26 मई 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पंचायत चुनाव: ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के बाद टूटी पुरानी परंपरा; बड़े फैसले लेने के लिए करना होगा ये काम

Panchayat Chunav Update: पंचायत चुनाव में देरी के बीच बड़ा फैसला लिया गया है। छह महीने तक प्रशासक मौजूदा ग्राम प्रधान बने रहेंगे। जानिए इससे कौन सी पुरानी परंपरा टूटी है।

2 min read
Google source verification

लखनऊ

image

Harshul Mehra

May 26, 2026

panchayat chunav update old tradition broken after gram pradhans appointed administrators lucknow news

पंचायत चुनाव में देरी के बीच बड़ा फैसला। फोटो सोर्स-Ai

Panchayat Chunav Update:उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की रफ्तार अब नहीं थमेगी। पंचायत चुनाव में संभावित देरी को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लेते हुए मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही अगले 6 महीने तक प्रशासक बनाए जाने को मंजूरी दे दी है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर के निर्देश पर प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार ने सोमवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया।

बुधवार से संभालेंगे प्रशासक की जिम्मेदारी

सरकार के आदेश के अनुसार बुधवार से प्रदेश की सभी 57,694 ग्राम पंचायतों में निवर्तमान प्रधान प्रशासक के तौर पर काम करेंगे। इससे गांवों में चल रहे जरूरी विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे।

सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, मनरेगा के काम, सड़क मरम्मत और अन्य बुनियादी योजनाएं पहले की तरह जारी रहेंगी। सरकार का मानना है कि पंचायतों में प्रशासनिक खालीपन से विकास कार्य बाधित हो सकते थे, इसलिए यह व्यवस्था लागू की गई है।

आरक्षण प्रक्रिया बनी पंचायत चुनाव में देरी की वजह

प्रदेश में पंचायत चुनाव टलने की सबसे बड़ी वजह आरक्षण प्रक्रिया को माना जा रहा है। पिछड़ा वर्ग आरक्षण तय करने के लिए गठित समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने में अभी समय लगेगा।

इसी कारण पंचायत चुनाव की प्रक्रिया फिलहाल आगे बढ़ती नहीं दिख रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पंचायत चुनाव अब विधानसभा चुनाव 2027 के बाद ही कराए जा सकते हैं।

डीएम को मिला प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार

सरकारी आदेश के मुताबिक मंगलवार को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होते ही जिलाधिकारी संबंधित ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में नामित करेंगे।

हालांकि प्रशासकों के अधिकार सीमित रहेंगे। वे केवल सामान्य और रोजमर्रा के कार्यों को ही संचालित कर सकेंगे। किसी बड़े वित्तीय या नीतिगत फैसले के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

जुलाई में क्षेत्र और जिला पंचायतों का भी खत्म होगा कार्यकाल

प्रदेश में केवल ग्राम पंचायतों का ही नहीं, बल्कि क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों का कार्यकाल भी जल्द समाप्त होने वाला है।

-ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो रहा है।

-क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल 19 जुलाई तक रहेगा।

-जिला पंचायतों का कार्यकाल 11 जुलाई को समाप्त होगा।

ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि जुलाई में इन संस्थाओं में भी प्रशासकों की नियुक्ति की जा सकती है।

टूटी पुरानी परंपरा

अब तक परंपरा यह रही है कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद एडीओ पंचायत को प्रशासक नियुक्त किया जाता था, लेकिन इस बार सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। राष्ट्रीय पंचायत राज ग्राम प्रधान संघ लंबे समय से मांग कर रहा था कि गांवों के विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए मौजूदा प्रधानों को ही जिम्मेदारी दी जाए। सरकार ने इसी मांग को स्वीकार करते हुए निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक बनाने का फैसला लिया है।

गांवों में विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने पर जोर

सरकार का मानना है कि मौजूदा प्रधान गांवों की जरूरतों और चल रही योजनाओं से बेहतर तरीके से परिचित हैं। ऐसे में उनके प्रशासक बनने से विकास कार्यों में रुकावट नहीं आएगी और पंचायत स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू बनी रहेगी।