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UP Budget 2018 पर बोलीं लखनऊ की महिलाएं, इन चीजों की खली कमी

UP Budget 2018: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने सदन में दूसरा बजट पेश किया। इस बजट पर लखनऊ वासियों की क्या है राय

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लखनऊ

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Mahendra Yadav

Feb 16, 2018

up budget

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने सदन में दूसरा बजट पेश किया। करीब सवा चार लाख करोड़ (4,28,384 करोड़) लाख का बजट पेश किया गया। बजट भाषण की शुरूआत में मर्यादा पुरुषोत्तम से की गयी। उन्होंंने कहा कि सरकार ने हर वग्र के लोगों को ध्यान में रखते हुए बजट बनाया है। यूपी के विकास को ध्यान में रखते हुए ये बजट तैयार किया गया है। इस बजट में सूक्ष्म, लघु एवं मध्य उद्यम, शिक्षा, सड़क और बिजली, महिला बाल कल्याण जैसे अहम क्षेत्रों को तवज्जो दी गयी। ये योगी सरकार का दूसरा बजट है। इस बजट पर लखनऊ की जनता ने अपने विचार दिए हैं।

अब तक का सबसे बड़ा बजट

इस बजट के जरिये विकास का रोडमैप तैयार किया गया है। किसानों से लेकर बच्चों और महिलाओं पर फोकस किया गया है। बच्चों की शिक्षा को तरजीह दी गयी है। योगी सरकार ने कहा कि उत्तर प्रदेश का ये बजट अबतक का सबसे बड़ा बजट है। मातृ वंदना योजना के लिए 591 करोड़ का बजट तैयार किया गया है। महिला एवं बाल कल्याण के लिए 8 हजार 815 करोड़ का बजट बनाया गया है। माध्यमिक शिक्षा अभियान के लिए 581 करोड़ का बजट तैयार किया गया है। योगी सरकार ने कहा कि गरीब कन्याओँ की शादी के लिए 250 करोड़ की व्यावस्था की गयी है। इस बजट की सबसे बड़ी खूबी है कि प्रदेश के अनुशासन को ध्यान में रखते हुए इसे तैयार किया गया है।

बजट से इन्हें है ये शिकायत

लखनऊ यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन करने वालीं सुरभी यादव बताती हैं कि इस बजट में महिलाओं की स्वास्थ्य को लेकर कहीं पर भी बात नहीं की गयी है। इसमें गरीब वर्ग की महिलाओं को ज्यादा तवज्जो दी गयी है। लेेकिन इसमें कहीं पर भी सैनिटरी नैपकिन पर लगे जीएसटी (Goods and Services Tax) की बात नहीं की गयी है। इसपर लगा टैक्स हटना चाहिए। ये महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है, तो इसपर टैक्स लगने की बात होनी ही नहीं चाहिए। अगर देखा जाए, तो इसे फ्री ऑफ कॉस्ट दिया जाना चाहिए।

अगर देखा जाए, तो कामकाजी महिलाओं को इस बजट से कुछ राहत नहीं है। टैक्स स्लैब को लेकर पिछले बजट में कोई बात नहीं की गयी थी। इस बजट में भी उसका जिक्र नहीं किया गया है। एक्सिस बैंक में काम करने वालीं प्रगति सक्सेना का कहना है कि पिछले बजट में टैक्स स्लैब में कोई बदलाव न देखकर उम्मीद थी कि इस बार के बजट में कुछ बदलाव किए जाएंगे। लेकिन योगी सरकार के इस बजट में कामकाजी महिलाओं पर कम फोकस किया गया है।

इंदिरानगर में रह रहीं अर्चना अग्रवाल कहती हैं कि गरीब महिलाओँ को सबसे ज्यादा समस्या होती हैं। लेकिन मध्यवर्गीय परिवार की महिलाएं भी कम परेशान नहीं। महंगाई को लेकर ज्यादा कुछ बात नहीं कही गयी। जो रोजमर्रा की चीजें हैं उनका दाम कम होना चाहिए।

मेकअप आर्टिस्ट गीतिका चक्रवर्ती का कहना है कि इस बजट से उनकी ये शिकायत है कि मेकअप प्रोडक्ट्स पर बढ़े हुए टैक्स को क्यों कम नहीं किया गया। उनका कहना है कि प्रोडक्टस पर जीएसटी लगने की वजह से उन्हें बढ़े हुए दाम पर सामान खरीदना होता है। लेकिन वो अपने कस्टमर्स को उसी रेट में सर्विस देती हैं। इससे उनको घाटा होता है।

राम स्वरूप मेमोरियल से इंजीनियरिंग कर रहे आकाश श्रीवास्तव ने बताया कि यूपी बजट में युवाओं के लिए स्वरोजगार और प्रदेश में उद्योगों के लिए माहौल बनाने पर विशेष बल दिया गया है। स्टार्टअप फण्ड के लिए 250 करोड़ की योजना बनाई गयी है। युवाओं को लुभाने के लिए ये अच्छा फैसला है। इससे उन लोगों को आसानी होगी, जो बिजनस करना चाहते हैं लेकिन उनके पास शुरूआती दौर के लिए पैसे नहीं हैं।

बैंकिंग की तैयारी कर रहीं शीतल रावत का कहना है कि इसमें युवाओँ को तरजीह दी गयी है। बेरोजगारी आए दिन बढ़ रही है और ऐसे में मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना में 100 करोड़ की योजना उन युवाओं के लिए लाभदायक है, जो पैसों की कमी की वजह से स्टार्टअप नहीं कर पाते। इसके साथ ही योगी सरकार के बजट ने तीन लाख सुवाओँ को नौकरी देने का वादा किया है।