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SIR ने BJP और सपा की उड़ाई नींदे! कम मार्जिन वाली सीटों पर हो सकता है बड़ा ‘खेल’

Sir Impact On Political Parties: SIR के बाद BJP या समाजवादी पार्टी किस पार्टी को ज्यादा नुकसान या फायदा होने की संभावना है?

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लखनऊ

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Harshul Mehra

Jan 08, 2026

bjp or samajwadi party who will suffer more after sir cm yogi also worried know political equations

SIR Update: BJP और सपा की कैसे उड़ी नीदें। फोटो सोर्स- पत्रिका न्यूज

SIR Impact On Political Parties: SIR की प्रक्रिया के बाद उत्तर प्रदेश में करीब 2.88 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो गए हैं। इसे लेकर 14 दिसंबर 2025 को BJP के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के पदभार ग्रहण समारोह में CM योगी आदित्यनाथ ने चिंता जताई थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि समय रहते छूटे हुए मतदाताओं के नाम फिर से नहीं जोड़े गए, तो 10 हजार से कम वोटों के अंतर वाली सीटों पर BJP को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

क्या कम मार्जिन वाली सीटों पर चुनावी गणित बदल जाएगा?

साल 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की 114 ऐसी सीटें थीं, जहां जीत और हार का अंतर 10 हजार से कम रहा था। इनमें से 63 सीटों पर BJP को जीत मिली थी, जबकि 41 सीटें समाजवादी पार्टी के खाते में गई थीं। अब बड़ा सवाल यह है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में SIR का असर कितना निर्णायक साबित होगा। क्या कम मार्जिन वाली सीटों पर चुनावी गणित बदल जाएगा? आखिरकार इस प्रक्रिया से किस पार्टी को ज्यादा नुकसान या फायदा होने की संभावना है?

विवरणआंकड़े
SIR से पहले कुल मतदाता15 करोड़ 44 लाख
SIR के दौरान कटे नाम2.89 करोड़
SIR के बाद कुल मतदाता12 करोड़ 55 लाख
मृत पाए गए मतदाता46.23 लाख
स्थायी रूप से बाहर गए / अनुपस्थित2.17 करोड़
डुप्लीकेट (एक से अधिक जगह नाम)25.47 लाख

2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 15 ऐसी सीटें सामने आई थीं, जहां जीत और हार का अंतर एक हजार वोटों से भी कम रहा। इनमें से 10 सीटों पर तो नतीजे 500 से कम वोटों के बेहद मामूली अंतर से तय हुए थे। इन 15 सीटों में 9 पर BJP और उसके सहयोगी दलों ने जीत दर्ज की, जबकि 6 सीटें समाजवादी पार्टी गठबंधन के खाते में गई थीं।

2022 में सिमट गया था जीत–हार का अंतर

अब इन सभी सीटों पर SIR के बाद 32 हजार से लेकर 1.12 लाख तक मतदाताओं के नाम कटने की बात सामने आ रही है, जिससे चुनावी समीकरणों में बड़ा बदलाव आने की आशंका जताई जा रही है। चर्चा है कि इस स्थिति से सबसे ज्यादा नुकसान सत्तारूढ़ दल को होता दिख रहा है। अगर 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों की तुलना की जाए, तो 2022 में जीत–हार का अंतर काफी सिमट गया था। यही वजह रही कि BJP 60 से ज्यादा सीटों पर 10 हजार से भी कम वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर पाई थी।

BJP के लिए चिंताजनक आंकड़े

SIR के बाद सामने आए ये आंकड़े BJP के लिए चिंताजनक माने जा रहे हैं। पार्टी की सबसे बड़ी चिंता शहरी इलाकों में बड़ी संख्या में वोट कटने को लेकर है। लंबे समय से BJP शहरी क्षेत्रों में मजबूत मानी जाती रही है, ऐसे में शहरों में मतदाताओं के नाम हटने से उसके वोट बैंक पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

समाजवादी पार्टी को भी हो सकता है नुकसान!

हालांकि इसका नुकसान सिर्फ BJP तक सीमित नहीं है। समाजवादी पार्टी को भी इसके प्रभाव से गुजरना पड़ सकता है। जिन जिलों में बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी रोजगार या अन्य कारणों से देश के बाहर रहती है, वहां सपा के वोट आधार पर असर पड़ने की संभावना है। ऐसे कई मतदाताओं के नाम सूची से कट गए हैं और अब उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने के लिए जटिल प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिससे राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।

2022 के चुनाव में 99 सीटों पर जीत-हार का अंतर 1 से 10 हजार वोटों के बीच

2022 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 99 सीटें ऐसी थीं, जहां जीत और हार का अंतर 1 हजार से 10 हजार वोटों के बीच रहा। इन 99 सीटों में BJP ने 55 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि समाजवादी पार्टी को 35 सीटें मिली थीं। इसके अलावा रालोद ने 3 सीटें जीतीं, निषाद पार्टी और सुभासपा के खाते में 2–2 सीटें गईं। वहीं BSP और कांग्रेस को 1–1 सीट से संतोष करना पड़ा था।

‘डेंजर जोन’ में 99 सीटें

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो अब ये सभी सीटें ‘डेंजर जोन’ में आ चुकी हैं। माना जा रहा है कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम कटने के बाद इन क्षेत्रों में चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। खुद BJP और प्रदेश सरकार का नेतृत्व कर रहे CM योगी आदित्यनाथ भी हालिया संगठनात्मक बैठकों में इन सीटों को लेकर चिंता जाहिर कर चुके हैं।

पश्चिमी यूपी में मुस्लिम और जाट मतदाताओं की संख्या ज्यादा

2022 के विधानसभा चुनाव में पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड की 22 ऐसी सीटें थीं, जहां जीत–हार का अंतर 10 हजार से कम रहा था। इन सीटों पर समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय लोकदल के साथ गठबंधन में 9 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि 13 सीटों पर BJP के उम्मीदवार विजयी रहे थे। अब गठबंधन टूट चुका है, जिसका सीधा असर इन कम मार्जिन वाली सीटों पर पड़ सकता है। पश्चिमी यूपी में मुस्लिम और जाट मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। सपा-रालोद गठबंधन टूटने की स्थिति में वोटों के बंटवारे की आशंका बढ़ गई है।

पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड: SIR में कटे वोट (10 हजार से कम मार्जिन वाली सीटें)

क्रमविधानसभा सीटजीतने वाली पार्टीSIR में कटे वोट
1सहारनपुर नगर🟠 भाजपा1,16,049
2देवबंद🟠 भाजपा50,839
3शामली🟢 रालोद58,570
4चरथावल🔴 सपा53,449
5पुरकाजी🟢 रालोद51,375
6बिजनौर🟠 भाजपा77,246
7नूरपुर🔴 सपा42,751
8बिलारी🔴 सपा49,564
9मिलक🟠 भाजपा57,632
10नौगावां सादात🔴 सपा33,718
11हस्तिनापुर🟠 भाजपा64,550
12किठौर🔴 सपा64,740
13मेरठ दक्षिण🟠 भाजपा1,54,739
14बागपत🟠 भाजपा56,398
15लोनी🟠 भाजपा1,39,489
16हापुड़🟠 भाजपा92,212
17कोल🟠 भाजपा99,442
18सादाबाद🟢 रालोद56,078
19सिकंदराराऊ🟠 भाजपा61,904
20मांट🟠 भाजपा47,205
21कालपी🔴 सपा47,046
22मानिकपुर🟠 भाजपा47,403

मध्य यूपी (अवध) का क्या था हाल?

मध्य यूपी (अवध) क्षेत्र की बात करें तो यहां 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान 50 सीटें ऐसी रहीं, जहां जीत–हार का अंतर 10 हजार वोटों से कम था। इन सीटों पर मुकाबला मुख्य रूप से समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच रहा। इनमें से 30 सीटों पर BJP ने जीत दर्ज की, जबकि 20 सीटें सपा के खाते में गईं।

इस क्षेत्र में लोधी, मौर्य, कुर्मी और यादव जैसी OBC जातियों के मतदाताओं की प्रभावशाली मौजूदगी रही है, जो चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। अब विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के बाद इन सीटों पर मतदाता सूची में हुए बदलावों से दोनों प्रमुख दलों के राजनीतिक समीकरण प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।

क्रमविधानसभा सीटजीतने वाली पार्टीएसआईआर में कटे वोट
1शिकोहाबादसपा70,323
2सिरसागंजसपा46,664
3अलीगंजभाजपा49,213
4जलेसरभाजपा35,645
5मैनपुरीभाजपा74,880
6भोगांवभाजपा57,089
7बिसौलीसपा85,440
8शेखपुरसपा76,437
9दातागंजभाजपा91,635
10बहेड़ीसपा59,233
11भोजीपुरासपा65,143
12नवाबगंजभाजपा48,892
13पीलीभीत शहरभाजपा63,817
14कटरा मीरानपुरभाजपा56,491
15जलालाबादभाजपा59,880
16शाहजहांपुरभाजपा1,02,692
17ददरौलभाजपा47,262
18मोहम्मदीभाजपा57,780
19सीतापुरभाजपा1,28,597
20महमूदाबादभाजपा56,395
21सिधौलीभाजपा59,205
22शाहाबादभाजपा55,426
23गोपामऊभाजपा56,874
24सांडीभाजपा52,295
25मलिहाबादभाजपा64,180
26लखनऊ पश्चिमसपा1,82,153
27बछरावांसपा56,800
28रायबरेलीभाजपा56,000
29सलोनभाजपा65,068
30सरैनीसपा63,408
31ऊंचाहारसपा48,397
32गौरीगंजसपा61,455
33सुलतानपुरभाजपा85,368
34लंभुआभाजपा47,103
35छिबरामऊभाजपा1,22,597
36तिर्वाभाजपा73,682
37कन्नौजभाजपा81,816
38इटावाभाजपा1,05,610
39भरथनासपा65,975
40बिधूनासपा45,139
41फतेहपुरसपा70,759
42खागाभाजपा50,080
43रामगंजसपा61,686
44सिराथूसपा69,288
45मंझनपुरसपा67,082
46सोरांवसपा76,819
47फूलपुरभाजपा1,00,673
48हंडियासपा88,239
49मेजासपा66,871
50करछनाभाजपा88,107

पूर्वांचल क्षेत्र का क्या रहा था हाल?

पूर्वांचल क्षेत्र में 27 विधानसभा सीटें ऐसी थीं, जहां 2022 के चुनाव में जीत–हार का अंतर 10 हजार से कम रहा। उस समय समाजवादी पार्टी ने सुभासपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और यह गठबंधन यहां काफी प्रभावी साबित हुआ था। कम मार्जिन वाली इन सीटों पर कड़ी और लगभग बराबरी की टक्कर देखने को मिली थी।

इन 27 सीटों में BJP ने 12 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि सपा 9 सीटें जीतने में सफल रही थी। इसके अलावा सुभासपा और निषाद पार्टी को 2–2 सीटें मिली थीं, वहीं बसपा और कांग्रेस के खाते में 1–1 सीट आई थी।

मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में सुभासपा भाजपा के साथ खड़ी है। पूर्वांचल में अति पिछड़ी जातियों की आबादी अपेक्षाकृत अधिक है और इन वर्गों के मतदाता फिलहाल BJP के समर्थन में माने जाते हैं। ऐसे में SIR के बाद मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम कटने के कारण इन कम मार्जिन वाली सीटों पर BJP को अपेक्षाकृत ज्यादा नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।

क्रमविधानसभा सीटजीतने वाली पार्टीSIR में कटे वोट
1बीकापुरभाजपा63,836
2कटेहरीसपा51,179
3बहराइचभाजपा1,14,186
4कैसरगंजसपा82,354
5श्रावस्तीभाजपा65,459
6गोंडाभाजपा85,249
7इटवासपा69,050
8बस्ती सदरसपा72,824
9महादेवासुभासपा52,334
10मेंहदावलनिषाद पार्टी81,231
11फरेंदाकांग्रेस52,029
12बिलरियागंजसपा66,279
13रसड़ाबसपा51,409
14बलरामपुरभाजपा50,654
15जौनपुरभाजपा1,04,501
16मुंगराबादशाहपुरसपा61,117
17मछलीशहरसपा67,942
18मड़ियाहूंभाजपा52,686
19जफराबादसुभासपा71,463
20गाजीपुर सदरसपा63,623
21चकियाभाजपा51,742
22अजगराभाजपा35,261
23भदोहीसपा67,127
24जौनपुर (निर्दल)निर्दल52,157
25औराईभाजपा51,576
26रॉबर्ट्सगंजभाजपा51,386
27दुद्धीभाजपा67,421

बता दें कि प्रदेश में राजनीतिक दल SIR को लेकर कितने सतर्क और सक्रिय हैं, इसका अंदाजा बूथ लेवल एजेंट (BLA) की तैनाती से लगाया जा सकता है। SIR प्रक्रिया के बाद राज्य के लगभग 1.77 लाख बूथों पर विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब पौने छह लाख BLA चुनाव आयोग के साथ समन्वय बनाकर काम कर रहे हैं।