
लखनऊ. कई बार ऐसा होता है जब महिलाएं अपने हक और सम्मान के लिए समाज में लड़ाई लड़ती हैं। उन्हें चाहिए कि लोग उनका आदर करें और इज्जत भरी नजरों से देखें। ये बात सच है कि आज के क्रूर समाज में महिलाओं को अपने अधिकार के लिए लड़ना पड़ता है। भारत के कुछ ऐसे पिछड़े इलाके हैं, जहां महिलाएं घर की चहार दीवारी और क्रूर परंपराओं से बाहर नहीं निकल पाई हैं। लेकिन अपने हक के लिए आवाज उठाना कभी-कभी गलत साबित हो सकता है।एम वी मीडिया इंस्टीट्यूट की तरफ से आयोजित किए गए नाटक में इसी बात की पुश्ती की गयी है कि महिला अधिकारों के गलत इस्तेमाल से पुरुष वर्ग पर अत्याचार हो रहा है या हो सकता है।
महिलाएं भी हो सकती हैं गलत
इंस्टीट्यूट के सभी छात्र एवं छात्राओं ने इसमें भाग लेकर और अपनी प्रतिभा दिखाते हुए लोगों तक अपनी बात पहुंचाई। 2016 के NCRB के आंकड़ों के मुताबिक महिला अधिकारों से जुड़े कई मामलों में कोई भी सत्यता नहीं पाई गई। जारी किए गए उन आंकड़ों के मुताबिक 956 महिलाओं के साथ जघन्य अपराध हुए जिसने यौन शोषण के मामले सबसे ज्यादा पाए गए थे। इसमें लखनऊ पांचवे नंबर पर पाया गया था। आंकड़ों के अनुसार लखनऊ से ऊपर केवल दिल्ली (7,392 बाल अपराध), मुंबई (3,400), पुणे (1,180) और बंगलुरु (1,086) हैं।
अधिकार के लिए होता है गलत इस्तेमाल
नुक्कड़ नाटक के जरिये एम वी मीडिया इंस्टिटयूट के छात्रों ने इसी बात का खंडन किया है। कई बार ऐसा पाया गया है कि महिलाएं अपने हक के लिए गलत इस्तेमाल करती हैं। एम वी मीडिया इंस्टीट्यूट के छात्र छात्राओं द्वारा किये गए नुक्कड़ नाटक ने इसी मुद्दे पर लोगों को जागरूक किया।
इन्होंने किया नाटक का मंचन
एम वी मीडिया इंस्टीट्यूट की डायरेक्टर शिवानी त्रिवेदी एवं अन्य शिक्षकों की देख रेख में इस नाटक का मंचन किया गया। इसके साथ ही इस नाटक का लेखन और निर्देशन एम वी मीडिया इंस्टीट्यूट की छात्रा अनन्या श्रीवास्तव ने किया, जिसमें इंस्टीट्यूट के ही छात्र तकवीम सिद्दकी ने उनका सहयोग किया।
Updated on:
24 Mar 2018 01:41 pm
Published on:
24 Mar 2018 12:05 pm
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