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कहने के लिए राज्यपुष्प, यूपी की नर्सरियों में पलाश के सिर्फ 74 पौधे उपलब्ध

बसंत ऋतु में खिलने वाला पुष्प पलाश बहुत लाभदायक होता है। इसे टेसू का फूल भी कहा जाता है

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कहने के लिए राज्यपुष्प, यूपी की नर्सरियों में पलाश के सिर्फ 74 पौधे उपलब्ध

लखनऊ. बसंत ऋतु में खिलने वाला पुष्प पलाश बहुत लाभदायक होता है। इसे टेसू का फूल भी कहा जाता है। पलाश तीन तरह का होता है। एक वह जिसमें सफेद फूल उगते हैं, दूसरा वह जिसमें पीले फूल उगते हैं और तीसरा वह जिसमें लाल-नारंगी फूल उगते हैं। तीनों ही तरह के पलाश फायदेमंद होते हैं लेकिन प्रदेश की नर्सरियों में इसका पौधा बमुश्किल से मिलता है। सभी सरकारी और निजी नर्सरियों में 11.55 करोड़ पौधे उपलब्ध हैं जिनमें से पलाश के पौधे 78 हैं। इसका सीधा सा कारण है पलाश की मांग न होने के कारण ये नर्सरियों में उपलब्ध नहीं है।

दोना-पत्ते बनाने के काम आता है पलाश का फूल

प्रदेश सरकार ने पलाश को 2011 में राज्य पुष्प घोषित किया था। उत्तराखंड अलग राज्य बनने से पहले राज्य पुष्प ब्रह्म कमल था। वह 10 हजार से ज्यादा फूट की ऊंचाई पर पाया जाता था। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार यह चर्म रोग, ज्वर, सिरोसिस और आंखों की रौशनी बढ़ाने के साथ-साथ कई बीमारियों को ठीक करता है। इसके पत्ते दोना और पत्तल बनाने के काम आते हैं। पलाश के पत्तों का उपयोग गांव के लोग दोने-पत्ते बनाने के लिए करते हैं जबकि इसके फूलों से होली के रंग बनाए जाते हैं। यही नहीं बल्कि पलाश को पीसकर चेहरे पर लगाने से चमक बढ़ती है। ये त्वचा संबंधी रोगों को दूर करने में मदद करता है साथ ही पलाश की पलियां कृमिनाश्क का भी काम करती हैं।

पलाश के औषधीय गुण