
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मिला एयरोड्रम लाइसेंस, सीएम योगी को सौंपा गया दस्तावेज (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
UP Cabinet Meeting: उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रगति सामने आई है। मंगलवार को एयरपोर्ट प्रबंधन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर भारत सरकार की ओर से जारी एयरोड्रम लाइसेंस उन्हें प्रस्तुत किया। इस लाइसेंस के मिलने के साथ ही जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में एक बड़ा चरण पूरा हो गया है।
मुख्यमंत्री से हुई इस मुलाकात के दौरान एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) क्रिस्टोफ श्नेलमैन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने परियोजना की वर्तमान स्थिति तथा आगे की योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी दी। अधिकारियों के अनुसार एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अब एयरपोर्ट के उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान एयरपोर्ट के निर्माण, तकनीकी सुविधाओं, संचालन व्यवस्था और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी।मुख्यमंत्री को बताया गया कि एयरपोर्ट का निर्माण कार्य तेजी से अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार किया जा चुका है और अब नियामकीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
सीएम योगी ने इस अवसर पर परियोजना से जुड़े अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और राज्य को वैश्विक निवेश और पर्यटन के नए अवसर प्रदान करेगा।
अधिकारियों ने बताया कि एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अब अंतिम चरण की कुछ और स्वीकृतियां शेष हैं। वर्तमान में एयरपोर्ट का एयरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) के पास समीक्षा के लिए लंबित है। जैसे ही यह सुरक्षा मंजूरी मिलती है, एयरपोर्ट प्रबंधन सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर औपचारिक उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत की तिथि तय करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह प्रक्रिया तय समय के अनुसार पूरी हो जाती है तो जल्द ही यहां से नियमित उड़ान सेवाएं शुरू हो सकती हैं।
गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर क्षेत्र में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में से एक है। इस एयरपोर्ट का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में हवाई यातायात का दबाव कम करना और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को वैश्विक स्तर पर बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करना है। परियोजना को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है, जहां आधुनिक तकनीक और यात्री सुविधा को प्राथमिकता दी गई है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है।
पहले चरण में निर्मित टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल लगभग 1.38 लाख वर्ग मीटर है। इसमें यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं।
टर्मिनल में-
इसके अलावा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए आधुनिक लाउंज की भी व्यवस्था की जा रही है, ताकि यात्रियों को आरामदायक यात्रा अनुभव मिल सके।
एयरपोर्ट परिसर में विमान संचालन के लिए भी अत्याधुनिक व्यवस्था विकसित की गई है। यहां 10 एयरोब्रिज बनाए गए हैं, जिससे यात्रियों को विमान तक पहुंचने में सुविधा होगी। इसके अलावा 28 विमान पार्किंग स्टैंड तैयार किए गए हैं, जहां एक साथ कई विमानों को खड़ा किया जा सकेगा। रनवे को इस तरह विकसित किया गया है कि यहां से प्रति घंटे लगभग 30 उड़ानों का संचालन किया जा सके।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल यात्री सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। प्रारंभिक चरण में यहां 2.5 लाख टन प्रतिवर्ष कार्गो क्षमता विकसित की जा रही है। भविष्य में इसे बढ़ाकर 15 लाख टन कार्गो प्रतिवर्ष तक ले जाने की योजना है। इससे निर्यात और आयात कारोबार को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
एयरपोर्ट को तकनीकी रूप से भी अत्याधुनिक बनाया जा रहा है। यात्रियों को तेज और सहज यात्रा अनुभव देने के लिए कई डिजिटल सुविधाएं लागू की जा रही हैं।
इनमें प्रमुख हैं-
विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। एयरपोर्ट के आसपास औद्योगिक, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर भी मिल सकते हैं।
वर्तमान में दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट क्षेत्र के हवाई यातायात का मुख्य केंद्र है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुरू होने के बाद दिल्ली-एनसीआर में यात्रियों के लिए एक और बड़ा विकल्प उपलब्ध होगा, जिससे हवाई यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है।
राज्य सरकार का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे को नई दिशा देगा। यह एयरपोर्ट केवल एक परिवहन सुविधा नहीं बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था, निवेश और वैश्विक कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाला बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा है। एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जल्द शुरू होने की उम्मीद और भी मजबूत हो गई है। आने वाले समय में यह एयरपोर्ट उत्तर भारत के प्रमुख एविएशन हब के रूप में उभर सकता है।
Published on:
10 Mar 2026 01:57 pm
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