
तीसरी आंख ने यूपी के लखनऊ में एक महिला अधिकारी की सच्चाई उजागर कर दी।
तकनीकि के इस दौर में किसी से कुछ भी छिपाना अब आसान नहीं है। अपराध पर नजर रखने के लिए सबसे सुरक्षित उपाय है सीसीटीवी कैमरा। इसे 'तीसरी आंख' भी कहा जाता है। इसी तीसरी आंख ने यूपी के लखनऊ में एक महिला अधिकारी की सच्चाई उजागर कर दी।
आइए जानते हैं क्या है मामला, जब 'तीसरी आंख' ने खोल दिया महिला अधिकारी पोल...
लखनऊ प्रदेश के पहले पीपीपी मॉडल पर बने आलमबाग बस टर्मिनल पर लगे सीसीटीवी कैमरों ने एक महिला अधिकारी की पोल खोल कर रख दी।
शातिर महिला अफसर ड्यूटी से गायब रहने के बाद भी जब वापस लौटती तो रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर उपस्थिति दर्ज करा देती। यह पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी में कैद हो रही थी।
मामले की जब गहनता से जांच हुई तो आलमबाग बस स्टेशन की स्टेशन इंचार्ज की पोल खुल गई इसके बाद परिवहन निगम के प्रधान प्रबंधक प्रशासन ने महिला अधिकारी को सस्पेंड कर दिया।
जब प्रधान प्रबंधक प्रशासन ने पूरे मामले की जांच कराई तो सच्चाई सामने आई। अब महिला अधिकारी पर कार्रवाई हो गई है। परिवहन निगम मुख्यालय पर महिला केंद्र प्रभारी के खिलाफ कई शिकायतें आईं।
इन शिकायतों की जांच 24 मई की रात 11 बजे बस स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरे के जरिए की गई। इसमें बीते 10 11 व 12 मई को ड्यूटी से गायब रहने के बाद 13 मई को ड्यूटी रजिस्ट्रर में बाकी दिनों की हाजिरी लगाने का खुलासा हुआ।
इस मामले को संज्ञान में लेते हुए 25 मई को अपर प्रबंध निदेशक अन्नपूर्णा गर्ग ने जांच कराई जांच के बाद प्रधान प्रबंधक कार्मिक एवं प्रशासन अशोक कुमार ने निलंबन आदेश जारी कर दिया। केंद्र प्रभारी पर आरोप है कि ड्यूटी पर न आने के बावजूद उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर कर उपस्थिति दर्ज कर लेती थीं।
बस स्टेशन पर होने वाली घटनाओं की भी जानकारी उच्चाधिकारियों को उपलब्ध नहीं कराती थीं । बस स्टेशन पर स्थित कैंटीन पर ऐसे उत्पादों की बिक्री हो रही थी जो नहीं हो सकती थी। इन सवालों के आरोपों की जांच में केंद्र प्रभारी दोषी पाई गईं।
Published on:
26 May 2023 12:30 pm
