
Oxygen wasted most in 10 hospitals in UP
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के दस अस्पतालों में कोरोना की दूसरी लहर के बीच ऑक्सीजन की जमकर बर्बादी हुई है। इनमें सरकारी और निजी अस्पताल दोनों ही शामिल हैं। इन अस्पतालों में प्रति मरीज ऑक्सीजन की खपत 20 एलएमपी (लीटर प्रति मिनट) रही जो सामान्य से काफी अधिक है। आईआईटी कानपुर की ऑडिट रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। तीन मई से 29 मई के बीच इन अस्पतालों में ऑक्सीजन का ऑडिट किया गया था। कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी होने पर प्रदेश सरकार के निर्देश पर आईआईटी ने ऑक्सीजन ऑडिट ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार किया था। प्रदेश भर की यूनिवर्सिटी के बीच 53 निजी और सरकारी अस्पतालों को बांटा गया, जिनको अस्पतालों में ऑक्सीजन की खपत और बर्बादी का डाटा एकत्र करना था।
अगर बहुत स्थिति खराब भी हो तो यह छह से सात लीटर प्रति मिनट से अधिक नहीं होती है। वहीं, पांच अस्पताल ऐसे थे जिनमें 10 लीटर प्रति मिनट से भी कम ऑक्सीजन की खपत हुई। आईआईटी के प्रो. मणींद्र अग्रवाल के नेतृत्व में डाटा इकट्ठा किया गया। प्रो. अग्रवाल ने बताया कि रिपोर्ट शासन को सौंपी जा चुकी है। इसके आधार पर ही आगे के नियम बनाए जाएंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना की तीसरी लहर से बचना है तो ऑक्सीजन की बर्बादी को रोकना होगा। अगर इसी तरह से ऑक्सीजन की बर्बादी होती रही, तो तीसरी लहर में हालात और भी खराब होंगे।
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कोई मरीज ऑक्सीजन पर है और उसे खाना-पीना है तो वह मास्क हटा देता है पर ऑक्सीजन तब भी चलती रहती है। अस्पताल में जब मरीज का बेड बदला जाता है, तब भी ऑक्सीजन सिलिंडर को बंद नहीं किया जाता है। मरीजों की संख्या बढ़ने पर कई अप्रशिक्षित स्टॉफ ने भी ऑक्सीजन लगाने-हटाने का काम किया, ऐसे में काफी बर्बादी हुई।
इस तरह खर्च हुई ऑक्सीजन
ऑक्सीजन के इस्तेमाल करने की चार डिवाइस होती है। ऑक्सीजन मास्क, नॉन री ब्रीथिंग ऑक्सीजन मॉस्क, नॉन इनवेसिव पॉजिटिव प्रेशर वेंटिलेशन (एनआईपीपी), हाई फ्लो नेजल कैनुअला (एचएफएनसी)। रिपोर्ट के अनुसार एचएफएनसी का इस्तेमाल 6.3 फीसदी मरीजों पर हुआ और इसमें करीब 11 फीसदी ऑक्सीजन की खपत हुई। जहां 2 लीटर प्रति मिनट की जरूरत थी वहां 20 लीटर की सप्लाई हुई। एनआईपीपी का इस्तेमाल 12.74 फीसदी मरीजों पर हुआ और इसमें 14.4 फीसदी ऑक्सीजन का इस्तेमाल हुआ। सिंपल ऑक्सीजन मास्क का इस्तेमाल 44.17 फीसदी पर हुआ, इसमें 35.5 फीसदी ऑक्सीजन खर्च हुई। नॉन री ब्रीथिंग ऑक्सीजन मॉस्क का इस्तेमाल 31.3 फीसदी मरीजों पर किया गया, इसमें 35.5 फीसदी ऑक्सीजन की खपत हुई।
आगरा के पारस हॉस्पिटल को क्लीन चिट
वहीं आगरा में एक निजी अस्पताल में 'ऑक्सीजन मॉक ड्रिल' के दौरान कई मरीजों की मौत होने का आरोप लगा था। इस अस्पताल के मालिक का एक ऑडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वो कथित रूप से कहते हैं कि 27 अप्रैल को उन्होंने पांच मिनट के लिए ऑक्सीजन सप्लाई बंद कर दी थी। हालांकि, यूपी सरकार ने अपनी जांच में अस्पताल को क्लीन चिट दे दी है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सभी मरीजों का इलाज कोविड प्रोटोकॉल के तहत हो रहा था और सबूत देखने के बाद पता चलता है कि किसी भी मरीज की ऑक्सीजन सप्लाई बंद नहीं हुई थी। रिपोर्ट में सभी मौतों की वजह एडवांस्ड डिजीज और कोमोर्बिडिटी बताई गई।
Updated on:
19 Jun 2021 01:56 pm
Published on:
19 Jun 2021 01:31 pm
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