
Patrika KeyNote 2018 में बोले दिनेश शर्मा, संस्कृत विद्यालयों के साथ आधुनिक शिक्षा से जुड़ेंगे मदरसे
लखनऊ. उपमुख्यमंत्री डाॅ. दिनेश शर्मा ने पत्रिका कीनोट में शिक्षा की गुणवत्ता के साथ संस्कृत विद्यालयों और मदरसों पर भी खुलकर अपनी बात रखी। बेबाकी से उन्होंने कहा कि आसान नहीं था यूपी बोर्ड में नकलविहीन परीक्षा कराना। बहुत दबाव था। तमाम तरह के विरोध थे। इसके बाद भी हमने नकलविहीन परीक्षा कराकर शिक्षा की गुणवत्ता सुधारी है। संस्कृत विद्यालयों में पढ़ाई के साथ मदरसों को भी आधुनिक शिक्षा से जोड़ा जा रहा। यहां के विद्यार्थियों के एक हाथ में पारंपरिक शिक्षा हो तो दूसरे हाथ में कंप्यूटर होना चाहिए।
पत्रिका का मंच लगा अलग
डाॅ. दिनेश शर्मा ने विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि आम तौर पर मीडिया के कार्यक्रमों में हम अपनी ही बातों को बताने के लिए आते हैं। लेकिन यह पहला मंच है जहां मुझे लगा कि मैं एक सामाजिक परिवर्तन के मंच पर आया हूं। जहां समाज की चिंता है। सामाजिक परिवर्तन की बात होे रही। समाज के टूटते तानाबाना पर चिंता जताई जा रही।
शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार ला रहे
उप मुख्यमंत्री डाॅ.दिनेश शर्मा ने कहा कि शिक्षा परिवर्तन का सबसे बड़ा वाहक है। इसकी गुणवत्ता में आई गिरावट से समाज का नैतिक पतन भी हुआ। हमने पाठ्यक्रम में बदलाव कर गुणवत्ता में सुधार की कोशिश की है। अब पूरे प्रदेश में एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाई जाएंगी। पहले व्यवसायीकरण हावी था। अलग-अलग लेखक के अलग-अलग जिलों में किताबें लागू थी। लेकिन हमने यह व्यवस्था खत्म की। नकल को रोकने के लिए शिक्षा में आई विकृति को रोकने का काम किया। सबसे पहले सेंटरों का निर्धारण आॅनलाइन किया। छात्रों के एनरोलमेंट को आधार कार्ड से जोड़ दिया। इस बार परीक्षा में करीब ग्यारह लाख परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ी। इसमें सबसे अधिक बाहरी छात्र थे जो दूसरे प्रदेशों से केवल डिग्री लेने आते थे। हमने यह तय किया कि सेंटर वही बनाए जाएंगे जिनकी कक्षाओं में सीसीटीवी हो, फर्नीचर हो। काॅलेज में बाउंड्री वाल हो।
एक झटके में खड़ा हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर
डाॅ.शर्मा ने बताया कि हमने इस व्यवस्था से एक झटके में बिना सरकार के एक रुपया खर्च किए काॅलेजों-स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर दिया। उन्होंने बताया कि जुलाई की बजाय हमनें एक अप्रैल से सत्र शुरू किया है। बगैर भेदभाव के हमनें पाठ्यक्रम लागू किया। चारित्रिक पतन को रोकने के लिए पाठ्यक्रम को संकलित किया है।
शिक्षा के क्षेत्र में लिए बड़े निर्णय
उन्होंने अपना एक किस्सा सुनाते हुए बताया कि कैसे जब लखनउ के गवर्नमेंट जुबली काॅलेज में जब उनका एडमिशन हुआ था तो उनकी मां ने ढोल-नगाड़े बजवाकर उनका स्वागत किया था। पूरे मोहल्ले में मिठाईयां बांटी गई थीं। डाॅ. शर्मा ने चिंता जताते हुए कहा कि दस पंद्रह सालों में ही सरकारी स्कूलों की शिक्षा में गिरावट आई है। इसका सबसे बड़ा कारण सेंटर बनाया जाना है। लेकिन हमने इस सेंटर के काकस को तोड़ा है। हालांकि, इसको करने मेंं तमाम जनप्रतिनिधियों-ब्यूरोक्रेट्स का दबाव पड़ा लेकिन हम झुके नहीं। उन्होंने बताया कि इस बार बिना किसी छात्र को हथकड़ी लगाए, शिक्षक को हथकड़ी लगाए हमने नकलविहीन परीक्षा कराई है। किसी सेंटर में पुलिस अंदर नहीं गई। हमने पहले ही बदनाम सेंटरों को चिंहित किया। साल्वरों पर शिकंजा कसा। उन्होंने बताया कि इस बार सत्र में पढ़ाई अधिक से अधिक हो सके इसके लिए भी कई कड़े निर्णय लिए गए हैं। लंबे अवकाशों को कम किया गया है। उन्होंने बताया कि फीस बढ़ोत्तरी पर भी शिकंजा कसा गया है। फीस निर्धारण के लिए नीति बनाई गई है। मंडलायुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी भी गठित है। हम शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन करने जा रहे हैं।
नारायण-नारायण-नारायण का मतलब समझाया
डाॅ. दिनेश शर्मा ने कहा कि डिजिटल क्रांति आज की बात नहीं है। हमारा विज्ञान पहले से ही काफी उन्नत रहा। डिजिटल क्रांति तो पहले भी थी। नारद जी पहले पत्रकार थे। उन्होंने कहा कि नारद मुनि जिस तरह नारायण-नारायण-नारायण बोलते थे और उनकी सूचना हर जगह प्रसारित हो जाती थी। उसी तरह आप आज डब्ल्यू-डब्ल्यू-डब्ल्यू टाईप करते हैं और सारी सूचनाओं तक पहुंच जाते हैं।
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Published on:
07 Apr 2018 01:28 pm
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