
अस्थि भरी मटकियों को भी लॉकडाउन खुलने का इंतजार, पिंड दान न करने से परेशान लोग इस बैंक में जमा कर रहे अस्थियां
लखनऊ. वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण लागू हुए लॉकडाफन में मृतकों का मोक्ष फंस गया है। लॉकडाउन में मरने वालों का न पिंड दान हो पा रहा है और न ही गंगा में अस्थियों का विसर्जन कर पा रहे हैं। जो एसडीएम से अनुमति लेकर अस्थियों का विसर्जन करने पहुंच बी रहे हैं, उन्हें मायूस होकर वापस लौटना पड़ रहा है। वजह मोक्ष की रस्म निभाने वाले पंडितों का नहीं मिलना है। लखनऊ, कानपुर, बरेली, प्रयागराज, वाराणसी समेत लगभग सभी जिलों में यही हाल है। अस्थि विसर्जन न होने के कारण लोग शमशान में ही अस्थी रखने को मजबूर हैं। इससे दाह संस्कार में देरी तो हो ही रही है साथ ही अंतिम संस्कार के लिए दी जाने वाली लकड़ी और दूसरे सामान बेचने वाले दुकानदारों की रोजी रोटी पर भी असर पड़ रहा है।
लोगों में कोरोना का डर
लॉकडाउन का असर शमशान घाटों पर देखने को मिल रहा है। राजधानी लखनऊ के भैंसा कुंड घाट में लॉकडाउन से पहले रोजाना हजारों की संख्या में अंतिम संस्कार होते थे। पर लॉकडाउन के बाद से अंतिम संस्कार बड़ी समस्या बन गया है। लिहाजा लोगों के पास लॉकडाउन खत्म होने का इंतजार करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। लॉकडाउन की अवधि तक लोग लॉकर में अस्थियां रखने को मजबूर हैं। भैंसाकुंड श्मशान घाट में बने लार्कस में लोग इन्हें 25 मार्च से रख रहे हैं। लॉकडाउन खत्म होने पर इनका विसर्जन हो पाएगा।
प्रयागराज में फंसे झारखंड से आए लोग
दिवंगत व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए अस्थि विसर्जन और पिंडदान के लिए झारखंड से प्रयागराज आए लोग लॉकडाउन के कारण अब इस शहर में फंस गए हैं। अस्थि विसर्जन करने के अगले ही दिन बंद लागू हो जाने से झारखंड से आए लोग यहीं फंस गए।
अस्थी कलश की समस्या
लॉकडाउन के कारण बहुत कुछ ठहर गया है। शमशान में रखीं अस्थियां भी लॉकडाउन खुलने के इंतजार में हैं। बरेली शहर के श्मशान भूमि में 250 अस्थियों से भरी मटकियां कतारबद्ध टंगी हुई हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण के डर की वजह से इन अस्थियों को श्मशान घाटों में रखा जा रहा है। लोगों को लॉकडाउन खुलने का इंतजार है। उनका मानना है कि लॉकडाउन खुलने के बाद ही इन अस्थियों को गंगा नदी में प्रवाहित किया जा सकेगा।
यूपी में इस समय कोरोना वायरस की सबसे ज्यादा मार झेलने वाली ताजनगरी में भी अस्थि विसर्जन की समस्या से लोगों को दो चार होना पड़ रहा है। लॉकडाउन का असर आगरा के शमशान घाटों पर देखने को मिल रहा है। यहां के सबसे बड़े मोक्ष धाम में चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है।
रोजगार पर संकट
जिस तरह अंतिम संस्कार करने में कमी आई है, उससे दुकानदारों की रोजी रोटी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जो दुकानदार अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी आदि का सामान बेचते हैं, उनका सामान बिकना कम हो गया है। लोगों की कम आवाजाही ये दुकानदार भूखमरी की कगार पर आ गए हैं।
कानपुर में अस्थी कलश बैंक
मौजूदा लॉकडाउन की स्थिति को देखते हुए कानपुर में एक विशेष तरह का बैंक बनाया गया है, जहां न सिर्फ अस्थियों को लॉक कर रहे हैं, बल्कि मरने वालों की अंतिम इच्छा को भी लॉक कर रहे हैं जिसे लॉकडाउन खुलते ही पूरा किया जाएगा।
दरअसल, कानपुर के भैरौ, बिठूर आदि घाटों पर रोजाना अंतिम संस्कार होते हैं, इसके बाद कुछ लोग बिठूर घाट पर अस्थि विसर्जन करते हैं तो कुछ लोग मरने वाले की अंतिम इच्छा के अनुसार संगम, हरिद्वार या काशी में अस्थि विसर्जन करने जाते हैं। लॉकडाउन होने के कारण फिलहाल ऐसा कर पाना मुश्किल हो रहा है। इसी के साथ मरने वाले की अंतिम इच्छा को पूरा न कर पाने से परेशान लोग शहर के अस्थी कलश बैंक में स्वजन की अस्थियां जमा कर रहे हैं। लॉकडाउन खुलने पर वह लोग अपनों की अंतिम इच्छा पूरी कर सकेंगे।
Updated on:
15 Apr 2020 03:58 pm
Published on:
15 Apr 2020 03:54 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
