
खाते में पहुंचा गन्ना किसानों का पैसा, समय पर हुआ भुगतान
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ ( Positive News ) प्रदेशभर के गन्ना किसानाें ( farmer ) के लिए अच्छी खबर है। अब उन्हे चीनी मिलों पर निर्भर नहीं रहना हाेगा। प्रदेश सरकार इथेनॉल के जरिए गन्ने को ग्रीन गोल्ड बनाने के कार्य जुटी है। इसके तहत गन्ने से इथेनॉल बनाने के 54 और चावल, गेहूं, जौ, मक्का तथा ज्वार से इथेनॉल बनाने के सात प्रोजेक्ट लगाए जा रहे हैं। इनमें से गन्ने से इथेनॉल बनाने वाले करीब 54 प्रोजेक्ट में से 27 प्रोजेक्ट उत्पादन के लिए तैयार है और 27 प्रोजेक्ट भी जल्द तैयार हाे जाएंगे। यानी अब वह दिन दूर नहीं जब किसानाें के लिए गन्ना ग्रीन गोल्ड हाेगा। चावल, गेहूं, जौ, मक्का तथा ज्वार से इथेनॉल बनाने वाले प्रोजेक्टों में भी अगले महीनों में उत्पादन शुरू होने करी उम्मीद है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ( UP CM Yogi Adityanath ) गन्ने से इथेनॉल बनाने वाले प्रोजेक्टों की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। इस दौरना उन्हाेंने तैयार प्रोजेक्टों में जल्द से जल्द उत्पादन शुरू करने के निर्देश दिए ताकि किसानाें की आदमनी को बढ़ाया जा सके। मुख्यमंत्री का गन्ने से इथेनॉल बनाने पर इसलिए अधिक जोर हैं क्योंकि गन्ना ( sugarcane in UP ) यूपी के किसानों की एक मुख्य नगदी फसल है। अभी तक तक चीनी मिले, खंडसारी और गुड के कारोबारी ही गन्ने पैदावार के खरीददार थे लेकिन अब गन्ने से इथेनॉल भी बनाई जाने लगी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही पहल पर राज्य में इथेनॉल उत्पादन के क्षेत्र में निवेश करने के लिए लोगों ने रूचि दिखाई है जिसके चलते अब किसानों को चीनी मिलों या खांडसारी करोबारियों के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा।
प्रदेश सरकार ने इथेनॉल उत्पादन को बढ़ाने की शुरुआत कर अब गन्ने को ग्रीन गोल्ड बनाने की तैयारी कर ली है। इस क्षेत्र में अब भारी निवेश हो रहा है। राज्य में गन्ने तथा अन्य अनाजों के जरिए इथेनॉल बनाने के लिए 61 प्रोजेक्ट लगाने के लिए लोगों का आगे आना इसका सबूत है। निवेश के इन प्रस्तावों के सूबे में आने से अब गन्ना उत्पादन में इजाफा होगा। सूबे के कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में राज्य में गन्ने तथा अन्य अनाजों से इथेनॉल बनाने संबंधी लगाए जा रहे कुल 61 प्रोजेक्टों से 25 लाख से अधिक किसानों को लाभ होगा। विशेषज्ञों के अनुसार दो माह पहले केंद्र सरकार ने इथेनॉल को स्टैंडर्ड फ्यूल घोषित किया है। ऐसे में अब इथेनॉल की मांग में इजाफा होगा जिसका संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने उचित समय पर इथेनॉल बनाने संबंधी प्रोजेक्ट लगाने में तेजी दिखाई है।
प्रदेश सरकार के इस प्रयास से उत्तर प्रदेश इथेनॉल के उत्पादन सबसे अन्य राज्यों से बहुत आगे निकल जाएगा। अभी भी उत्तर प्रदेश से हर वर्ष 126.10 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति की जाती है। राज्य में करीब 50 आसवानियां इथेनॉल बना रही हैं। इस वर्ष इथेनॉल बनाने संबंधी नए प्रोजेक्टों में उत्पादन शुरू होने से इथेनॉल उत्पादन में प्रदेश देश में सबसे ऊपर होगा और राज्य के किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा क्योंकि इन प्रोजेक्ट में गन्ना देने वाले किसानों को उनके गन्ने का भुगतान पाने के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा। और किसान गन्ना की फसल बोने से संकोच नहीं करेंगे। गन्ना किसानों के किए सोने जैसा खरा साबित होगा। इसी सोच के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गन्ने से इथेनॉल बनाने संबधी प्रोजेक्ट पर विशेष ध्यान देते हुए उनके शुरू करने की कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिया हैं।
जानिए क्या है इथनॉल
आसान भाषा में समझा जाए ताे इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है जिसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है। एथेनॉल का उत्पादन वैसे तो गन्ने से होता है लेकिन अब प्रदेश सरकार ने चावल, गेहूं, जौ, मक्का तथा ज्वार से भी इसे तैयार करने के सात प्रोजेक्ट स्थापित करने की अनुमति दी है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार राज्य में स्थापित और नए लग रहे प्रोजेक्ट से उत्पादित इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाकर 35 फीसदी तक कार्बन मोनोऑक्साइड कम किया जा सकता है। साथ ही, इससे सल्फर डाइऑक्साइड को भी किया जा सकता है। मौजूदा समय में केंद्र सरकार सरकार ने 2030 तक 20 फीसदी इथेनॉल पेट्रोल में मिलाने का लक्ष्य रखा है। पिछले साल सरकार ने 2022 तक पेट्रोल में 10 फीसदी इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखा था। सरकार के इस फैसले से आम लोगों को प्रदूषण से राहत मिलेगी। इथेनॉल का उत्पादन बढ़ने से गन्ना किसानों को सीधा फायदा होगा क्योंकि शुगर मिलों के पास आसानी से पैसा उपलब्ध हो जाएगा।
Updated on:
31 May 2021 08:28 pm
Published on:
31 May 2021 08:23 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
