
उत्तर प्रदेश में पहले भी अपराधियों ने कई पत्रकारों की जान ली है।
लखनऊ. गाजियाबाद के पत्रकार विक्रम जोशी हत्याकांड को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार विपक्षी दलों के निशाने पर है। हालांकि, उत्तर प्रदेश में ऐसा पहली बार नहीं है, जब किसी पत्रकार की हत्या की गई है। इससे पहले भी अपराधियों ने सूबे के कई पत्रकारों की जान ली है। गाजियाबाद कांड के करीब एक माह पहले 19 जून को उन्नाव जिले में लखनऊ-कानुपर मार्ग पर दिनदहाड़े तीन गोलियां मारकर पत्रकार शुभम मणि त्रिपाठी की हत्या कर दी गई थी। पत्रकार, अखबार और सोशल मीडिया के माध्यम से क्षेत्र में सक्रिय रेत और भू माफिया की काली करतूतें लगातार उजागर कर रहा था। मामले में मुख्य अभियुक्त सहित चार नामजदों को गिरफ्तार किया गया, जबकि पांच नामजद अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। इसके अलावा विवेचना में सामने आये छह और लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मृतक के भाई ने गंगा घाट कोतवाली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि जब तक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो जाती है तब तक वह अपने भाई की तेरहवीं नहीं करेगा।
कुशीनगर-सहारनपुर में पत्रकार की हत्या
बीते वर्ष अक्टूबर 2019 में कुशीनगर जिले में हाटा कोतवाली के सिकटिया गांव निवासी स्थानीय पत्रकार राधेश्याम शर्मा की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। राधेश्याम एक हिंदी दैनिक में पत्रकार थे और साथ ही एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते भी थे। इससे पहले अगस्त 2019 में सहारनपुर में एक पत्रकार और उसके भाई को कुछ अज्ञात लोगों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने मामले में योगी सरकार को घेरते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था वेंटिलेटर पर जा चुकी है।
..जब अखिलेश के मंत्री पर लगा था पत्रकार के मर्डर का आरोप
जून 2015 में सूबे में जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव थे। शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह को जिंदा जला दिया गया था। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। मामले में अखिलेश सरकार में मंत्री रहे राममूर्ति वर्मा सहित छह पर जगेंद्र सिंह की हत्या और हत्या की साजिश रचने का केस दर्ज किया गया था। खुद सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले का संज्ञान लिया था। जांच की जिम्मेदारी डीआइजी को सौंपी गई थी।
जगेंद्र सिंह लंबे वक्त से पत्रकारिता कर रहे थे। पत्रकारिता के करियर में उन्होंने कई हिंदी अखबारों के लिए काम भी किया, लेकिन वारदात के एक साल से उन्होंने फेसबुक पर शाहजहांपुर समाचार के नाम से एक अकाउंट बनाया था, जिस पर वह खबरें लिखते थे। पत्रकारिता जगत में उनकी छवि एक निर्भीक और निडर पत्रकार की थी। उस वक्त जगेंद्र के परिजनों का कहना था कि पुलिस ने ही पत्रकार को आग के हवाले कर दिया वहीं, पुलिस का दावा था कि जगेंद्र ने सुसाइड किया है। गंभीर अवस्था में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई थी। तत्कालीन अखिलेश सरकार ने पीड़ित परिवार को 30 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी थी। बाद में पत्रकार का बेटा राहुल सिंह ने मीडिया में बयान दिया कि उसके पिता ने खुद आग लगाकर आत्महत्या की थी और कहा कि आरोपित राममूर्ति वर्मा निर्दोष हैं। इसके बाद पीड़ित परिवार ने सीबीआई जांच की याचिका भी वापस ले ली थी। फाइनल चार्जशीट के बाद मामला रफा-दफा हो गया।
...अब गाजियाबाद में पत्रकार की हत्या
मुख्यमंत्री ने योगी आदित्यनाथ ने मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी, बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा और परिवार को 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। बुधवार सुबह गाजियाबाद से यशोदा अस्पताल में इलाज के दौरान पत्रकार की मौत हो गई। दो दिन पहले बदमाशों ने विक्रम के सिर में गोली मार दी थी, इससे पहले उन्हें बुरी तरह पीटा भी था। वारदात के वक्त बाइक पर पत्रकार की दो बेटियां भी बैठी थीं। पत्रकार ने भांजी के साथ छेड़खानी की शिकायत की थी। इसको लेकर बदमाश बौखलाए थे। मामले में पुलिस ने अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
Updated on:
22 Jul 2020 07:16 pm
Published on:
22 Jul 2020 04:05 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
