
SIR Update: BJP और सपा की कैसे उड़ी नीदें। फोटो सोर्स- पत्रिका न्यूज
SIR Impact On Political Parties: SIR की प्रक्रिया के बाद उत्तर प्रदेश में करीब 2.88 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो गए हैं। इसे लेकर 14 दिसंबर 2025 को BJP के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के पदभार ग्रहण समारोह में CM योगी आदित्यनाथ ने चिंता जताई थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि समय रहते छूटे हुए मतदाताओं के नाम फिर से नहीं जोड़े गए, तो 10 हजार से कम वोटों के अंतर वाली सीटों पर BJP को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की 114 ऐसी सीटें थीं, जहां जीत और हार का अंतर 10 हजार से कम रहा था। इनमें से 63 सीटों पर BJP को जीत मिली थी, जबकि 41 सीटें समाजवादी पार्टी के खाते में गई थीं। अब बड़ा सवाल यह है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में SIR का असर कितना निर्णायक साबित होगा। क्या कम मार्जिन वाली सीटों पर चुनावी गणित बदल जाएगा? आखिरकार इस प्रक्रिया से किस पार्टी को ज्यादा नुकसान या फायदा होने की संभावना है?
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| SIR से पहले कुल मतदाता | 15 करोड़ 44 लाख |
| SIR के दौरान कटे नाम | 2.89 करोड़ |
| SIR के बाद कुल मतदाता | 12 करोड़ 55 लाख |
| मृत पाए गए मतदाता | 46.23 लाख |
| स्थायी रूप से बाहर गए / अनुपस्थित | 2.17 करोड़ |
| डुप्लीकेट (एक से अधिक जगह नाम) | 25.47 लाख |
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 15 ऐसी सीटें सामने आई थीं, जहां जीत और हार का अंतर एक हजार वोटों से भी कम रहा। इनमें से 10 सीटों पर तो नतीजे 500 से कम वोटों के बेहद मामूली अंतर से तय हुए थे। इन 15 सीटों में 9 पर BJP और उसके सहयोगी दलों ने जीत दर्ज की, जबकि 6 सीटें समाजवादी पार्टी गठबंधन के खाते में गई थीं।
अब इन सभी सीटों पर SIR के बाद 32 हजार से लेकर 1.12 लाख तक मतदाताओं के नाम कटने की बात सामने आ रही है, जिससे चुनावी समीकरणों में बड़ा बदलाव आने की आशंका जताई जा रही है। चर्चा है कि इस स्थिति से सबसे ज्यादा नुकसान सत्तारूढ़ दल को होता दिख रहा है। अगर 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों की तुलना की जाए, तो 2022 में जीत–हार का अंतर काफी सिमट गया था। यही वजह रही कि BJP 60 से ज्यादा सीटों पर 10 हजार से भी कम वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर पाई थी।
SIR के बाद सामने आए ये आंकड़े BJP के लिए चिंताजनक माने जा रहे हैं। पार्टी की सबसे बड़ी चिंता शहरी इलाकों में बड़ी संख्या में वोट कटने को लेकर है। लंबे समय से BJP शहरी क्षेत्रों में मजबूत मानी जाती रही है, ऐसे में शहरों में मतदाताओं के नाम हटने से उसके वोट बैंक पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि इसका नुकसान सिर्फ BJP तक सीमित नहीं है। समाजवादी पार्टी को भी इसके प्रभाव से गुजरना पड़ सकता है। जिन जिलों में बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी रोजगार या अन्य कारणों से देश के बाहर रहती है, वहां सपा के वोट आधार पर असर पड़ने की संभावना है। ऐसे कई मतदाताओं के नाम सूची से कट गए हैं और अब उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने के लिए जटिल प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिससे राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 99 सीटें ऐसी थीं, जहां जीत और हार का अंतर 1 हजार से 10 हजार वोटों के बीच रहा। इन 99 सीटों में BJP ने 55 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि समाजवादी पार्टी को 35 सीटें मिली थीं। इसके अलावा रालोद ने 3 सीटें जीतीं, निषाद पार्टी और सुभासपा के खाते में 2–2 सीटें गईं। वहीं BSP और कांग्रेस को 1–1 सीट से संतोष करना पड़ा था।
राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो अब ये सभी सीटें ‘डेंजर जोन’ में आ चुकी हैं। माना जा रहा है कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम कटने के बाद इन क्षेत्रों में चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। खुद BJP और प्रदेश सरकार का नेतृत्व कर रहे CM योगी आदित्यनाथ भी हालिया संगठनात्मक बैठकों में इन सीटों को लेकर चिंता जाहिर कर चुके हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड की 22 ऐसी सीटें थीं, जहां जीत–हार का अंतर 10 हजार से कम रहा था। इन सीटों पर समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय लोकदल के साथ गठबंधन में 9 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि 13 सीटों पर BJP के उम्मीदवार विजयी रहे थे। अब गठबंधन टूट चुका है, जिसका सीधा असर इन कम मार्जिन वाली सीटों पर पड़ सकता है। पश्चिमी यूपी में मुस्लिम और जाट मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। सपा-रालोद गठबंधन टूटने की स्थिति में वोटों के बंटवारे की आशंका बढ़ गई है।
| क्रम | विधानसभा सीट | जीतने वाली पार्टी | SIR में कटे वोट |
|---|---|---|---|
| 1 | सहारनपुर नगर | 🟠 भाजपा | 1,16,049 |
| 2 | देवबंद | 🟠 भाजपा | 50,839 |
| 3 | शामली | 🟢 रालोद | 58,570 |
| 4 | चरथावल | 🔴 सपा | 53,449 |
| 5 | पुरकाजी | 🟢 रालोद | 51,375 |
| 6 | बिजनौर | 🟠 भाजपा | 77,246 |
| 7 | नूरपुर | 🔴 सपा | 42,751 |
| 8 | बिलारी | 🔴 सपा | 49,564 |
| 9 | मिलक | 🟠 भाजपा | 57,632 |
| 10 | नौगावां सादात | 🔴 सपा | 33,718 |
| 11 | हस्तिनापुर | 🟠 भाजपा | 64,550 |
| 12 | किठौर | 🔴 सपा | 64,740 |
| 13 | मेरठ दक्षिण | 🟠 भाजपा | 1,54,739 |
| 14 | बागपत | 🟠 भाजपा | 56,398 |
| 15 | लोनी | 🟠 भाजपा | 1,39,489 |
| 16 | हापुड़ | 🟠 भाजपा | 92,212 |
| 17 | कोल | 🟠 भाजपा | 99,442 |
| 18 | सादाबाद | 🟢 रालोद | 56,078 |
| 19 | सिकंदराराऊ | 🟠 भाजपा | 61,904 |
| 20 | मांट | 🟠 भाजपा | 47,205 |
| 21 | कालपी | 🔴 सपा | 47,046 |
| 22 | मानिकपुर | 🟠 भाजपा | 47,403 |
मध्य यूपी (अवध) क्षेत्र की बात करें तो यहां 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान 50 सीटें ऐसी रहीं, जहां जीत–हार का अंतर 10 हजार वोटों से कम था। इन सीटों पर मुकाबला मुख्य रूप से समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच रहा। इनमें से 30 सीटों पर BJP ने जीत दर्ज की, जबकि 20 सीटें सपा के खाते में गईं।
इस क्षेत्र में लोधी, मौर्य, कुर्मी और यादव जैसी OBC जातियों के मतदाताओं की प्रभावशाली मौजूदगी रही है, जो चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। अब विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के बाद इन सीटों पर मतदाता सूची में हुए बदलावों से दोनों प्रमुख दलों के राजनीतिक समीकरण प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।
| क्रम | विधानसभा सीट | जीतने वाली पार्टी | एसआईआर में कटे वोट |
|---|---|---|---|
| 1 | शिकोहाबाद | सपा | 70,323 |
| 2 | सिरसागंज | सपा | 46,664 |
| 3 | अलीगंज | भाजपा | 49,213 |
| 4 | जलेसर | भाजपा | 35,645 |
| 5 | मैनपुरी | भाजपा | 74,880 |
| 6 | भोगांव | भाजपा | 57,089 |
| 7 | बिसौली | सपा | 85,440 |
| 8 | शेखपुर | सपा | 76,437 |
| 9 | दातागंज | भाजपा | 91,635 |
| 10 | बहेड़ी | सपा | 59,233 |
| 11 | भोजीपुरा | सपा | 65,143 |
| 12 | नवाबगंज | भाजपा | 48,892 |
| 13 | पीलीभीत शहर | भाजपा | 63,817 |
| 14 | कटरा मीरानपुर | भाजपा | 56,491 |
| 15 | जलालाबाद | भाजपा | 59,880 |
| 16 | शाहजहांपुर | भाजपा | 1,02,692 |
| 17 | ददरौल | भाजपा | 47,262 |
| 18 | मोहम्मदी | भाजपा | 57,780 |
| 19 | सीतापुर | भाजपा | 1,28,597 |
| 20 | महमूदाबाद | भाजपा | 56,395 |
| 21 | सिधौली | भाजपा | 59,205 |
| 22 | शाहाबाद | भाजपा | 55,426 |
| 23 | गोपामऊ | भाजपा | 56,874 |
| 24 | सांडी | भाजपा | 52,295 |
| 25 | मलिहाबाद | भाजपा | 64,180 |
| 26 | लखनऊ पश्चिम | सपा | 1,82,153 |
| 27 | बछरावां | सपा | 56,800 |
| 28 | रायबरेली | भाजपा | 56,000 |
| 29 | सलोन | भाजपा | 65,068 |
| 30 | सरैनी | सपा | 63,408 |
| 31 | ऊंचाहार | सपा | 48,397 |
| 32 | गौरीगंज | सपा | 61,455 |
| 33 | सुलतानपुर | भाजपा | 85,368 |
| 34 | लंभुआ | भाजपा | 47,103 |
| 35 | छिबरामऊ | भाजपा | 1,22,597 |
| 36 | तिर्वा | भाजपा | 73,682 |
| 37 | कन्नौज | भाजपा | 81,816 |
| 38 | इटावा | भाजपा | 1,05,610 |
| 39 | भरथना | सपा | 65,975 |
| 40 | बिधूना | सपा | 45,139 |
| 41 | फतेहपुर | सपा | 70,759 |
| 42 | खागा | भाजपा | 50,080 |
| 43 | रामगंज | सपा | 61,686 |
| 44 | सिराथू | सपा | 69,288 |
| 45 | मंझनपुर | सपा | 67,082 |
| 46 | सोरांव | सपा | 76,819 |
| 47 | फूलपुर | भाजपा | 1,00,673 |
| 48 | हंडिया | सपा | 88,239 |
| 49 | मेजा | सपा | 66,871 |
| 50 | करछना | भाजपा | 88,107 |
पूर्वांचल क्षेत्र में 27 विधानसभा सीटें ऐसी थीं, जहां 2022 के चुनाव में जीत–हार का अंतर 10 हजार से कम रहा। उस समय समाजवादी पार्टी ने सुभासपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और यह गठबंधन यहां काफी प्रभावी साबित हुआ था। कम मार्जिन वाली इन सीटों पर कड़ी और लगभग बराबरी की टक्कर देखने को मिली थी।
इन 27 सीटों में BJP ने 12 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि सपा 9 सीटें जीतने में सफल रही थी। इसके अलावा सुभासपा और निषाद पार्टी को 2–2 सीटें मिली थीं, वहीं बसपा और कांग्रेस के खाते में 1–1 सीट आई थी।
मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में सुभासपा भाजपा के साथ खड़ी है। पूर्वांचल में अति पिछड़ी जातियों की आबादी अपेक्षाकृत अधिक है और इन वर्गों के मतदाता फिलहाल BJP के समर्थन में माने जाते हैं। ऐसे में SIR के बाद मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम कटने के कारण इन कम मार्जिन वाली सीटों पर BJP को अपेक्षाकृत ज्यादा नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
| क्रम | विधानसभा सीट | जीतने वाली पार्टी | SIR में कटे वोट |
|---|---|---|---|
| 1 | बीकापुर | भाजपा | 63,836 |
| 2 | कटेहरी | सपा | 51,179 |
| 3 | बहराइच | भाजपा | 1,14,186 |
| 4 | कैसरगंज | सपा | 82,354 |
| 5 | श्रावस्ती | भाजपा | 65,459 |
| 6 | गोंडा | भाजपा | 85,249 |
| 7 | इटवा | सपा | 69,050 |
| 8 | बस्ती सदर | सपा | 72,824 |
| 9 | महादेवा | सुभासपा | 52,334 |
| 10 | मेंहदावल | निषाद पार्टी | 81,231 |
| 11 | फरेंदा | कांग्रेस | 52,029 |
| 12 | बिलरियागंज | सपा | 66,279 |
| 13 | रसड़ा | बसपा | 51,409 |
| 14 | बलरामपुर | भाजपा | 50,654 |
| 15 | जौनपुर | भाजपा | 1,04,501 |
| 16 | मुंगराबादशाहपुर | सपा | 61,117 |
| 17 | मछलीशहर | सपा | 67,942 |
| 18 | मड़ियाहूं | भाजपा | 52,686 |
| 19 | जफराबाद | सुभासपा | 71,463 |
| 20 | गाजीपुर सदर | सपा | 63,623 |
| 21 | चकिया | भाजपा | 51,742 |
| 22 | अजगरा | भाजपा | 35,261 |
| 23 | भदोही | सपा | 67,127 |
| 24 | जौनपुर (निर्दल) | निर्दल | 52,157 |
| 25 | औराई | भाजपा | 51,576 |
| 26 | रॉबर्ट्सगंज | भाजपा | 51,386 |
| 27 | दुद्धी | भाजपा | 67,421 |
बता दें कि प्रदेश में राजनीतिक दल SIR को लेकर कितने सतर्क और सक्रिय हैं, इसका अंदाजा बूथ लेवल एजेंट (BLA) की तैनाती से लगाया जा सकता है। SIR प्रक्रिया के बाद राज्य के लगभग 1.77 लाख बूथों पर विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब पौने छह लाख BLA चुनाव आयोग के साथ समन्वय बनाकर काम कर रहे हैं।
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Published on:
08 Jan 2026 12:13 pm
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