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Mahakumbh 2025 : सांस्कृतिक युवोत्सव और कवि सम्मेलन में पद्म श्री हृदय नारायण दीक्षित हुए सम्मानित

Mahakumbh 2025: महाकुंभ 2025 के तहत गोमती नगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में आयोजित सांस्कृतिक युवोत्सव और कवि सम्मेलन में साहित्य और संस्कृति का संगम देखने को मिला। मुख्य अतिथि पद्म श्री हृदय नारायण दीक्षित ने महाकुंभ की ऐतिहासिक महिमा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया।  

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jan 31, 2025

महाकुंभ के कवि सम्मेलन में प्रमुख कवियों की शानदार प्रस्तुति

महाकुंभ के कवि सम्मेलन में प्रमुख कवियों की शानदार प्रस्तुति

Mahakumbh Cultural Youth Festival: गोमती नगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में आयोजित महाकुंभ 2025 के सांस्कृतिक युवोत्सव और कवि सम्मेलन ने साहित्य और संस्कृति के अद्भुत संगम का दृश्य प्रस्तुत किया। इस भव्य आयोजन में पद्म श्री हृदय नारायण दीक्षित सहित कई विशिष्ट हस्तियों ने भाग लिया। इस आयोजन ने न केवल साहित्यिक और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का प्रयास किया, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश भी दिया।

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साहित्य, संस्कृति और कला का संगम

महाकुंभ 2025 के तहत आयोजित सांस्कृतिक युवोत्सव और कवि सम्मेलन में साहित्य, संस्कृति, और कला के विविध पहलुओं को उजागर किया गया। इस कार्यक्रम में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं पद्म भूषण सम्मानित हृदय नारायण दीक्षित ने महाकुंभ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महिमा पर अपने विचार साझा किए। उनका भाषण महाकुंभ के महत्व को समझने में सहायक था और उन्होंने इस ऐतिहासिक आयोजन को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा बताया।

हृदय नारायण दीक्षित की उपस्थिति

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हृदय नारायण दीक्षित ने अपने प्रेरक भाषण में महाकुंभ के सांस्कृतिक महत्व को न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से, बल्कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक परिपेक्ष्य में भी देखा। उन्होंने कहा, "महाकुंभ का आयोजन हमारी संस्कृति और सभ्यता के जीवित प्रतीकों को सामने लाता है, जहां न केवल भक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है, बल्कि यह भारतीय समाज की विविधता और समृद्धि को भी दर्शाता है।"

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विशिष्ट अतिथियों का योगदान

कार्यक्रम में विधानसभा सदस्य ओ.पी. श्रीवास्तव और डॉ. दिलीप अग्निहोत्री ने भी महाकुंभ की महिमा के बारे में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने इस आयोजन को एक ऐतिहासिक अवसर बताया, जो भारतीय संस्कृति की धारा को आगे बढ़ाने का कार्य करता है। इसके अलावा, रिंकल शर्मा ने नाटक के सचित्र वर्णन के माध्यम से अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया। उनके अभिनय और प्रस्तुति ने कार्यक्रम में एक नई ऊर्जा का संचार किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य और संयोजन

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था कि युवा पीढ़ी को साहित्य, संस्कृति और महाकुंभ की परंपरा से जोड़ना, ताकि वे अपनी सांस्कृतिक धरोहर को समझ सकें और उसका संरक्षण कर सकें। इस आयोजन का संयोजन प्रख्यात पत्रकार अमिताभ नीलम ने किया, जिन्होंने इस कार्यक्रम के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है और वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने और अपनाने में सक्षम होते हैं।

कवियों की शानदार प्रस्तुति

कार्यक्रम में कवियों ने महाकुंभ की महिमा और उसकी सांस्कृतिक विरासत पर आधारित अपनी रचनाओं का वाचन किया। हास्य कवि पंकज प्रसून ने अपनी हास्य कविता से श्रोताओं को गुदगुदाया, वहीं शिखा श्रीवास्तव ने महाकुंभ के महत्व पर अपनी विशेष कविताएं प्रस्तुत कीं। उनकी कविताओं में महाकुंभ के धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं का समावेश था, जो श्रोताओं के दिलों को छू गए।

राजेश श्रीवास्तव ने अपनी बेटी पर आधारित भावपूर्ण कविताएं प्रस्तुत कीं, जो श्रोताओं के दिलों को छू गईं। उन्होंने अपनी कविताओं में जीवन के गहरे अर्थ और महाकुंभ की महत्वता को जोड़ते हुए एक गहरी सोच का संकेत दिया। इस शानदार कार्यक्रम की अध्यक्षता सुभाष चंदर ने की, साथ ही कात्यानी सिंह, सौरभ त्रिपाठी और अन्य कवियों ने भी अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

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महाकुंभ 2025 का सांस्कृतिक महत्व

महाकुंभ 2025 का आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण था, बल्कि यह साहित्य, कला और संस्कृति के सामूहिक संगम का भी प्रतीक बना। इस आयोजन ने भारतीय समाज की विविधता को प्रदर्शित किया और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी हस्तियों ने अपनी उपस्थिति से इसे और अधिक गौरवमयी बना दिया। महाकुंभ के माध्यम से सांस्कृतिक संवाद, युवा सृजन और राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहित करने की कोशिश की गई है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बनेगा।