
5 करोड़ ऑर्गेनिक गमलों का निर्माण, वृहद पौधरोपण अभियान में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
UP to Replace Plastic Pots with Cow-Dung Planters: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को प्लास्टिक मुक्त बनाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा और दूरगामी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल और आत्मनिर्भर गोशाला मॉडल के तहत अब पौधरोपण के लिए पॉलीथिन गमलों की जगह गाय के गोबर से बने ऑर्गेनिक गमलों का उपयोग किया जाएगा। इस पहल के लिए प्रदेश की लगभग 7000 गोशालाओं में बड़े पैमाने पर गमलों का उत्पादन किया जाएगा। यह योजना न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि हर जिले में रोजगार सृजन और गो पालकों के लिए अवसर बढ़ाने का भी काम करेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं के अनुरूप उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने इस महत्वाकांक्षी योजना की रूपरेखा तैयार की है। आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत वृहद पौधरोपण अभियान में पौधों को पॉलीथिन के स्थान पर गोबर के गमलों में रोपित किया जाएगा। उनका कहना है कि इस वर्ष लगभग 5 करोड़ गमलों का निर्माण करके अभियान शुरू किया जाएगा। इसके तहत नर्सरियों में बड़े पैमाने पर ऑर्गेनिक गमले लगाए जाएंगे, जिससे पौधरोपण अभियान की गुणवत्ता और पौधों की जीवित रहने की दर में वृद्धि होगी। इसके अलावा योजना को सफल बनाने के लिए वन मंत्री डॉ. अरुण सक्सेना के साथ विचार-विमर्श किया गया है।
श्री गुप्ता ने बताया कि यह पहल गोवंश संरक्षण, पोषण सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता की दिशा में ठोस कदम साबित होगी। गमलों का निर्माण प्रदेश के महिला स्वयं सहायता समूह और युवा उद्यमियों के माध्यम से कराया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा और समुदाय के विभिन्न वर्गों को इस परियोजना से जोड़ने का अवसर मिलेगा। यह योजना न केवल पर्यावरण और कृषि के लिए फायदेमंद होगी, बल्कि आजीविका और ग्रामीण रोजगार को भी सशक्त बनाएगी। गमलों के उत्पादन से स्थानीय स्तर पर कारीगरों, महिला समूहों और युवा उद्यमियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
गो सेवा आयोग के ओएसडी डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि इन गमलों का उपयोग वृहद पौधरोपण अभियान में किया जाएगा। गोबर से बने ये ऑर्गेनिक गमले मिट्टी में स्वतः विलीन हो जाते हैं और पौधों को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराते हैं। इससे प्लास्टिक कचरे में कमी आएगी और मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी। उनका कहना है कि इस पहल से प्लास्टिक मुक्त उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी और गोशालाओं के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, इस योजना से प्रदेश के विभिन्न जिलों में सामाजिक और आर्थिक लाभ भी होंगे।
गोबर से बने गमले पौधों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। पौधरोपण के बाद ये गमले भूमि में स्वतः विलीन हो जाते हैं, जिससे पौधों की जड़ों को कोई नुकसान नहीं होता। इसके अलावा, प्रारंभिक अवस्था में पौधों को एक वर्ष तक आवश्यक पोषण भी प्राप्त होता है। इससे पौधों की जीवित रहने की दर में वृद्धि होती है और बड़े पैमाने पर होने वाले पौधरोपण अभियानों की सफलता सुनिश्चित होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा बल्कि स्थानीय जैविक खेती और मिट्टी की उर्वरता को भी बढ़ावा मिलेगा।
इस योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूह, युवा उद्यमियों और स्थानीय कारीगरों को रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। प्रत्येक जिले में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में आर्थिक सक्रियता बढ़ेगी।उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग का मानना है कि इस पहल से समाज के विभिन्न वर्गों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होगी। इससे प्लास्टिक मुक्त उत्तर प्रदेश के संकल्प को जनआंदोलन का स्वरूप मिलेगा।
गो सेवा आयोग के अनुसार इस वर्ष वृहद पौधरोपण अभियान के लिए 5 करोड़ गमलों का निर्माण किया जाएगा। गमलों में पौधों की रोपाई की जाएगी और इसे प्रत्येक जिले में बड़े पैमाने पर लागू किया जाएगा। यह अभियान केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे स्थानीय रोजगार और महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
वन मंत्री डॉ. अरुण सक्सेना और अन्य संबंधित विभागों के सहयोग से नर्सरी और पौधरोपण स्थलों पर इस योजना को लागू किया जाएगा। सभी जिलों में गमलों के उत्पादन और वितरण की निगरानी की जाएगी। योजना के सफल क्रियान्वयन से प्रदेश में स्वच्छता और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में स्थायी बदलाव आएगा।
गोबर से बने गमलों का प्रयोग प्रदेश में पर्यावरणीय दृष्टि से लाभकारी होगा। पौधरोपण अभियान में प्लास्टिक के बजाय ऑर्गेनिक गमलों का उपयोग करने से प्लास्टिक कचरे में कमी आएगी। साथ ही, मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और पौधों की जड़ों को पोषण मिलेगा। इस योजना से गोवंश संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और ग्रामीण रोजगार जैसे कई सामाजिक और आर्थिक पहलुओं में संतुलन स्थापित होगा।
Published on:
08 Jan 2026 01:00 am
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