
लखनऊ. किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में अब ऐसे नवजात बच्चों का उपचार हो सकेगा, जिनमें जन्म से ही बोलने और सुनने की क्षमता बेहद कम होती है। केजीएमयू लखनऊ और इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्पीच एंड हियरिंग के बीच ऐसे बच्चों के इलाज को लेकर आज सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए हैं। केजीएमयू के कुलपति प्रोफेसर एमएलबी भट्ट ने बताया कि यूपी में यह सुविधा पहली बार केजीएमयू में शुरू होने जा रही है। बच्चे के जन्म से 72 घंटे की अवधि के भीतर उसका परीक्षण कराया जा सकेगा।
केजीएमयू को मिलेंगे उपकरण और विशेषज्ञ
इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्पीच एंड हियरिंग के साथ केजीएमयू के हुए समझौते के तहत केजीएमयू को नवजात बच्चों के सुनने की क्षमता जांचने के लिए उपकरण और विशेषज्ञ उपलब्ध कराये जायेंगे। केजीएमयू के नाक, कान, गला विभाग, नियोनेटालॉजी विभाग, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग मिलकर नवजात शिशु के सुनने की क्षमता की जांच करेंगे। अब ऐसे बच्चों का इलाज केजीएमयू में संभव हो सकेगा, जिनके जन्म लेते ही सुनने और बोलने की क्षमता में कमी की शिकायत सामने आती थी।
Cochlear Implant and Speech Therapy से किया जाएगा इलाज
केजीएमयू के ईएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एसपी अग्रवाल ने बताया कि जो नवजात बच्चे ठीक से सुन नहीं सकते हैं, उनके मस्तिष्क का और बोलने की क्षमता का उचित विकास नहीं हो पाता है। अब केजीएमयू में जांच की सुविधा उपलब्ध होने के बाद ऐसे बच्चों की सुनने की क्षमता की जांच के बाद उसका उपचार विशेष विधि ( Cochlear Implant and Speech Therapy ) से शुरू किया जाएगा, जिससे बच्चे के बोलने की क्षमता और मस्तिष्क का विकास हो सके।
Published on:
16 Sep 2017, 8:25 PM IST
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