
लखनऊ बना क्षेत्रीय मौसम केंद्र, यूपी-उत्तराखंड को मिलेगा सटीक मौसम पूर्वानुमान अब (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)
Lucknow Weather Centre Early Warning System: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लिए मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन और जन सुरक्षा के क्षेत्र में सोमवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र को आधिकारिक रूप से क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (रीजनल मेट्रोलॉजिकल सेंटर) का दर्जा प्रदान कर दिया गया। इस महत्वपूर्ण निर्णय से अब दोनों राज्यों में मौसम की निगरानी, पूर्वानुमान और आपदा संबंधी चेतावनियों की प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक और प्रभावी हो सकेगी।
राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस नई व्यवस्था का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मौसम विज्ञान विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र को क्षेत्रीय केंद्र का दर्जा मिलना केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह उत्तर भारत में मौसम विज्ञान सेवाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब तक उत्तर भारत के अधिकांश मौसम संबंधी कार्यों का संचालन दिल्ली से किया जाता था, लेकिन अब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की मौसम निगरानी, विश्लेषण और चेतावनी प्रणाली का बड़ा हिस्सा लखनऊ से संचालित होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे स्थानीय मौसमीय परिस्थितियों का अधिक गहराई से अध्ययन किया जा सकेगा और क्षेत्र विशेष के अनुसार अधिक सटीक पूर्वानुमान जारी किए जा सकेंगे। इससे किसानों, प्रशासन, उद्योगों, पर्यटन क्षेत्र और आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मौसम की सटीक जानकारी आज केवल बारिश या धूप का अनुमान लगाने तक सीमित नहीं रह गई है। यह किसानों की फसल बचाने, प्राकृतिक आपदाओं से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्रशासन को समय रहते सतर्क करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि तकनीक के क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों के कारण अब मौसम से जुड़ी घटनाओं की पूर्व सूचना पहले की तुलना में कहीं अधिक सटीक मिल रही है। आंधी, बारिश, ओलावृष्टि और बिजली गिरने जैसी घटनाओं के बारे में समय रहते चेतावनी जारी होने से जान-माल की क्षति को कम करने में मदद मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लगातार तकनीकी संसाधनों को मजबूत कर रही है ताकि आपदा प्रबंधन व्यवस्था और अधिक प्रभावी बन सके।
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में मौसम विभाग की बदलती कार्यप्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब मौसम विभाग की भविष्यवाणियों पर लोगों का भरोसा कम होता था। उन्होंने कहा, "करीब 12 साल पहले यदि मौसम विभाग कहता था कि बारिश होगी, तो लोग मजाक में मान लेते थे कि शायद बारिश नहीं होगी। लेकिन आज आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से मौसम संबंधी पूर्वानुमान काफी सटीक हो चुके हैं।"
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लोगों के मोबाइल फोन पर तीन घंटे पहले तक के मौसम संबंधी अलर्ट पहुंच रहे हैं, जिससे नागरिकों को अपनी गतिविधियों की योजना बनाने और आवश्यक सावधानियां बरतने का अवसर मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत बनाने के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम देखने को मिला है। उन्होंने सहारनपुर की एक घटना का उदाहरण देते हुए बताया कि मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनी के बाद मंदिर परिसर में मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया, जिससे संभावित जनहानी टल गई।
उन्होंने कहा कि पहले मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली जैसे जिलों में हर वर्ष आकाशीय बिजली और मौसम संबंधी घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो जाती थी। लेकिन अब समय रहते चेतावनी मिलने के कारण ऐसी घटनाओं में कमी आई है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक का वास्तविक उद्देश्य लोगों के जीवन की रक्षा करना है और मौसम विज्ञान विभाग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
योगी आदित्यनाथ ने जलवायु परिवर्तन को भविष्य की बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि मौसम चक्र में लगातार बदलाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि लगभग हर मौसम अपने निर्धारित समय से देरी से आ रहा है और मौसम की अनिश्चितता बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो इसका प्रभाव कृषि उत्पादन पर भी पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 21 प्रतिशत योगदान देता है। ऐसे में किसानों तक समय पर और सटीक मौसम जानकारी पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है और मौसम संबंधी जानकारी को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में मौसम विज्ञान के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि भविष्य में ऐसी उन्नत मौसम सेवाएं विकसित की जा रही हैं, जिनसे लोगों को अगले तीन घंटे के मौसम की अत्यंत सटीक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। उन्होंने कहा, "अब घर से निकलने से पहले यह जानना संभव हो रहा है कि छतरी लेकर निकलना है या नहीं। यह मौसम विज्ञान में आई तकनीकी क्रांति का परिणाम है।"
डॉ. सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश में केवल एक डॉपलर मौसम रडार कार्यरत था, जबकि आज तीन रडार सक्रिय हैं और छह नए रडार स्थापित किए जा रहे हैं। देशभर में मौसम रडारों की संख्या 17 से बढ़कर 50 हो चुकी है और अगले दो वर्षों में इसे 100 तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि लखनऊ को क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का दर्जा मिलने के बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की मौसम संबंधी गतिविधियों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी। इसके लिए भविष्य में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त नया मुख्यालय विकसित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि दोनों राज्यों में पांच नए मौसम रडार भी लगाए जाएंगे, जिससे मौसम की निगरानी और अधिक सटीक होगी। इसके अलावा शहरों, पर्यटन स्थलों, कृषि क्षेत्रों और विशेष भौगोलिक क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मौसम पूर्वानुमान जारी करने की योजना भी बनाई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलेगा। उन्हें समय पर बारिश, आंधी, तापमान और अन्य मौसमीय परिस्थितियों की जानकारी मिलेगी, जिससे वे बुवाई, सिंचाई और फसल कटाई जैसे महत्वपूर्ण निर्णय बेहतर ढंग से ले सकेंगे। वहीं आम नागरिकों को भी आंधी, तूफान, भारी वर्षा और आकाशीय बिजली जैसी घटनाओं के बारे में समय रहते चेतावनी प्राप्त होगी। इससे जनहानि और आर्थिक नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की स्थापना को आपदा प्रबंधन की दिशा में भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि सटीक और समय पर मिलने वाली मौसम जानकारी के आधार पर राहत और बचाव कार्यों की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी। विशेष रूप से बाढ़, आंधी, बिजली गिरने और अत्यधिक वर्षा जैसी परिस्थितियों में यह केंद्र प्रशासन के लिए एक मजबूत सूचना तंत्र के रूप में कार्य करेगा।
लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र का क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र में रूपांतरण उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लिए मौसम सेवाओं के क्षेत्र में एक नई शुरुआत माना जा रहा है। आधुनिक तकनीक, बेहतर पूर्वानुमान क्षमता और मजबूत चेतावनी प्रणाली के जरिए यह केंद्र आने वाले वर्षों में लाखों लोगों के जीवन, कृषि और आर्थिक गतिविधियों को सुरक्षित और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल केवल मौसम पूर्वानुमान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आपदा प्रबंधन, कृषि विकास, पर्यटन और जन सुरक्षा के क्षेत्र में भी दूरगामी सकारात्मक प्रभाव छोड़ेगी
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Published on:
09 Jun 2026 08:46 am
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