
कूफा मस्जिद से इमामबाड़ा तकि जैदी तक हजारों लोगों की मौजूदगी, ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
पवित्र रमजान माह की 21वीं तारीख पर शिया समुदाय द्वारा हजरत अली की शहादत की याद में सोमवार को राजधानी Lucknow में पारंपरिक मातमी जुलूस निकाला गया। यह जुलूस सआदतगंज स्थित Kufa Masjid, Lucknow से शुरू होकर शहर के विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए चौक क्षेत्र के Imambara Taqi Zaidi, Lucknow तक पहुंचा। जुलूस में हजारों की संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए और पूरे रास्ते मातम करते हुए हजरत अली की शहादत को याद किया। इस ऐतिहासिक जुलूस को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। जुलूस मार्ग पर चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया था और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी गई।
जुलूस निकलने से पहले सआदतगंज स्थित Kufa Masjid, Lucknow में मजलिस आयोजित की गई। मजलिस में बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग शामिल हुए। इस दौरान धार्मिक विद्वानों ने हजरत अली की शहादत से जुड़ी घटनाओं को याद करते हुए तकरीर की। मजलिस के बाद नमाज अदा की गई और शिया समुदाय के लोगों ने अमन, शांति और भाईचारे के लिए दुआ मांगी। इसके बाद पारंपरिक तरीके से मातमी जुलूस की शुरुआत हुई। जुलूस में शामिल अकीदतमंद “या अली” और “या हुसैन” के नारों के साथ मातम करते हुए आगे बढ़ते रहे। पूरे रास्ते श्रद्धालु हजरत अली की शहादत को याद करते हुए गम का इजहार करते नजर आए।
यह जुलूस सआदतगंज क्षेत्र से निकलकर कई महत्वपूर्ण मार्गों और मोहल्लों से होकर गुजरा। जुलूस का रूट टूरियावांज, सरकटा नाला और बिल्लौचपुरा जैसे इलाकों से होते हुए चौक क्षेत्र के Imambara Taqi Zaidi, Lucknow तक तय किया गया था। जुलूस के दौरान रास्ते में कई स्थानों पर लोगों ने सबील और शर्बत का इंतजाम किया था। श्रद्धालुओं को पानी और शर्बत पिलाकर खिदमत की गई। जुलूस मार्ग पर जगह-जगह पर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने स्वागत की व्यवस्था भी की थी।
इस जुलूस का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। इस्लामी इतिहास के अनुसार 19वीं रमजान को Ali ibn Abi Talib पर तलवार से हमला किया गया था। उस हमले के बाद दो दिन तक जख्मी रहने के बाद 21 रमजान को उनकी शहादत हुई थी। हजरत अली इस्लाम के चौथे खलीफा और पैगंबर मोहम्मद के दामाद थे। शिया समुदाय के लिए उनका स्थान बेहद सम्मान और श्रद्धा का है। इसी घटना को याद करते हुए हर साल रमजान की 21 तारीख को मातमी जुलूस निकाला जाता है। इस दौरान लोग काले कपड़े पहनकर मातम करते हैं और उनकी शहादत को याद करते हैं।
पुलिस प्रशासन के अनुसार इस जुलूस में लगभग 25 हजार से अधिक लोग शामिल होते हैं। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में अकीदतमंद जुलूस में शामिल हुए। Vishwajeet Srivastava ने बताया कि यह शिया समुदाय का बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा जुलूस है। इसमें हजारों लोग एक साथ चलते हैं, इसलिए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारियां की गई थीं। उन्होंने बताया कि पुलिस प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर था कि जुलूस शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो और किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
जुलूस को देखते हुए Lucknow Police Commissionerate की ओर से व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बाहर से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया था। प्रशासन की ओर से कुल 10 एडिशनल एसपी और 32 डिप्टी एसपी को सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए तैनात किया गया था। इसके अलावा करीब 500 पुलिसकर्मियों को बाहर से बुलाकर जुलूस मार्ग पर लगाया गया था। सुरक्षा के लिए 12 कंपनी पीएसी, 2 कंपनी RAF और CRPF की टुकड़ियां भी तैनात की गई थीं।
जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को तकनीक से भी मजबूत किया गया था। जुलूस मार्ग के 52 संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जिनके जरिए लगातार निगरानी की जा रही थी। इसके अलावा ड्रोन कैमरों की मदद से भी पूरे जुलूस और आसपास के क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही थी। पुलिस कंट्रोल रूम से इन सभी कैमरों की लाइव मॉनिटरिंग की जा रही थी ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
जुलूस मार्ग की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने विशेष रूप से रूफटॉप ड्यूटी भी लगाई थी। प्रशासन की ओर से 91 स्थानों पर छतों पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। ये पुलिसकर्मी ऊंचाई से पूरे जुलूस मार्ग पर नजर बनाए हुए थे ताकि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि या अव्यवस्था को तुरंत रोका जा सके।
पुलिस प्रशासन ने जुलूस को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए विशेष रणनीति अपनाई। जुलूस को “बॉक्स फॉर्मेशन” में लेकर चलाया गया। इस व्यवस्था के तहत जुलूस के आगे और पीछे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहे। इसके अलावा जुलूस के दोनों ओर भी पुलिसकर्मी मौजूद रहे ताकि भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके। महत्वपूर्ण चौराहों और मार्गों पर इंस्पेक्टर और एसीपी स्तर के अधिकारियों को तैनात किया गया था।
प्रशासन ने लोगों से शांति और भाईचारे के साथ जुलूस में शामिल होने की अपील की थी। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सभी समुदायों के सहयोग से यह धार्मिक कार्यक्रम हर साल शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होता है। इस वर्ष भी प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से जुलूस पूरी तरह शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। धार्मिक आस्था, अनुशासन और भाईचारे का संदेश देता यह जुलूस राजधानी की गंगा-जमुनी तहजीब की झलक भी पेश करता है।
Updated on:
09 Mar 2026 01:18 pm
Published on:
09 Mar 2026 12:51 pm
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