
लखनऊ. देश में हर साल बेरोजगारों की संख्या बढ़ती जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही युवाओं को लुभाने के लिए हर बोल रहे हों कि वे लाखों नौकरियां बांटने जा रहे हैं, लेकिन यह सिर्फ जुमला है। हकीकत कुछ और है। देश में सबसे ज्यादा नौकरियोंं के लिए परीक्षाएं लेन वाले कर्मचारी चयन आयोग ने हाल ही में एक आंकड़ा जारी किया है। यह आंकड़ा बताता है कि कैसे पांच-दस सालों ने हर साल नौकरियों की संख्या कम होती गयी है और आवेदक बढ़ते गए हैं। एसएससी के वर्ष 2016-17 के आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि इस साल 3 करोड़ 37 लाख बेरोजगार एसएससी की 18 परीक्षाओं में शामिल हुए। इनमें कुछ नौकरियों के परिणाम अभी तक नहीं निकले हैं। जबकि इन परीक्षाओं से सिर्फ 40 हजार नौकरियां ही मिलनी थीं। यानी हालत बहुत खराब है। लेकिन नेता हैं कि रोज ज्यादा से ज्यादा नौकरियां देेने का वादा कर रहे हैं।
हर साल घटते गए पद
स्टॉफ सिलेक्शन कमीशन यानी एसएससी की ओर से जारी किए आंकड़े के अनुसार पिछले 10 सालों में सरकारी नौकरी पाने की चाहत रखने वालों की संख्या में जर्बदस्त वृद्धि हुई है। सरकारी नौकरी की चाहत रखने वालों की तुलना में नौकरियों यानी अवसरों के मौकों की संख्या में एक प्रतिशत की भी वृद्धि नहीं हुई है। यानी हर साल पद घटते ही गए हैं।
बेरोजगारी अहम मुद्दा
देश-प्रदेश में बेरोजगारी युवाओं के लिए अहम मुद्दा है। कई युवा हैं, जो डिग्री लेकर खाली हाथ बैठे रहते हैं सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्हें नौकरी नहीं मिल रही। नौकरियों की संख्या शून्य है लेकिन नौकरी करने वालों की संख्या हजार के पार ही है। युवाओं का आक्रोश कहीं रौद्र रूप न ले ले इसलिए सरकारें ज्यादा से ज्यादा नौकरी बांटने का झूठा वादा करती रहती हैं।
स्वरोजगार में ज्यादा दिलचस्पी
पिछले दिनों पीएम मोदी ने कहा था कि पहले की तुलना में अब युवा सरकारी नौकरी के प्रति बहुत आर्कषित नहीं दिखते हैं। उनमें सरकारी नौकरी में आने का पहले जितना जोश नहीं नजर आता है। पीएम के मुताबिक इसका कारण यह है कि उनका रुझान स्वरोजगार की ओर बढ़ रहा है। नौकरी से ज्यादा आज की युवा पीढ़ी बिजनेस करना चाहती है। लेकिन, नौकरी के लिए बढऩे वाले आवेदन पत्र इस कथन को नकारते हैं।
नौकरी चाहने वाले बढ़े, नौकरियां नहीं
एसएससी ने पूरे साल में आयोजित परीक्षाएं और इसमें शामिल होने वाले स्टूडेंट्स की संख्या के आंकड़े पेश किए हैं। हालांकि, सरकारी नौकरी की तमन्ना आज भी कई लोगों के मन में है, लेकिन एसएससी के आंकड़ों के मुताबिक स्टूडेंट संख्या में तो वृद्धि हुई है लेकिन मौकों में नहीं। नौकरी चाहने वालों की संख्या बढ़ी है, लेकिन नौकरियों की संख्या न के बराबर है। पहले ग्रेड बी, ग्रेड सी और ग्रेड डी के चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा के बाद इंटरव्यू कराए जाते थे। लेकिन, पीएम मोदी ने इनमें इंटरव्यू को समाप्त कर दिया है। सेंट्रल सर्विस के तहत ग्रेड बी, सी और डी की परीक्षाएं एसएससी आयोजित कराता है। वहीं ग्रेड ए के पदों के लिए परीक्षा का आयोजन यूनियन पब्लिक सर्विस कमिशन करती है।
ये रहे हैरान करने वाले आंकड़े:
-2016-17: इस बीच 3 करोड़ 37 लाख स्टूडेंट्स एसएससी की 18 परीक्षाओं में शामिल हुए। इनमें कुछ के परिणाम अभी तक नहीं निकले जबकि इनमें 40 हजार से अधिक नौकरियां मिलनी हैं।
-2015-16: इस दौरान 1 करोड़ 48 लाख स्टूडेंट अलग-अलग परीक्षाओं में बैठे थे जबकि 25,138 नौकरियां ही मिली थीं।
-2008-09: इस दौरान 9 लाख 94 हजार लोगों ने अलग-अलग नौकरी के लिए आवेदन दिये थे और उस साल 30323 नौकरियां ही लगी थीं।
Published on:
13 Feb 2018 03:49 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
