
मां कात्यायनी
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विधान है। कात्यायनी मां दुर्गा का छठा स्वरूप है। अमरकोष में 'कात्यायनी' मां पार्वती का दूसरा नाम है। संस्कृत शब्दकोश में उमा, कात्यायनी, गौरी, काली, हेमावती और ईश्वरी इन्हीं के अन्य नाम हैं। शक्तिवाद में उन्हें शक्ति या दुर्गा कहते हैं। इसमें भद्रकाली और चंडिका भी शामिल हैं। यजुर्वेद के तैंतीसवें आरण्यक में उनका उल्लेख प्रथम किया है।
स्कन्द पुराण में उल्लेख है कि वे परमेश्वर के नैसर्गिक क्रोध से उत्पन्न हुई थीं। जिन्होंने देवी पार्वती द्वारा दिए गए सिंह पर सवार होकर महिषासुर का वध किया। वे शक्ति की आदि रूपा है, जिसका उल्लेख पाणिनि पर पतञ्जलि के महाभाष्य में किया गया है, जो दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में रचित है। उनका वर्णन देवीभागवत पुराण, और मार्कंडेय ऋषि द्वारा रचित मार्कंडेय पुराण के देवी महात्म्य में किया गया है जिसे 400 से 500 ईसा में लिपिबद्ध किया गया था।
कैसे पड़ा मां का नाम कात्यायनी?
माता दुर्गा के छठे स्वरूप का नाम कात्यायनी कैसे पड़ा। इसकी कथा के अनुसार "कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे। उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए। इन्हीं कात्य के गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे। इन्होंने भगवती पराम्बा की उपासना करते हुए बहुत वर्षों तक बड़ी कठिन तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी माँ भगवती उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। माँ भगवती ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली।"
"कुछ समय पश्चात जब दानव महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बढ़ गया तब भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों ने अपने-अपने तेज का अंश देकर महिषासुर के विनाश के लिए एक देवी को उत्पन्न किया। महर्षि कात्यायन ने सर्वप्रथम इनकी पूजा की। इसी कारण से यह कात्यायनी कहलाईं।" एक दूसरी कथा के अनुसार "ये महर्षि कात्यायन के वहाँ पुत्री रूप में उत्पन्न हुई थीं। आश्विन कृष्ण चतुर्दशी को जन्म लेकर शुक्त सप्तमी, अष्टमी तथा नवमी तक तीन दिन इन्होंने कात्यायन ऋषि की पूजा ग्रहण कर दशमी को महिषासुर का वध किया था।"
ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं मां कात्यायनी
मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं। भगवान कृष्ण को पतिरूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्हीं की पूजा कालिन्दी-यमुना के तट पर की थी। ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। माता का ये स्वरूप संयम और साधना का प्रतीक है। मां कात्यायनी का स्वरूप चमकीला और तेजमय है। मां कात्यायनी की पूजा करने से भक्तों को आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही इनकी पूजा से शीघ्र विवाह के योग, मनचाहा जीवनसाथी मिलने का वरदान प्राप्त होता है। कहा जाता है कि द्वापर युग में गोपियों ने श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए माता कात्यायनी की पूजा की थी।
ग्रह और कुंडली के दोष होते हैं दूर
मां कात्यायनी की पूजा करने से भक्तों को आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है. उनको रोग, संताप और अनेकों प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। देवी भागवत पुराण के अनुसार देवी के इस स्वरुप की पूजा करने से शरीर कांतिमान हो जाता है। इनकी आराधना से गृहस्थ जीवन सुखमय रहता है। मां दुर्गा के छठवें रूप की पूजा से राहु और कालसर्प दोष से जुड़ी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
विवाह संबंधी रुकावटें हैं तो मां को यह अर्पित करें
श्रीमद देवी भागवत के अनुसार "जो अविवाहित हैं या जिनके विवाह में कोई परेशानी आ रही है, उनके द्वारा विधि पूर्वक की गयी मां कात्यायनी की पूजा सर्वश्रेष्ठ फल प्रदान करती है। मां कात्यायनी की पूजा से अविवाहित लड़कियों के विवाह के योग बनते हैं और सुयोग्य वर भी मिलता है। जिन साधकों को विवाह से सम्बंधित समस्या है, इस दिन मां को हल्दी की गांठें अर्पित करें। ऐसा करने से मां उन्हें उत्तम फल प्रदान करतीं हैं। इसके लिए साधक ॐ कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि । नंदगोपसुतम् देवि पतिम् मे कुरुते नम:॥ का जाप करें।"
यह उपाय करने से मिलेगा अभीष्ट लाभ
इस दिन भगवान हारण्य की स्थापना की जाती है। यह एक मणि में विराजमान रहते हैं। पैंतालीस दिन लगातार इनकी पूजा की जाती है। इस उपाय से जवीन में कठिन से कठिन समस्याओं का निदान होता है। देवी कात्यायनी की पूजा से रोग, शोक, संताप, भय आदि का नाश हो जाता है।
मनोकामना पूर्ति के लिए यह करें
आज पूरा दिन मां कात्यायनी की पूजा के लिए समर्पित है। ऐसे में आज यानी नवरात्रि के छठवें दिन मनोकामना पूर्ति के लिए गोबर के उपले या कंडे जलाकर उस पर लौंग व कपूर की आहुति दें। इसके बाद माता को शहद का भोग लगाएं। ऐसा करने से जीवन में आ रही बाधा दूर होती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
धन प्राप्ति के लिए
आज दिन में कभी भी एक नारियल लें और उसके साथ एक लाल, पीले और सफेद रंग का फूल लेकर माता को अर्पित कर दें। इसके बाद नवमी तिथि की शाम को फूलों को नदी में प्रवाहित कर दें और नारियल पर लाल कपड़ा लपेटकर तिजोरी या फिर अलमारी में रख दें। ऐसा करने से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।
जीवन में आती है तरक्की
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नौकरी व व्यवसाय में उन्नति के लिए मिट्टी के दो दीपक लें और उनमें कपूर जलाएं। इसके बाद सरसों के तेल का दीपक बनाकर माता की आरती उतारें। ऐसा करने से तरक्की के मार्ग खुलते हैं। साधक मां कात्यायनी का इस मंत्र "चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी च शुभदा देवी दानवघातिनी॥" का नियमित रूप से जाप कर मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं।
Published on:
26 Mar 2023 10:13 pm
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