
1 जून से 11 जुलाई तक बंद रहेंगी कक्षाएं, जरूरत पड़ने पर बुलाए जा सकेंगे शिक्षक (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
LU Summer Break: University of Lucknow प्रशासन ने छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के लिए ग्रीष्मकालीन अवकाश की आधिकारिक घोषणा कर दी है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, लखनऊ विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध सभी महाविद्यालयों में 1 जून 2026 से 11 जुलाई 2026 तक समर वेकेशन रहेगा। इस फैसले से हजारों छात्रों और शिक्षकों को राहत मिली है, क्योंकि प्रदेश में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी के बीच लंबे अवकाश की मांग उठ रही थी।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. भावना मिश्रा द्वारा जारी कार्यालय आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह अवकाश माननीय कुलपति महोदय के निर्देशों के अनुपालन में घोषित किया गया है। हालांकि, अवकाश अवधि के दौरान भी परीक्षा, प्रवेश प्रक्रिया और अन्य जरूरी प्रशासनिक कार्य जारी रहेंगे। ऐसे में आवश्यकता पड़ने पर शिक्षकों को ड्यूटी पर बुलाया जा सकता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश का लाभ विश्वविद्यालय के सभी विभागों और संबद्ध महाविद्यालयों में लागू होगा। भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। Lucknow समेत पूरे उत्तर प्रदेश में इन दिनों तापमान लगातार बढ़ रहा है। मौसम विभाग द्वारा भीषण गर्मी और लू की चेतावनी जारी किए जाने के बाद कई शिक्षण संस्थानों ने छुट्टियों की घोषणा शुरू कर दी है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्रीष्मावकाश के दौरान जिन शिक्षकों को जरूरी कार्यों के लिए रोका जाएगा, उन्हें अर्जित अवकाश (Earned Leave) का लाभ दिया जाएगा।
विश्वविद्यालय स्तर पर यदि किसी शिक्षक को ,परीक्षा कार्य,मूल्यांकन कार्य,प्रवेश प्रक्रिया,प्रशासनिक जिम्मेदारी जैसे आवश्यक कार्यों के लिए रोका जाता है, तो संबंधित विभागाध्यक्ष उनकी सूची कुलसचिव को भेजेंगे। इसके बाद कुलपति के अनुमोदन के आधार पर अर्जित अवकाश स्वीकृत किया जाएगा।
विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के लिए अलग व्यवस्था तय की गई है। वहां ड्यूटी पर रोके गए शिक्षकों की सूची संबंधित प्राचार्य या प्राचार्या द्वारा अनुमोदित की जाएगी। इससे कॉलेज स्तर पर अवकाश और प्रशासनिक कार्यों का समन्वय आसान होगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने अर्जित अवकाश को लेकर स्पष्ट नियम भी जारी किए हैं।शिक्षक को जितने दिन ड्यूटी पर रोका जाएगा,प्रत्येक 2 कार्य दिवस के बदले 1 दिन अर्जित अवकाश मिलेगा,कार्य समाप्ति के बाद प्रमाण पत्र कुलसचिव को भेजना होगा,एक वर्ष में अधिकतम 30 दिन तक अर्जित अवकाश मिलेगा। प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि अवकाश के दौरान भी यदि कोई आवश्यक कार्य उत्पन्न होता है, तो संबंधित शिक्षक को ड्यूटी के लिए वापस बुलाया जा सकता है। इसमें विशेष रूप से प्रवेश प्रक्रिया,परीक्षा आयोजन,मूल्यांकन कार्य,प्रशासनिक बैठकें,विश्वविद्यालय हित से जुड़े कार्य शामिल हो सकते हैं।
ग्रीष्मकालीन अवकाश की घोषणा के बाद छात्रों में खुशी का माहौल दिखाई दे रहा है। लगातार गर्मी और लू के कारण छात्र लंबे समय से छुट्टियों का इंतजार कर रहे थे। कई छात्रों का कहना है कि इस दौरान वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, इंटर्नशिप और अन्य गतिविधियों पर ध्यान देंगे।
विश्वविद्यालय और कॉलेज शिक्षकों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि भीषण गर्मी में नियमित कक्षाएं संचालित करना कठिन हो रहा था। हालांकि कुछ शिक्षकों ने यह भी कहा कि अवकाश के दौरान भी परीक्षा और प्रवेश संबंधी कार्यों का दबाव बना रहेगा।
सूत्रों के अनुसार ग्रीष्मावकाश के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन आगामी शैक्षणिक सत्र की प्रवेश प्रक्रिया को लेकर सक्रिय रहेगा। संभावना है कि इस दौरान ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया,मेरिट सूची,काउंसलिंग,प्रवेश सत्यापन जैसे कार्य जारी रहेंगे।
मौसम विभाग द्वारा जारी रेड और येलो अलर्ट के बीच विश्वविद्यालय का यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में इन दिनों कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है। ऐसे में छात्र संगठनों और अभिभावकों ने भी विश्वविद्यालय के फैसले को राहत भरा कदम बताया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों और शिक्षकों से अपील की है कि वे छुट्टियों के दौरान आधिकारिक वेबसाइट और नोटिस पर नजर बनाए रखें, क्योंकि जरूरी कार्यों या प्रशासनिक आदेशों से जुड़ी सूचनाएं समय-समय पर जारी की जा सकती हैं।
Updated on:
23 May 2026, 1:56 PM IST
Published on:
23 May 2026, 1:56 PM IST
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