता बनी हुई है।
आवासीय योजना के एक अन्य आवंटी 75 वर्षीय अब्दुल ने भी अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि इस उम्र में नया ठिकाना तलाशना उनके लिए असंभव है। अब्दुल कहते हैं, "अगर हमारा आशियाना हमसे छिन गया तो इस उम्र में हम कहां जाएंगे? अधिकारियों की इस कार्रवाई और लगातार बनी हुई अनिश्चितता की वजह से हमारे गले से निवाला तक नहीं उतर रहा है। हर समय यही डर बना रहता है कि पता नहीं फिर कब कोई नोटिस आ जाए या कोई नई परेशानी खड़ी हो जाए।"
उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा, "हमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पूरा भरोसा है। हम चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। गरीब लोगों को किसी भी हालत में परेशान नहीं किया जाना चाहिए।"
कुछ दिन पहले आवासीय परिसर में सिंचाई विभाग से संबंधित एक नोटिस लगाए जाने की खबर सामने आई थी। परिसर की दीवारों पर लाल रंग से अवैध अतिक्रमण संबंधी निशान भी बनाए गए थे। नोटिस और चिन्हों को देखकर स्थानीय लोगों और आवंटियों के बीच यह चर्चा फैल गई कि कहीं पूरी इमारत को ही अवैध निर्माण तो नहीं घोषित किया जा रहा। इस घटनाक्रम के बाद आवंटियों में बेचैनी बढ़ गई। जिन लोगों ने हाल ही में अपने घरों का कब्जा लिया था, वे भविष्य को लेकर आशंकित हो गए। कई परिवारों ने प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने की मांग भी की।
विवाद बढ़ने के बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों की ओर से सफाई दी गई कि संबंधित नोटिस फ्लैटों के खिलाफ नहीं था। विभाग का कहना है कि नोटिस आसपास के अतिक्रमण को हटाने के संबंध में लगाया गया था और इसे आवासीय परिसर से जोड़कर देखा जाना उचित नहीं है। अधिकारियों के अनुसार संबंधित नोटिस को बाद में हटा दिया गया और विभाग का उद्देश्य LDA द्वारा निर्मित फ्लैटों के खिलाफ कोई कार्रवाई करना नहीं था। हालांकि इस स्पष्टीकरण के बाद भी कई सवाल अनुत्तरित बने हुए हैं।
सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि यदि नोटिस फ्लैटों से संबंधित नहीं था तो वह ऐसी जगह क्यों लगाया गया, जहां से यह संदेश गया कि सरकारी आवासीय परियोजना पर ही कार्रवाई होने वाली है। इसके अलावा परिसर में बनाए गए लाल निशानों ने भी भ्रम की स्थिति पैदा की। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नोटिस किसी अन्य अतिक्रमण से संबंधित था तो उसकी स्पष्ट पहचान सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। इससे न केवल अनावश्यक विवाद टल सकता था बल्कि आवंटियों के मन में उत्पन्न हुई आशंकाएं भी नहीं पैदा होतीं।
सूचना: अब तक यह जांच कराने के कोई आदेश जारी नहीं हुए हैं कि आवासीय परिसर पर लाल निशान क्यों और किसके निर्देश पर लगाए गए थे। खबर पर बराबर नजर बनी हुई है, नई जानकारी के साथ जल्द अपडेट होगा
Updated on:
19 Jun 2026 10:18 am
Published on:
19 Jun 2026 10:18 am
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