सुहेलदेव को लेकर छिड़ी जंग, राजा बोलो- किसके हो संग

सुहेलदेव को लेकर छिड़ी जंग, राजा बोलो- किसके हो संग

मिशन 2017 हर हाल में फतह करना है। उप्र विधानसभा चुनाव 2017 को लेकर सभी दलों का कमोबेश यही संकल्प है।

महेंद्र प्रताप सिंह
"#Mission2017 दलों में  जातीय समीकरण सहेजने की कवायद"

लखनऊ. मिशन 2017 हर हाल में फतह करना है। उप्र विधानसभा चुनाव 2017 को लेकर सभी दलों का कमोबेश यही संकल्प है। इसलिए हर तरह की घेरेबंदी की जा रही है। दलित, मुस्लिम और अति पिछड़े सभी पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं। इन वर्गों के प्रेरक पुरुष खोजे जा रहे हैं। उनकी गाथाएं बताई जा रही हैं। एक दूसरे की विरासत को लेकर जंग छिड़ी है। दलित और ओबीसी वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति बन रही है। इसी क्रम में अवध प्रांत में एक राजा की विरासत को लेकर भाजपा और बसपा आपस में भिड़ गए है। पासी, राजभर और अन्य पिछड़ा वर्ग के वोट बटोरने के लिए बहराइच के राजा सुहेलदेव के इतिहास को झाड़-पोछकर जनता के सामने लाया जा रहा है। दोनों ही दल सुहेलदेव की विरासत को भुनाने के लिए आने वाले दिनों में कई कार्यक्रम करने जा रहे हैं। पासी महाराजा सुहेलदेव की न तो इस बीच पुण्यतिथि है और न ही कोई अन्य ऐतिहासिक तारीख। लेकिन,उनकी स्मृति में भाजपा 11 वीं शताब्दी के राजा की कर्मस्थली बहराइच में 24 फरवरी को एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है। इसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह शिरकत करेगें। इसके बाद पूरे राज्य में पासी सम्राट से जुड़े कई अन्य कार्यक्रम चलाने की योजना है। भाजपा की इस योजना से सपा और बसपा भी चौकन्ने हो गए हैं। दलित राजा बिजली पासी,वीरांगना ऊदा देवी और महारानी अहिल्याबाई होलकर से जुड़े कार्यक्रमों को करने की रूपरेखा बन रही है। राज्य की तकरीबन 20 फीसदी दलित आबादी में जाटव समाज की आबादी 65 फीसदी है। बसपा प्रमुख मायावती के साथ जाटव वोट बैंक जुड़ा रहा है। लेकिन, गैर जाटव दलित बिरादरी पासी और राजभर जिनकी जनसंख्या करीब 16 प्रतिशत यह वोट बैंक बिखरा हुआ है। इस पर भाजपा और सपा अपनी दावेदारी जताते रहे हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में पासी और राजभर बड़ी संख्या में इसलिए सभी दल इन पर अपनी नजरे गड़ाए हैं।

कौन थे सुहेल देव
इतिहासकारों के अनुसार श्रावस्ती नरेश राजा प्रसेनजित ने उप्र में बहराइच राज्य की स्थापना की थी। इसका प्रारंभिक नाम भरवाइच था। इन्हीं महाराजा प्रसेनजित के पुत्र थे सुहेलदेव। अवध गजेटियर के अनुसार इनका शासन काल 1027 ई. से 1077 तक था। वे पासी जाति के थे। सुहेलदेव का साम्राज्य गोरखपुर से सीतापुर तक फैला हुआ था। गोंडा, बहराइच, लखनऊ, बाराबंकी, उन्नाव व लखीमपुर इस राज्य की सीमा में आते थे। इन सभी जिलों में राजा सुहेल देव के सहयोगी करीब 21 पासी राजा राज्य करते थे। इसी काल क्रम में महमूद गजनवी ने भारत में अनेक राज्यों को लूटा तथा सोमनाथ सहित अनेक मंदिरों का विध्वंस किया। उसकी मृत्यु के बाद उसका बहनोई सालार साहू अपने पुत्र सालार मसूद, सैयद हुसेन गाजी, सैयद हुसेन खातिम जैसे कई अन्य साथियों को लेकर भारत आया। उसने बाराबंकी के सतरिख (सप्तऋषि आश्रम) पर कब्जा कर वहां अपनी छावनी बनायी। मसूद अपने सैनिकों के साथ बहराइच पहुंचा। उसने यहां की बालार्क मंदिर को तोडऩे की कोशिश की। लेकिन तत्कालीन राजा सुहेलदेव ने उसकी सवा लाख सेनाओं के साथ कुटिला नदी के तट पर जमकर संघर्ष किया। यहां सुहेलदेव की सेना ने आततायी का सिर धड़ से अलग कर दिया। और हिंदू धर्म की रक्षा की।
इसलिए भाजपा के आदर्श हैं सुहेलदेव
भाजपा का मानना है कि शताब्दियों पहले राजा सुहेलदेव ने मुस्लिम आक्रमणकारी सालार मसूद को न केवल मार गिराया बल्कि उसकी एक लाख बीस हजार की सेना को भी नष्ट कर दिया। मुस्लिम शासक की साम्राज्यवादी नीति को रोकते हुए हिंदू धर्म स्थल की रक्षा की। भाजपा सुहेलदेव को हिंदू धर्म के रक्षक के रूप में प्रचारित कर पासी,राजभर और कोरी समाज में अपनी पकड़ बनाना चाहती है। यही नहीं बहराइच, गोंडा और अवध क्षेत्र में बड़ी तादात में मुस्लिम वोट बैंक हैं। ये मुख्यतया बसपा और समाजवादी पार्टी के थोक परंपरागत वोटर हैं। हिंदू भावना को भड़काकर इस वोटबैंक को बिखेरने कवायद में भी भाजपा जुटी है। इस क्षेत्र में लगभग 54 प्रतिशत पिछड़े और 25 प्रतिशत दलित समुदाय के वोटर हैं। इसी क्षेत्र में अयोध्या रामजन्मभूमि स्थल है तो गौतमबुद्ध की तपस्थली श्रावस्ती भी है। इसीलिए अवध प्रांत में हिंदू कार्ड खेलकर हिंदू वेाट बैंक को सहेजने के लिए भाजपा जातीय समीकरण  साधने में जुटी है। यह क्षेत्र भाजपा का पुराना गढ़ भी रहा है। दशकों तक यह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा के शलाका पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी की कर्मभूमि था। अवध क्षेत्र में करीब 10 लोकसभा तथा 35 विधानसभा क्षेत्र आते हैंं। भगवान राम, गौतमबुद्ध, बलार्क ऋषि (राजा सुहेलदेव के गुरू), महाराजा सुहेलदेव और चालारी नरेश बलभद्र सिंह के नाम की भाजपा माला जप रही है। इसके पीछे वजह सिर्फ एक है। वह यह कि इस क्षेत्र में महाराजा सुहेलदेव राजभर और पासी समाज में एकरूप से मान्य है। वे अन्य पिछड़ी और दलित जातियों के अधिनायक भी हैं। बहराइच में बाले मियां की मजार है, जहां हिन्दू- मुस्लिम सभी समान भाव से जाते हैं। बाले मियां को हिन्दू बलार्क ऋषि कहते हैं और वह राजा सुहेलदेव के इष्ट गुरू हैं। यह क्षेत्र गौतमबुद्ध सहित शाक्यमुनि की भी तपस्थली है। सुहेलदेव का नाम जोड़कर एक साथ सवर्णो और दलितों को साधा जा सकता है। यही वजह है कि सुहेलदेव भाजपा के आर्दश पुरुष बन गए हैं।

बसपा जताती रही है सुहेलदेव पर अपना दावा
राजा सुहेलदेव की विरासत पर अभी तक बसपा अपना दावा जताती रही है। बिजली पासी पर भी बसपा की दावेदारी रही है। लखनऊ के आशियाना क्षेत्र स्थित बिजली पासी किले का जीर्णोद्वार और सुंदरीकरण राजनीति के चलते किया गया। सपा और भाजपा भी बिजली पासी को लेकर खूब राजनीति करते रहे हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने मिशन 2017 के आगाज के साथ ही सियासी एजेंडा भी तय कर दिया हैै। दलितों को लुभाने के लिये बसपा दलितों और मुसलमानों को मोदी-मुलायम गठजोड़ से बचने का संदेश दे रही है। 2012 के विधान सभा चुनाव में पराजय और 2014 के लोकसभा चुनाव में खाता न खोल पाने वाली बहुजन समाज पार्टी 2017 में हर हाल में सत्ता वापसी चाहती है। इसलिए पार्टी दलित वोटरों को यह बता रही है उसके इतिहास पुरुषों के लिए भाजपा का उमड़ा प्यार महज घडिय़ालू आंसू है। वह भाजपा की हिंदुत्व आधारित जातिवादी सोच के बारे में भी आगाह कर रही है। 2007 के चुनावों में दलित-मुस्लिम और ब्राहमण वोटों की गोलाबंदी करके बसपा ने 403 में से 206 सीटें जीती थींं। पार्टी को मिलने वाले कुल वोटों में 30.43 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं का था।  इसीलिए बसपा डा. भीमराव अंबेडकर और उसके आर्दश पुरुषों व नायकों के सहारे चुनावी वैतरणी पार लगाने की भाजपा की मुहिम को कुंद करने का दांव चल रही है।
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